तेहरान के आसमान से उठते धुएं और अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के दावों के बीच, दुनिया की नजरें एक ऐसे शख्स पर टिकी हैं जो पिछले 45 सालों से वतन वापसी का सपना देख रहा है. वह नाम है रजा पहलवी. ईरान के निर्वासित ‘क्राउन प्रिंस’ और आखिरी शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे. डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों और इजरायल-अमेरिका के भीषण हमलों ने इस चर्चा को हवा दे दी है कि क्या ईरान में एक बार फिर ‘पहलवी युग’ की वापसी होने वाली है?
रजा पहलवी उस शाही खानदान के वारिस हैं, जिसे 1979 की इस्लामिक क्रांति के दौरान अयातुल्ला खुमैनी ने सत्ता से बेदखल कर दिया था. तब से पहलवी अमेरिका में निर्वासित जीवन जी रहे हैं. रजा पहलवी को वाशिंगटन का गहरा समर्थन हासिल है. वे लगातार ईरानी जनता से ‘मुल्ला राज’ को उखाड़ फेंकने की अपील करते रहे हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि उनके पास इस बात का स्पष्ट ‘विचार’ है कि खामेनेई के बाद ईरान की कमान कौन संभालेगा. राजनीतिक गलियारों में इसे रजा पहलवी की ताजपोशी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
खामेनेई की मौत की खबर फैलते ही रजा पहलवी ने सोशल मीडिया पर एक बेहद आक्रामक संदेश जारी किया. उन्होंने लिखा कि हमारे समय का सबसे खूनी तानाशाह अब मिट चुका है. उसकी मौत के साथ ही ‘इस्लामिक गणराज्य’ का वजूद खत्म हो गया है और बहुत जल्द यह शासन इतिहास के कूड़ेदान में दफन होगा. पहलवी ने साफ कर दिया है कि अब किसी ‘उत्तराधिकारी’ की नियुक्ति को जनता स्वीकार नहीं करेगी.
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पहलवी ने अपनी दावेदारी पेश करते हुए ईरान की सेना और सुरक्षा बलों को सीधा संदेश भेजा है. उन्होंने कहा कि यह राष्ट्र के साथ खड़े होने का आखिरी मौका है. एक ढहते हुए तंत्र को बचाने के लिए अपनी ऊर्जा बर्बाद न करें. आइए, एक स्वतंत्र और समृद्ध ईरान के निर्माण में साथ दें. पहलवी ने सुरक्षा बलों से पाला बदलकर जनता के साथ आने और ‘अंतिम विजय’ का हिस्सा बनने का आह्वान किया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि रजा पहलवी को सत्ता में लाकर अमेरिका कई निशाने साध सकता है. यदि ईरान में अमेरिका समर्थित सरकार आती है, तो वैश्विक तेल बाजार पर पश्चिम की पकड़ मजबूत हो जाएगी. इराक और अफगानिस्तान के अनुभवों के बाद, ईरान में तख्तापलट कर रजा पहलवी को बिठाना अमेरिका के लिए अपना वैश्विक दबदबा साबित करने का सबसे बड़ा मौका होगा.
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रजा पहलवी ने ईरानी जनता से सतर्क रहने और सड़कों पर उतरने की अपील की है. उन्होंने कहा कि सड़कों पर व्यापक और निर्णायक उपस्थिति का समय बहुत निकट है. यदि तेहरान की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ता है और सेना पीछे हटती है, तो 47 साल बाद ईरान के इतिहास का पहिया एक बार फिर घूम सकता है. क्या रजा पहलवी ‘क्राउन प्रिंस’ से ‘ईरान के बॉस’ बन पाएंगे? इसका फैसला अब तेहरान की गलियों और वाशिंगटन की रणनीतियों के बीच होना है.
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