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अमित शाह 6 जुलाई को कर सकते हैं पश्चिम बंगाल दौरा, श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती कार्यक्रम में होंगे शामिल

Amit Shah West Bengal visit: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 6 जुलाई को पश्चिम बंगाल का दौरा कर सकते हैं. भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने मंगलवार को जानकारी दी. इस दिन भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती है और वे कोलकाता के न्यू टाउन इलाके में स्थित बिस्वा बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में शामिल होंगे.

अमित शाह 6 जुलाई को कर सकते हैं पश्चिम बंगाल दौरा

भाजपा नेता के अनुसार, 6 जुलाई के कार्यक्रमों की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए सोमवार शाम कोलकाता में भाजपा के साल्ट लेक ऑफिस में एक बैठक हुई. इस बैठक में सीएम सुवेंदु अधिकारी के साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए. सुनील बंसल, मंगल पांडे और अमित मालवीय समेत भाजपा के केंद्रीय नेता भी मौजूद थे. बैठक में मुखर्जी की जयंती मनाने के लिए तय किए गए कार्यक्रम की समीक्षा की गई.

बनेगी श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125 फुट ऊंची प्रतिमा

भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने 6 जुलाई को मुखर्जी की जयंती मनाने के लिए कई पहल की घोषणा की है. सरकार ने हुगली जिले के जिरात में उनके पैतृक घर पर मुखर्जी की 125 फुट ऊंची प्रतिमा बनाने, साथ ही पुराने घर के नवीनीकरण और आसपास के इलाके को सुंदर बनाने के लिए 200 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं.

लाइब्रेरी और एक स्मारक बनाने का भी प्रस्ताव

ये घोषणाएं हाल ही में पेश किए गए राज्य के बजट में की गई थीं. सरकार ने मुखर्जी के पैतृक घर पर एक लाइब्रेरी और एक स्मारक बनाने का प्रस्ताव भी दिया है और 6 जुलाई को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, शाह के विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में कार्यक्रम में शामिल होने और मुखर्जी की प्रतिमा का शिलान्यास करने की उम्मीद है. केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी और अपनी उपलब्धता के आधार पर, उनके दौरे के दौरान कुछ अन्य कार्यक्रमों में भी भाग लेने की संभावना है.

6 जुलाई के कार्यक्रम के अलावा, राज्य और केंद्रीय भाजपा नेताओं के बीच बैठक में पश्चिम बंगाल में पार्टी से जुड़े कई संगठनात्मक मामलों पर भी चर्चा हुई. 23 जून को देश ने उनकी पुण्यतिथि मनाई, जिसमें प्रधानमंत्री और अन्य नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक शिक्षाविद, बैरिस्टर और राजनेता थे, जिन्होंने आजादी के बाद भारत की राजनीतिक सोच को आकार देने में अहम भूमिका निभाई थी.

यह भी पढ़ें: आखिर क्या है ‘टोडा शॉल’, जिसे पीएम मोदी ने सेशेल्स में भारत की पहचान बनाकर पेश किया

भारत एक्सप्रेस

Swati Pandey

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