दुनिया

क्या है ट्रेड बाजूका? जिसके सामने दुनिया का सबसे ताकतवर इंसान भी बेबस हो गया, पढ़ें- EXPLAINER

Trade Bazooka: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी बातों से कब पलट जाएं, यह किसी को पता नहीं है. कुछ समय पहले उन्होंने ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर दिये गए बयानों से दुनिया में हलचल मचा दी थी. जिसका यूरोप ने जबरदस्त विरोध किया. यूरोपीय नेताओं ने अमेरिका को आर्थिक रूप से जवाब देने की बात कही. इससे अमेरिका और यूरोप के बीच टकराव की स्थिति बनने लगी.

यूरोपीय यूनियन ने ट्रंप को धमकी देते हुए कहा कि अगर ग्रीनलैंड पर अमेरिका कब्जा करता है तो उसे यूरोपीय देशों की तरफ से जवाबी टैरिफ के रूप में जवाब दिया जाएगा. हालांकि अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर ढीले पड़ गए हैं.

दावोस में हुए सम्मेलन में उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए वो सेना का इस्तेमाल नहीं करेंगे. यहीं नहीं उन्होंने ग्रीनलैंड पर अमेरिका का समर्थन नहीं करने पर 8 यूरोपीय देशों पर लगाए गए 10 प्रतिशत टैरिफ को भी वापस ले लिया.

डोनाल्ड ट्रंप के इस यू-टर्न को लेकर कई दावे किये जा रहे हैं. उन्हीं दावों में से एक है ट्रेड बाजूका (Trade Bazooka). अर्थशास्त्र के जानकार कह रहे हैं कि ट्रंप ट्रेड बाजूका के डर से ही ग्रीनलैंड पर अपने कदम पीछे खींचने पर मजबूर हुए. आखिर ट्रेड बाजूका कौन सी बला है जिससे दुनिया का सबसे ताकतवर इंसान भी डर गया और यह कितना ताकतवर है?

ट्रेड बाजूका क्या है?

दरअसल ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की धमकियों से पूरा यूरोपीय यूनियन डर गया था. सैन्य मामलों में पूरा यूरोप अमेरिका के सामने कहीं नहीं टिकता.

अमेरिका के पास दुनिया की सबसे एडवांस मिसाइलों से लेकर एयरक्राफ्ट हैं. जिनका पूरी दुनिया में कोई मुकाबला नहीं है. वहीं अमेरिका की अर्थव्यवस्था को देख उससे पंगा लेने के बारे में यूरोप सोच भी नहीं सकता.

ऐसे में यूरोपीय यूनियन को एक ही रास्ता नजर आया और वो था आर्थिक प्रतिबंध. ट्रेड बाजूका वहीं आर्थिक हथियार है जिसने ट्रंप को घुटने टेकने पर मजबूर किया.

इमैनुअल मैक्रों ने दी थी धमकी

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के ग्रीनलैंड पर कब्जा किये जाने वाले बयान पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने कड़ा कदम उठाया था. मैंक्रों ने इसको रोकने के लिए ट्रेड बाजूका का इस्तेमाल करने की बात कही थी.

ट्रेड बाजूका कोई स्टॉक मार्केट या ट्रेडिंग टर्म नहीं है, बल्कि यह यूरोपीय संघ (EU) का एक बेहद ताकतवर आर्थिक हथियार है. इसको एंटी-कोअरशन इंस्ट्रूमेंट (ACI) कहते हैं.

ट्रेड बाजूका नाम बाजूका (bazooka) रॉकेट लॉन्चर के नाम पर रखा गया है. बाजूका रॉकेट लॉन्चर दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान गेम चेंजर साबित हुआ था. इससे निकले रॉकेट मोटे से मोटे टैंक आर्मर को भेद देते थे. जिसके विनाशकारी प्रभाव को देखते हुए ACI को ट्रेड बाजूका का नाम दिया गया.

अगर ट्रेड बाजूका लागू हुआ तो क्या?

इसे ईयू का ट्रेड हथियार कहा जाता है. इनके इस्तेमाल से किसी देश के व्यापार और निवेश को रोका या कम किया जा सकता है. इनका उपयोग तब किया जाता है जब कोई देश ईयू के देशों या कंपनियों पर जबरदस्ती दबाव डालते हैं. ट्रेड बाजूका के इस्तेमाल से,

  • किसी दूसरे देश के सामानों पर बहुत भारी जवाबी टैरिफ लगाया जा सकता है.
  • उस देश की कंपनियों को EU के बाजारों से बाहर या सीमित किया जा सकता है.
  • सरकारी ठेकों में भाग लेने से रोका जा सकता है
  • निवेश पर रोक लगाई जा सकती है.
  • आयात-निर्यात पर सख्त पाबंदियां लगाई जा सकती हैं.
  • सर्विस सेक्टर जैसे बैंकिंग, टेक सर्विसेज पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है.

ACI या ट्रेड बाजूका को आर्थिक न्यूक्लियर बम भी कहा जाता है, क्योंकि इसकी मदद से साधारण टैरिफ से कहीं ज्यादा टैरिफ लगाया जा सकता है. हालांकि अभी तक EU ने इसका किसी भी देश के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया है.

ये भी पढ़ें- कुत्ता घुमाने के लिए स्टेडियम खाली कराने वाले IAS संजीव खिरवार की वापसी! अब दिल्ली में संभालेंगे बड़ा पद

अमेरिका पर असर

ट्रेड बाजूका का अगर अमेरिका के खिलाफ इस्तेमाल होता है तो अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. यूरोप अमेरिका का सबसे बड़ा साझेदार है. बाजूका लगते ही अमेरिकी कंपनियों और अर्थव्यवस्था पर बड़ा खतरा उपज सकता है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

Recent Posts

‘मुझे पति से बचा लो…’, पहले दिया तीन तलाक, फिर देवरों से कराया हलाला

अलीगढ़ में तीन तलाक के बाद महिला से दो देवरों द्वारा जबरन हलाला कराने का…

1 hour ago

सुप्रीम कोर्ट में प्रमोट हुए जज तो इन तीन बड़े हाईकोर्ट्स में बदले गए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, देखिए पूरी लिस्ट

केंद्र सरकार ने 5 अक्टूबर 2026 को दिल्ली, गुजरात और तेलंगाना हाईकोर्ट में कार्यवाहक मुख्य…

2 hours ago

20 रुपये में इतने कम मोमोज? छात्र के सवाल पूछते ही ठेलेवाले ने चेहरे पर फेंका खोलता तेल

ग्वालियर में 20 रुपये के मोमोज की संख्या कम होने पर सवाल पूछना एक छात्र…

2 hours ago

नवी मुंबई एयरपोर्ट से अब सफर होगा बेहद आसान, अडानी ग्रुप ने शुरू कीं ई-शिवाई बसें

नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर विंटर शेड्यूल से पहले सस्ती बसों, ऐप टैक्सियों और फ्री…

4 hours ago

उमेश पाल हत्याकांड: UP पुलिस की रिमांड से बचा इनामी अरमान बिहारी, वापस गया बिहार जेल

उमेश पाल ट्रिपल मर्डर केस के 5 लाख के इनामी आरोपी अरमान बिहारी को प्रयागराज…

4 hours ago

जब पीएम मोदी ने स्विस राष्ट्रपति को दिया ‘देसी चीज़’ और कश्मीरी कला का अनूठा तोहफा, जानिए क्या है खास?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ परमेलिन को भारत की समृद्ध विरासत और…

4 hours ago