कैप्टन स्मित ने बताया फ्लाईदुबई की फ्लाइट में 30 सितंबर को क्या-क्या हुआ.
Flydubai Pilot Captain Smit Machchhar Full Story: फ्लाईदुबई की फ्लाइट में 30 सितंबर को हुई घटना को लेकर अब कॉकपिट के अंदर की पूरी कहानी सामने आई है. फ्लाइट के कैप्टन स्मित मछार (Smit Machchhar) ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत के दौरान उस खौफनाक पल को याद किया, जब उनके ही को-पायलट ने अचानक उन पर हमला कर दिया था.
स्मित के मुताबिक, विमान सामान्य तरीके से उड़ रहा था. इसी दौरान ओमानी को-पायलट हमाम अल-हम्मामी (Hamam Al-Hammami) अपनी सीट से उठा. उसने कहा कि वह नमाज पढ़ना चाहता है. स्मित को इसमें कोई असामान्य बात नहीं लगी. उन्होंने सम्मान का ध्यान रखते हुए पीछे मुड़कर देखने से भी परहेज किया. लेकिन कुछ ही मिनट बाद हालात पूरी तरह बदल गए.
स्मित ने बताया कि करीब चार से पांच मिनट बाद उनके सिर के पीछे अचानक जोरदार वार हुआ. शुरुआत में उन्हें समझ ही नहीं आया कि हुआ क्या है. एक पल के लिए उन्हें लगा कि शायद विमान किसी चीज से टकराया है या कोई तकनीकी गड़बड़ी हुई है.
इसके बाद दूसरा वार हुआ और तब उन्हें एहसास हुआ कि उन पर हमला किया जा रहा है. हमले में विमान में आपात स्थिति के लिए रखी गई कुल्हाड़ी का इस्तेमाल किया गया था. हमले की वजह से स्मित की आंखों के सामने धुंध छाने लगी. वह गंभीर रूप से घायल हो चुके थे, लेकिन सबसे बड़ी चिंता विमान में बैठे यात्रियों की थी. इसी बीच उन्हें महसूस हुआ कि विमान तेजी से नीचे की ओर जा रहा है.
स्मित ने बताया कि इतनी गंभीर चोट के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने का फैसला किया. किसी तरह वह दरवाजे तक पहुंचे और उसे खोल दिया. लेकिन हमाम अल-हम्मामी ने तुरंत दरवाजा बंद कर दिया. इस दौरान स्मित फर्श पर गिर पड़े.
इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी. उन्हें समझ आ चुका था कि उनके पास ज्यादा समय नहीं है. स्मित ने बताया कि उस वक्त उन्हें लगा कि शायद उनकी जान भी जा सकती है. फिर भी उन्होंने खुद को संभाला और दोबारा दरवाजे तक पहुंचने की कोशिश की. आखिरकार दूसरी बार वह कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे.
दरवाजा खुलते ही बाहर मौजूद कुछ लोग तुरंत कॉकपिट के अंदर पहुंचे. उन्होंने हमलावर को काबू किया. इसके बाद विमान को दोबारा नियंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू हुई. कॉकपिट के दरवाजे को लेकर भी स्मित ने एक अहम जानकारी दी. बातचीत के दौरान जब दरवाजा खोलने के लिए ‘पिन खींचने’ की बात कही गई, तो उन्होंने साफ किया कि दरवाजे में ऐसा कोई पिन नहीं था.
उनके मुताबिक, कॉकपिट के अंदर से एक नॉब घुमाकर दरवाजा खोला जा सकता था. वहीं, बाहर से दरवाजा खोलने के लिए एक कोड डालना पड़ता था. उनके साथी बाहर से कोड डालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन हमलावर दरवाजा खुलने नहीं दे रहा था. ऐसे में स्मित के लिए सबसे जरूरी था कि वह किसी तरह अंदर मौजूद नॉब तक पहुंचें. दूसरी कोशिश में वह नॉब तक पहुंचने और दरवाजा खोलने में कामयाब रहे.
ये भी पढ़ें: नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित मच्छार को बताया दुनिया का हीरो, इजरायल के स्वतंत्रता दिवस के लिए दिया खास न्योता
यह घटना फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में हुई थी. विमान दुबई से तेल अवीव जा रहा था और उसमें कुल 174 लोग सवार थे. इनमें बड़ी संख्या इजरायली यात्रियों की थी. कॉकपिट में हुए हमले के बाद विमान की स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी. विमान तेजी से नीचे जाने लगा था. यात्रियों और अन्य लोगों की मदद से हमलावर को काबू किया गया और विमान पर दोबारा नियंत्रण हासिल किया गया.
बाद में विमान को सऊदी अरब के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में स्थित तबूक की ओर मोड़ा गया, जहां उसकी सुरक्षित लैंडिंग कराई गई. इस घटना की जांच संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इजरायल के अधिकारी कर रहे हैं. हमले के पीछे की वजह और किसी संभावित साजिश की भी जांच की जा रही है.
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमले के संदर्भ में को-पायलट के बारे में कहा है कि वह ‘इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित’ था. हालांकि, हमले के मकसद और किसी संभावित आतंकी कनेक्शन को लेकर जांच अभी जारी है.
इससे एक दिन पहले, 2 अक्टूबर को कैप्टन स्मित मछार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी फोन पर बात की थी. उस बातचीत में उन्होंने बताया था कि घायल होकर कॉकपिट के फर्श पर गिरने के बाद उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि अगर वह दोबारा नहीं उठे तो विमान में बैठे लोगों का क्या होगा.
स्मित ने कहा था कि उस वक्त वह अपनी जिंदगी के लिए भी लड़ रहे थे, लेकिन उन्हें यह भी पता था कि उनके उठने पर कई लोगों की जिंदगी निर्भर थी. यही सोचकर उन्होंने दोबारा खड़े होने की कोशिश की. स्मित ने यह भी बताया था कि उन्हें विमान उड़ाने का करीब 17 साल का अनुभव है. उनका कहना था कि गंभीर चोट के बावजूद वह विमान की स्थिति को महसूस कर पा रहे थे. मुश्किल घड़ी में उन्होंने अपनी आस्था का सहारा भी लिया. स्मित के मुताबिक, उन्होंने हनुमान चालीसा का पाठ किया और इससे उन्हें हिम्मत मिली.
अब नेतन्याहू के साथ हुई बातचीत से कॉकपिट में हमले से ठीक पहले और उसके बाद के घटनाक्रम की कई अहम जानकारियां सामने आई हैं. इस पूरे मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ हमले के पीछे की असली वजह भी स्पष्ट होने की उम्मीद है.
-भारत एक्सप्रेस
जम्मू-कश्मीर में अवैध रूप से रह रहे और फर्जी कागजातों से भारतीय पहचान हासिल करने…
BHARAT EXPRESS CMD UPENDRRA RAI TO ATTEND JAANTA RAJA: दिव्य प्रेम सेवा मिशन, हरिद्वार के…
अयोध्या में दीपोत्सव के खास मौके पर राम की पैड़ी को भव्य रूप दिया जा…
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के असली स्रोतों की पहचान के लिए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र…
भाजपा सांसद नरेश बंसल ने गृह मंत्री अमित शाह की प्रशंसा करते हुए कहा है…
IMD Weather Update: IMD ने बंगाल की खाड़ी में संभावित चक्रवाती तूफान को लेकर अलर्ट…