तालिबान की सीक्रेट पावर
Pakistan Afghanistan Conflict: अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर तनाव चरम पर है. हाल ही में तालिबान लड़ाकों ने पाकिस्तान की कई सीमा चौकियों पर एक साथ हमला कर दिया था. बताया जा रहा है कि ये हमले पाकिस्तान की हालिया एयर स्ट्राइक के जवाब में किए गए. तालिबान ने दावा किया कि इस हमले में पाकिस्तान के कई सैनिकों को मार गिराया और चौकियों पर कब्जा कर लिया. दूसरी ओर, पाकिस्तान का कहना है कि उसने जवाबी कार्रवाई में तालिबान लड़ाकों को ढेर किया.
दोनों देशों के बीच बने जंगी हालातों (Pakistan Afghanistan War) के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि तालिबान के पास इतनी बड़ी सैन्य ताकत (Secret Of Taliban Power) आई कहां से, जो एक साथ इतने मोर्चों पर हमला कर सके? आइये इसे समझने की कोशिश करते हैं.
ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स 2025 के अनुसार, अफगानिस्तान (अब तालिबान शासन के नियंत्रण में) की सैन्य शक्ति दुनिया में 118वें स्थान पर है. 1990 के दशक में धार्मिक छात्रों के एक छोटे समूह के रूप में शुरू हुआ तालिबान, 2021 में काबुल पर कब्जा करने के बाद अब एक संगठित फौज का रूप ले चुका है.
कुछ रिपोर्ट के अनुसार तालिबान शासित अफगानिस्तान के पास 1.10 से 1.50 लाख सक्रिय सैनिक, करीब 1 लाख रिजर्व फोर्स, लगभग 14,000 करोड़ रुपए का सैन्य बजट, हल्के हथियार, रॉकेट, तोपें और अमेरिकी हथियारों का कुछ स्टॉक हैं. हवाई जहाज या नौसेना की कमी इनकी सबसे बड़ी कमजोरी है. वहीं गुरिल्ला युद्ध में इनकी विशेषता है.
तालिबान के पास आधुनिक हथियारों की कमी है, लेकिन उनकी सबसे बड़ी ताकत गुरिल्ला वॉरफेयर है. इसके जरिए वे छोटे समूहों में छिपकर हमला करते हैं. पहाड़ी इलाकों और कठिन भूगोल का फायदा उठाकर वे किसी भी शत्रु को चौंका सकते हैं. इस तरह, ये सेना भले ही आकार में पाकिस्तान की सेना से छोटी है, लेकिन स्थानीय भौगोलिक जानकारी और गुरिल्ला युद्धकौशल के दम पर मुश्किल चुनौती पेश करती है.
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बॉर्डर के पास रहने वाला पश्तून समुदाय भी तालिबान को रसद और मदद उपलब्ध कराता है. उनकी रिजर्व फोर्स जरूरत पड़ते ही तेजी से जुट जाती है. इससे तालिबान और अफगानिस्तान की ताकत में इजाफा होता है.
तालिबान ने कुणार-बाजौर, हेलमंद और पक्तिया इलाकों में कई चौकियों पर एक साथ हमला किया. रात के अंधेरे में तालिबान के लड़ाकों के छोटे-छोटे दस्ते पाकिस्तानी चौकियों में घुस गए और भारी गोलीबारी की. ये हमले 9 अक्टूबर को पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों के जवाब में किए गए, जिसमें पाकिस्तान ने काबुल और खोस्त के इलाकों को निशाना बनाया था. तालिबान ने इसे ‘बदले की कार्रवाई’ बताते हुए सीमा पर तोपों से हमला शुरू कर दिया.
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