प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्युअल मैक्रों.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को फ्रांस पहुंचे. इस दौरे पर वह एआई एक्शन समिट (AI Action Summit) की सह-अध्यक्षता करने पहुंचे. फ्रांस की राजधानी पेरिस में AI Action Summit का आयोजन हो रहा है. इस समिट में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के साथ कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी मौजूद हैं. पीए मोदी एआई समिट में सह अध्यक्ष हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस में एआई समिट को संबोधित करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारी राजनीति, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और समाज में सकारात्मक बदलाव ला रहा है. यह अन्य तकनीकों से बिल्कुल अलग है और मानवता के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. उन्होंने एआई से जुड़े जोखिमों और सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि यह समाज और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है. हमें इस पर गहराई से विचार करना होगा और व्यापक चर्चा करनी होगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई समिट में कहा कि इस शताब्दी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ‘कोड ऑफ ह्यूमैनिटी’ लिख रहा है. यह लाखों लोगों की जिंदगियों में बदलाव ला रहा है. समय के साथ-साथ रोजगार का स्वरूप भी बदल रहा है, इसलिए एआई से जुड़ी नौकरियों के मुद्दे पर ध्यान देना जरूरी है. उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि तकनीक नौकरियां खत्म नहीं करती, बल्कि नए अवसर पैदा करती है. एआई भी नई नौकरियों के दरवाजे खोलेगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस में एआई एक्शन समिट के दौरान कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अभूतपूर्व गति और पैमाने पर विकसित हो रहा है, और इसे तेजी से अपनाया और लागू किया जा रहा है. देशों के बीच इसकी गहरी परस्पर निर्भरता है. इसलिए, हमारे साझा मूल्यों को बनाए रखने, जोखिमों का समाधान करने और विश्वास बनाने के लिए वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है. लेकिन शासन केवल मतभेदों और प्रतिद्वंद्विताओं को प्रबंधित करने के बारे में नहीं है; यह नवाचार को बढ़ावा देने और इसे वैश्विक भलाई के लिए लागू करने के बारे में भी है. इसलिए, हमें नवाचार और शासन के बारे में गहराई से सोचना और खुलकर चर्चा करनी चाहिए.
हमें ऐसे ओपन-सोर्स सिस्टम विकसित करने चाहिए जो भरोसे और पारदर्शिता को बढ़ाएं. हमें उच्च गुणवत्ता वाले डेटा सेंटर बनाने चाहिए जो किसी भी तरह के पक्षपात से मुक्त हों. हमें तकनीक को सभी के लिए सुलभ बनाना चाहिए और लोगों के केंद्र में रखकर उपयोगी एप्लिकेशन तैयार करने चाहिए.
हमें साइबर सुरक्षा, गलत सूचना और डीपफेक से जुड़ी चिंताओं का समाधान करना होगा. साथ ही, यह भी सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक स्थानीय जरूरतों और पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ी हो, ताकि यह प्रभावी और उपयोगी बन सके.
एआई से नौकरियों के जाने का सबसे बड़ा डर है, लेकिन इतिहास गवाह है कि तकनीक के कारण काम खत्म नहीं होता, बल्कि उसका स्वरूप बदल जाता है. इसलिए, हमें एआई-आधारित भविष्य के लिए लोगों को नए कौशल सिखाने और फिर से प्रशिक्षित करने में निवेश करना होगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस में एआई एक्शन समिट के दौरान कहा कि तकनीक का लाभ सभी को मिलना चाहिए, खासतौर पर ग्लोबल साउथ को, जहां संसाधनों की सबसे ज्यादा कमी है. वहां बिजली, प्रतिभा, डेटा और वित्तीय संसाधनों की सीमित उपलब्धता बड़ी चुनौती है.
उन्होंने कहा कि एआई स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और कई अन्य क्षेत्रों में सुधार लाकर करोड़ों लोगों की जिंदगी बदल सकता है. यह सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने की प्रक्रिया को तेज और आसान बना सकता है.
इस बदलाव के लिए हमें अपने संसाधनों और प्रतिभा को मिलकर उपयोग करना होगा. हमें ऐसे ओपन-सोर्स सिस्टम विकसित करने चाहिए जो भरोसे और पारदर्शिता को बढ़ाएं. साथ ही, हमें उच्च गुणवत्ता वाले डेटा सेट तैयार करने होंगे जो किसी भी प्रकार के पूर्वाग्रह (Bias) से मुक्त हों.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस में एआई एक्शन समिट को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने 1.4 अरब से अधिक लोगों के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है, वह भी बहुत कम लागत में. यह एक ओपन और एक्सेसिबल नेटवर्क पर आधारित है, जिसमें व्यापक नियमन और आधुनिक अनुप्रयोग शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि इस डिजिटल ढांचे ने न केवल हमारी अर्थव्यवस्था को आधुनिक बनाया है, बल्कि शासन सुधारों में भी अहम भूमिका निभाई है. इससे करोड़ों भारतीयों का जीवन बदला है और डिजिटल सेवाओं तक उनकी पहुंच आसान हुई है.
पीएम मोदी ने बताया कि भारत एआई अपनाने और डेटा प्राइवेसी के टेक्नो-लीगल समाधान विकसित करने में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है. इसके अलावा, भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी एआई प्रतिभाओं में से एक है, जो तकनीकी विकास को नई ऊंचाइयों तक ले जा रही है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस जैसी पहलों के माध्यम से वर्षों तक मिलकर काम किया है ताकि सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग किया जा सके. अब जब हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में सहयोग बढ़ा रहे हैं, तो यह सस्टेनेबिलिटी से इनोवेशन की ओर एक स्वाभाविक कदम है, जिससे एक स्मार्ट और जिम्मेदार भविष्य बनाया जा सके.
पीएम मोदी ने कहा कि सस्टेनेबल एआई का मतलब सिर्फ स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग करना नहीं है. एआई मॉडल को कुशल और सस्टेनेबल भी होना चाहिए, जिससे साइज, डेटा जरूरतों और संसाधनों की खपत कम हो.
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इंसानी दिमाग कम ऊर्जा में कविताएं लिख सकता है और अंतरिक्ष यान डिजाइन कर सकता है, जबकि यह काम करने में एक साधारण बल्ब से भी कम बिजली खर्च होती है. इसलिए, एआई को भी ऊर्जा और संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ विकसित किया जाना चाहिए.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस में एआई एक्शन समिट के दौरान कहा कि भारत अपनी संस्कृति और विविधता को ध्यान में रखते हुए अपना बड़ा लैंग्वेज मॉडल विकसित कर रहा है. यह एआई को भारतीय संदर्भ में अधिक सटीक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
उन्होंने बताया कि भारत में सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों की भागीदारी के तहत संसाधनों, जैसे कि कंप्यूटिंग पावर, को एकत्रित करने का एक अनूठा मॉडल है. इससे स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं को कम लागत में उन्नत तकनीक तक पहुंच मिल रही है.
पीएम मोदी ने कहा कि भारत अपनी अनुभव और विशेषज्ञता दुनिया के साथ साझा करने के लिए तैयार है, ताकि एआई का भविष्य सभी के लिए और भलाई के लिए हो.
कुछ लोग चिंता करते हैं कि मशीनें इंसानों से ज्यादा बुद्धिमान हो सकती हैं. लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि हमारा साझा भविष्य और हमारी नियति केवल हम इंसानों के हाथ में है. यही जिम्मेदारी की भावना हमें सही दिशा में मार्गदर्शन देनी चाहिए.
-भारत एक्सप्रेस
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