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कांचीवरम सिल्क से लेकर मुरादाबादी कछुए तक, जानिए पीएम मोदी ने सेशेल्स में कौन से खास भारतीय उपहार भेंट किए

PM Modi Seychelles Gifts: सेशेल्स की यात्रा पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहां के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के साथ कई समझौते किये. इसमें रक्षा, सुरक्षा, कृषि, वित्त, अंतरिक्ष स्वास्थ्य और डिजिटल भुगतान के संबंध में कई महत्वपूर्ण समझौते शामिल हैं.

अपनी इस यात्रा में पीएम मोदी ने वहां के स्वतंत्रता के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में भी भाग्य लिया. इस दौरान सेशेल्स ने उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ से सम्मानित किया.

इस दौरान पीएम मोदी ने वहां के स्पीकर से लेकर सेकंड लेडी तक को बेहतरीन उपहार भेंट किये.

सेशेल्स के स्पीकर के लिए उपहार: टोडा कढ़ाईदार शॉल

टोडा कढ़ाईदार शॉल, तमिलनाडु के नीलगिरि पहाड़ियों में रहने वाले स्वदेशी पशुपालक समुदाय टोडा की विशिष्ट वस्त्र परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है. इसे सफेद सूती आधार पर तैयार किया जाता है और इस पर लाल तथा काले रंग की आकर्षक ज्यामितीय कढ़ाई की जाती है. प्रत्येक शॉल को बेहद बारीकी से हाथों से काढ़ा जाता है, जो पीढ़ियों से चली आ रही कौशल परंपरा और कलात्मक अभिव्यक्ति को दर्शाता है.

इस कढ़ाई तकनीक को पुखूर कहा जाता है, जो टोडा समुदाय की विशिष्ट पहचान है और पूरी तरह हाथों से की जाती है. परंपरागत रूप से इसे समारोहों और महत्वपूर्ण सामाजिक अवसरों पर पहना जाता रहा है. यह शॉल पहचान, निरंतरता और स्वदेशी ज्ञान के संरक्षण का प्रतीक है. यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और उसके कारीगर समुदायों की सतत रचनात्मकता को दर्शाता है- ये ऐसे मूल्य हैं, जो अपनी अनूठी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को संरक्षित करने के प्रति सेशेल्स की प्रतिबद्धता से भी मेल खाते हैं.

 

सेशेल्स की सेकंड लेडी के लिए उपहार: कांचीवरम सिल्क फैब्रिक

कांचीवरम सिल्क फैब्रिक भारत की सबसे प्रसिद्ध हथकरघा परंपराओं में से एक है, जो अपनी शानदार बनावट, चमकीले रंगों और उत्कृष्ट शिल्पकला के लिए जाना जाता है. तमिलनाडु के ऐतिहासिक मंदिर नगर कांचीपुरम से उत्पन्न यह उत्कृष्ट वस्त्र महीन मुलबेरी सिल्क से बुना जाता है. इसकी खास पहचान इसकी मजबूती, चमकदार फिनिश और बारीक जरी कार्य है.

 

इस फैब्रिक में गहरे मैरून रंग का आधार है, जिस पर सुंदर सुनहरे जरी मोटिफ बने हैं. इसके साथ लाल, हरे और सुनहरे रंग की आकर्षक बॉर्डर इसे और भव्य बनाती है. इसकी अलंकृत बुनाई, बारीक डिटेलिंग और रंगों का संतुलित संयोजन कांचीपुरम की विशिष्ट सौंदर्य परंपरा को दर्शाता है. मंदिर वास्तुकला, प्रकृति और पारंपरिक सजावटी रूपों से प्रेरित कांचीवरम डिजाइनों में अक्सर मोर, फूल, पत्तियां और ज्यामितीय पैटर्न जैसे मोटिफ शामिल होते हैं, जिन्हें अत्यंत सटीकता के साथ बुना जाता है.

 

कांचीपुरम सिल्क को जीआई टैग प्राप्त है और इसे ओडीओपी पहल के तहत भी मान्यता मिली हुई है.

सेशेल्स के उपराष्ट्रपति के लिए उपहार: सिक्किम की ऑर्किड पेंटिंग

सिक्किम की यह उत्कृष्ट ऑर्किड आर्ट पेंटिंग राज्य की समृद्ध पुष्प विरासत और जीवंत कलात्मक परंपराओं का सुंदर संगम प्रस्तुत करती है. इस कलाकृति में भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर को नाजुक ऑर्किड पुष्पों और जटिल फूलदार बेलों के बीच सुंदर ढंग से दर्शाया गया है. यह प्रकृति और कलात्मक अभिव्यक्ति के सामंजस्य का उत्सव है.

 

यह कलाकृति भारत और सेशेल्स, दोनों से अपने संबंध के कारण विशेष महत्व रखती है. जहां मोर भारत की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, वहीं ऑर्किड सेशेल्स का राष्ट्रीय फूल है. सेशेल्स अपनी अनूठी द्वीपीय जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता के लिए प्रसिद्ध है. इन दोनों प्रतीकों को एक साथ प्रस्तुत कर यह पेंटिंग भारत और सेशेल्स की प्रकृति की विविधता को संरक्षित करने तथा संस्कृति और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है.

यह कलाकृति भारत और सेशेल्स के बीच स्थायी मित्रता का एक गरिमामय प्रतीक है.

सेशेल्स की प्रथम महिला के लिए उपहार: महेश्वरी सिल्क स्टोल

महेश्वरी सिल्क स्टोल भारत की हथकरघा विरासत की एक सुंदर अभिव्यक्ति है, जो अपनी हल्की बनावट, आकर्षक ड्रेप और विशिष्ट बुने हुए पैटर्न के लिए प्रसिद्ध है. मध्य प्रदेश के महेश्वर से उत्पन्न यह वस्त्र परंपरा अपनी उत्कृष्ट शिल्पकला और रेशम तथा सूती धागों के संतुलित मिश्रण के लिए जानी जाती है. ज्यामितीय मोटिफ, धारीदार बॉर्डर और सौम्य रंग संयोजन महेश्वरी बुनाई की विशेष पहचान हैं, जो पीढ़ियों से संरक्षित एक परिष्कृत सौंदर्यबोध को दर्शाते हैं.

यहां प्रदर्शित स्टोल में सौम्य रंगों में ज्यामितीय और पुष्प-प्रेरित मोटिफ दिखाई देते हैं, जो महेश्वरी बुनाई की कला और सटीकता को दर्शाते हैं. अपनी बहुपयोगिता और सुरुचिपूर्ण रूप के कारण महेश्वरी स्टोल को सांस्कृतिक धरोहर और आधुनिक फैशन एक्सेसरी, दोनों रूपों में व्यापक रूप से सराहा जाता है.

सेशेल्स की प्रथम महिला के लिए उपहार: बिदरीवेयर बॉक्स

बिदरीवेयर बॉक्स भारत की प्रसिद्ध धातु शिल्प परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो गहरे काले धात्विक सतह पर चमकदार चांदी की जड़ाई के विशिष्ट विरोधाभास के लिए जाना जाता है. कुशल कारीगरों द्वारा हस्तनिर्मित इस बॉक्स में ज्यामितीय और पुष्प आकृतियों की बारीक डिजाइनें महीन चांदी के तारों से जड़ी गई हैं, जो असाधारण सटीकता और कलात्मकता को दर्शाती हैं.

बिदरीवेयर की उत्पत्ति कर्नाटक के बीदर में हुई, और इसी स्थान के नाम पर इस कला का नाम पड़ा. इस शिल्प में जिंक और तांबे की मिश्र धातु को ढालकर वस्तु तैयार की जाती है, फिर उसकी सतह पर जटिल पैटर्न उकेरे जाते हैं और उनमें चांदी की जड़ाई की जाती है.

इसके बाद वस्तु को एक विशेष ऑक्सीडेशन प्रक्रिया से गुजारा जाता है, जिससे उस पर विशिष्ट काली फिनिश आती है, जबकि चांदी की जड़ाई चमकदार और आकर्षक बनी रहती है. यही अनूठी तकनीक बिदरीवेयर को धातु शिल्प के अन्य रूपों से अलग पहचान देती है.

सेशेल्स के राष्ट्रपति के लिए उपहार: मुरादाबादी पीतल का कछुआ

मुरादाबादी पीतल का कछुआ उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद की प्रसिद्ध पीतल शिल्प परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है. मुरादाबाद को दुनिया भर में भारत के “ब्रास सिटी” के रूप में जाना जाता है. कुशल कारीगरों द्वारा हस्तनिर्मित यह कृति धातु ढलाई, नक्काशी और फिनिशिंग में क्षेत्र की असाधारण दक्षता को प्रदर्शित करती है. इसके खोल की बारीक बनावट और चमकदार फिनिश पीढ़ियों से चली आ रही शिल्पकला को दर्शाती है.

ये भी पढ़ें- पाकिस्तान की दहशतगर्दी पर दुनिया में थू-थू, अफगानिस्तान में कायराना हमले पर संयु्क्त राष्ट्र ने जताई चिंता

भारतीय दर्शन में कछुआ ज्ञान, स्थिरता, धैर्य, दृढ़ता और दीर्घायु का शाश्वत प्रतीक माना जाता है. ये आदर्श सेशेल्स के साथ गहराई से जुड़ते हैं, क्योंकि सेशेल्स की प्राकृतिक विरासत प्रतिष्ठित अल्डाब्रा विशालकाय कछुए से अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है, जो दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाली कछुआ प्रजातियों में से एक है. इस प्रकार मुरादाबादी पीतल का कछुआ भारत की शिल्प उत्कृष्टता का विचारपूर्ण प्रतीक होने के साथ-साथ सेशेल्स के लिए विशेष महत्व रखने वाला प्रतीक भी है. यह दोनों देशों के बीच स्थायी मित्रता को दर्शाता है और ज्ञान तथा प्रकृति के साथ सामंजस्य जैसे साझा मूल्यों का उत्सव मनाता है.

-भारत एक्सप्रेस

महिमा कटारिया

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