US Cuba Clash at UN: अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के सबसे बड़े मंच यानी संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) से एक बेहद सनसनीखेज और हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है. संयुक्त राष्ट्र का मंच इन दिनों शांति और संवाद की जगह किसी अखाड़े में तब्दील होता नजर आ रहा है, जहां अमेरिका और क्यूबा के प्रतिनिधि आपस में भिड़ गए.
क्यूबा पर दशकों से चले आ रहे अमेरिकी आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों को खत्म करने वाले प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विवाद इतना बढ़ गया कि माहौल गर्मा गया और नौबत कार्यवाही रोकने तक आ पहुंची.
यह पूरा हाई-वोल्टेज ड्रामा उस समय शुरू हुआ जब संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज (Mike Waltz) मंच से क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार पर दमन, मानवाधिकार हनन और भ्रष्टाचार के तीखे आरोप लगा रहे थे. अमेरिकी राजदूत के भाषण के दौरान ही क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज पैरिला अपनी सीट से उठकर सीधे पोडियम के पास पहुंच गए और अमेरिकी प्रतिनिधि को रोकने की मांग करने लगे. क्यूबन मंत्री के इस तरह अचानक करीब आने पर अमेरिकी राजदूत भड़क गए और दोनों के बीच मंच पर ही तीखी बहस छिड़ गई.
क्यूबा के विदेश मंत्री के सामने आते ही अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने अपना कड़ा रुख दिखाते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र है, कोई क्यूबा की कम्युनिस्ट तानाशाही नहीं है और उन्हें चुप नहीं कराया जा सकता. गुस्से में तमतमाए अमेरिकी राजदूत ने क्यूबा के मंत्री और उनके प्रतिनिधिमंडल को पीछे हटने का कड़ा निर्देश देते हुए चेतावनी दी, ‘आप जानते हैं कि आप किससे बात कर रहे हैं?
ऐज वह बोले कि -यह अमेरिका है, पीछे हटिए.’ दोनों देशों के बीच तनातनी इस कदर बढ़ गई कि सत्र की अध्यक्षता कर रहे अधिकारी को तुरंत बीच-बचाव करना पड़ा और बढ़ते तनाव को देखते हुए बैठक की कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित करनी पड़ी.
इस तीखी झड़प के बाद क्यूबा के विदेश मंत्री ने अमेरिका पर वैश्विक मंच के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया. उनका दावा था कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र के अन्य सदस्य देशों को प्रभावित करने के लिए एक बड़ा अभियान चला रहा है. क्यूबा का आरोप है कि अमेरिका प्रतिबंधों के पक्ष में वोट डालने वाले देशों को वीजा प्रतिबंधों और आर्थिक भुगतानों की धमकियां दे रहा है, ताकि क्यूबा के खिलाफ वैश्विक समर्थन जुटाया जा सके. वहीं, इसके विपरीत अमेरिकी राजदूत ने यूएन के तमाम सदस्यों से अपील की कि वे क्यूबा के पक्ष में लाए गए इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दें.
गौरतलब है कि क्यूबा साल 1992 से लगातार हर साल संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को समाप्त करने की मांग वाला प्रस्ताव पेश करता आ रहा है. हालांकि यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होता, लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा समर्थन मिलता रहा है. पिछले साल इस प्रस्ताव के पक्ष में 165 देशों ने वोट डाला था, जबकि अमेरिका समेत महज 7 देशों ने इसका विरोध किया था.
वर्तमान समय में तेल आपूर्ति की किल्लत और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण क्यूबा गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है, जिसके चलते दोनों देशों के बीच यह कूटनीतिक संघर्ष अब सड़क से लेकर यूएन के मंच तक खुलकर सामने आ गया है.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
Gold-Silver Rate: दीवाली से पहले सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है,…
PM Modi Subhashitam: पीएम मोदी ने संस्कृत सुभाषित साझा कर जनता के कल्याण और सुशासन…
UAE ने फ्लाईदुबई के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार और विमान के क्रू को उड़ान…
Prayagraj Film Festival: प्रयागराज इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2026 का आयोजन 30 अक्टूबर से 1 नवंबर…
'बिग बॉस 20' के घर में उठापटक जारी है. वीकेंड का वार के बाद आए…
28 अक्टूबर के मौसम को लेकर चक्रवात 'अर्नब' और 17 राज्यों में भारी बारिश व…