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IMF से कर्ज भी लेंगे और गाली भी देंगे! ‘लव एंड हेट’ के इस खेल से टेंशन में क्यों है आतंकिस्तान?

Pakistan IMF loan Crisis: पाकिस्तान IMF से कर्ज लेकर सांस ले रहा है, लेकिन उसी IMF की नीतियों को जिम्मेदार ठहराकर गालियां दे रहा है. एक तरफ सरकार कर्ज के सहारे अर्थव्यवस्था संभाल रही है. दूसरी तरफ मीडिया और पूर्व मंत्री IMF को देश की तबाही का कारण बता रहे हैं. हाल ही में द न्यूज इंटरनेशनल में छपे एक लेख ने पाकिस्तान की वर्तमान हालत का ठीकरा आईएमएफ़ और उसकी नीतियों पर फोड़ा है. लेख में लिखा गया है कि IMF के साथ पाकिस्तान का जुड़ाव व्यवस्थित विनाश का पैटर्न बन गया है.

IMF की नीतियों के चलते बर्बाद हुईं इंडस्ट्री

आईएमएफ़ की नीतियों के चलते हुई इंडस्ट्री की तबाही के बारे में भी लेख में लिखा गया है. लेख के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में पाकिस्तान के औद्योगिक परिदृश्य में तेज गिरावट आई है. ऊर्जा की बढ़ती लागत, भारी कर बोझ और नीतिगत अनिश्चितता के चलते सैकड़ों स्थानीय विनिर्माण इकाइयां बंद हो गई हैं. उद्योग जगत के नेताओं का दावा है कि प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में 50 प्रतिशत से अधिक फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं.

कॉरपोरेट पलायन से लेकर आर्थिक पतन तक (Pakistan economy crisis)

वहीं लेख में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान से कॉरपोरेट पलायन की लहर में माइक्रोसॉफ्ट जैसे वैश्विक नाम शामिल हैं, जिसने 25 साल बाद देश में अपना परिचालन पूरी तरह बंद करने का फैसला किया है. इसके अलावा, करीम, शेल, टेलीनॉर, और प्रॉक्टर एंड गैम्बल जैसी कंपनियां या तो पाकिस्तान से बाहर निकल रही हैं या फिर अपनी मौजूदगी घटा रही हैं.

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IMF से कर्ज और गाली-गलौज का खेल

पाकिस्तान IMF से कर्ज लेता है लेकिन उसी IMF को देश की बदहाली का जिम्मेदार बताता है. सरकार कर्ज को जीवनरेखा मानती है तो वहीं पाक मीडिया और पूर्व मंत्री IMF की नीतियों की आलोचना करते हैं. लेख में यह भी कहा गया है कि IMF ने पाकिस्तान को गैर-औद्योगिक अर्थव्यवस्था की ओर धकेल दिया. अब देश का अस्तित्व खतरे में पड़ चुका है. कर्ज की लत से पाकिस्तान को निकालना बेहद पेचीदा लग रहा है. यह लव एंड हेट का रिश्ता पाकिस्तान को बर्बाद कर रहा है.

पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली का सच क्या?

दरअसल, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस समय गंभीर दौर से गुजर रही है. देश में महंगाई बढ़ रही है. मुद्रा लगातार कमजोर हो रही है. उद्योग है नहीं नौकरियां खत्म हो रही हैं. निर्यात गिर रहा है तो गरीबी बढ़ रही है. शिक्षा व्यवस्था तो पहले से ही ध्वस्त पड़ी है कुछ प्रतिभाशाली लोग हैं भी तो वह विदेश भाग जा रहे हैं. IMF से कर्ज लेने के बावजूद सुधार नहीं हो रहे. लेख कहता है कि यह व्यवस्थित विनाश का पैटर्न है. पाकिस्तान अब खुद की गलतियों का शिकार हो रहा है.

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-भारत एक्सप्रेस

Rohit Agrawal

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