Shehbaz Sharif War Threat to India: कंगाली, अस्थिरता और आतंकवाद के बोझ तले दबा पाकिस्तान फिर से पुराना राग अलापने लगा है. संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत को सीधे तौर पर युद्ध की धमकी दे दी है. कंगाली की कगार पर खड़े मुल्क के वजीर-ए-आजम की इस गीदड़ भभकी पर संयुक्त राष्ट्र में मौजूद कूटनीतिक हलकों में हैरानी भी जताई गई. हालांकि, अगले ही पल उनकी जग हंसाई भी हो गई. शहबाज का यह प्रलाप यहीं नहीं थमा. उन्होंने कश्मीर को पाकिस्तान के गर्दन की नस बताया और 8 दशक पुराने यूएन जनमत संग्रह के वादे की रट लगाते भी दिखे.
शहबाज यह भूल गए कि जब-जब पाकिस्तान ने भारत की ओर आंख उठाने की कोशिश की है, उसे मुंह की खानी पड़ी है. भारतीय राजनयिक पेटल गहलोत ने ‘राइट ऑफ रिप्लाई’ के तहत शहबाज के हर झूठ की धज्जियां उड़ाते हुए उन्हें पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हो रहे मानवाधिकार हनन का आईना दिखा दिया.
शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में भारत द्वारा सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को स्थगित किए जाने को गैरकानूनी करार दिया. उन्होंने कहा कि पानी को हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए और भारत को पानी रोकने की भूल नहीं करनी चाहिए. उन्होंने असीम मुनीर की तारीफों के पुल बांधे, साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का शुक्रिया अदा करते हुए दावा किया कि मई 2025 में ट्रम्प के दखल से दोनों देशों के बीच बड़ी जंग टली.
अपनी घरेलू नाकामियों को छुपाने के लिए शरीफ ने भारत पर धार्मिक नफरत फैलाने और इस्लामोफोबिया को बढ़ावा देने का बेबुनियाद आरोप लगाया. शरीफ ने वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों को खुला रखने की वकालत कर दुनिया का ध्यान भटकाने की भी कोशिश की.
यूएन में भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने शहबाज शरीफ के झूठे दावों को बेनकाब करते हुए साफ शब्दों में कहा कि पाकिस्तान हर साल इस मंच पर आकर सफेद झूठ दोहराता है, लेकिन साल-दर-साल झूठ बोलने से वह सच में तब्दील नहीं हो जाता। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं और हमेशा रहेंगे.
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पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा इस संधि पर रोक लगाए जाने से पाकिस्तान के पास कोई कानूनी या कूटनीतिक रास्ता नहीं बचा है। हेग की मध्यस्थता अदालत और यूएन विशेषज्ञों का नाम लेकर शहबाज खुद को पीड़ित साबित करना चाहते हैं, लेकिन भारत का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है आतंकवाद को सरकारी नीति बनाने वाले देश को भारत के संसाधनों की मुफ्त खैरात नहीं मिलेगी.
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