Bharatpur Missing Man Returns After 12 Years: कभी-कभी हकीकत की दुनिया में कुछ ऐसा घटित हो जाता है, जो बॉलीवुड की सबसे बड़ी सस्पेंस और ड्रामा फिल्मों को भी बहुत पीछे छोड़ देता है. राजस्थान के भरतपुर जिले से एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला और आंखें नम कर देने वाला अजीबोगरीब मामला सामने आया है. यहां एक ऐसे शख्स की जीवित वापसी हुई है, जिसे परिवार ने बारह साल पहले ही मरा हुआ मान लिया था, सात साल पहले जिसका बकायदा अंतिम संस्कार तक कर दिया गया था और जिसके बेटे की शादी के कार्ड पर नाम के आगे ‘स्वर्गीय’ तक छप चुका था.
जब वह शख्स अचानक अपने परिवार के सामने जिंदा आकर खड़ा हुआ, तो वहां मौजूद हर एक इंसान की आंखों से आंसुओं का सैलाब बह निकला. इस चमत्कार को हकीकत में बदलने का काम किया है भरतपुर की प्रसिद्ध अपना घर संस्था ने, जिसने एक बिखरे हुए परिवार को दोबारा मिला दिया है.
पूरी घटना की शुरुआत लगभग बारह वर्ष पहले हुई थी, जब झारखंड के गढ़वा जिले के रहने वाले सुनील कुमार अपनी सगी बहन से मिलने के लिए बिहार के छपरा गए हुए थे. वहां पहुंचने के बाद वे अचानक बेहद रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए. परिजनों ने उनकी काफी खोजबीन की, लेकिन उसी दौरान इलाके में एक भयानक बाढ़ आ गई.
बाढ़ की विभीषिका को देखते हुए परिवार वालों को यह पक्का यकीन हो गया कि सुनील कुमार नदी के तेज बहाव में बह गए होंगे और अब उनका बच पाना नामुमकिन है. कई वर्षों तक दर-दर भटकने और हर जगह तलाश करने के बाद आखिरकार थक-हारकर पूरे परिवार ने भारी मन से उन्हें मृत मान लिया.
समय बीतता गया और करीब सात वर्ष पूर्व स्थानीय सामाजिक मान्यताओं और रीति-रिवाजों के अनुसार सुनील कुमार का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार कर दिया गया. उनकी पत्नी अमरावती देवी के हाथों से चूड़ियां तोड़ दी गईं और सुहाग के सारे चिन्ह हमेशा के लिए उतार दिए गए. अमरावती देवी ने रंगीन कपड़े पहनना पूरी तरह छोड़ दिया और एक सफेद साड़ी में बेहद दर्दनाक विधवा का जीवन जीने लगीं.
हालात यहां तक पहुंच गए थे कि परिवार में जब एक विवाह का आयोजन हुआ, तो निमंत्रण पत्र पर बकायदा पिता के स्थान पर स्वर्गीय सुनील कुमार नाम छपवा दिया गया. पूरा परिवार मान चुका था कि अब सुनील कभी लौटकर नहीं आएंगे.
इस अजीब कहानी (Bharatpur Missing Man Returns After 12 Year) में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब कुछ समय पहले अपना घर आश्रम अंबाला की रेस्क्यू टीम को अंबाला रेलवे स्टेशन पर एक बेहद गंभीर रूप से बीमार, लावारिस और कुपोषित व्यक्ति तड़पता हुआ मिला. वह व्यक्ति टीबी की गंभीर बीमारी से पीड़ित था और अपने पैरों पर चलने में भी पूरी तरह असमर्थ था.
संस्था की टीम ने तुरंत उसे रेस्क्यू किया और प्राथमिक उपचार देने के बाद उसे भरतपुर स्थित अपना घर आश्रम के मुख्य मुख्यालय ले आया गया. यहां संस्था के सेवादारों और डॉक्टरों की दिन-रात की सेवा और इलाज के बाद जब उस व्यक्ति के स्वास्थ्य में सुधार हुआ, तो उसने होश में आते ही अपना नाम सुनील कुमार बताया और अपने गांव का पूरा पता पुनर्वास विभाग को नोट कराया.
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सुनील कुमार से जानकारी मिलने के बाद संस्था के पुनर्वास विभाग ने झारखंड पुलिस की मदद ली और उनके परिजनों से संपर्क साधा. जैसे ही यह खबर मिली, सुनील की पत्नी अमरावती देवी और उनका बेटा नरेश यादव तुरंत भागते हुए भरतपुर पहुंचे. जो बेटा पिता के लापता होने के समय महज सात-आठ साल का बच्चा था, वह अब एक जवान लड़का बन चुका था. जब पिता और पुत्र इतने वर्षों बाद एक-दूसरे के गले मिले, तो वहां मौजूद डॉक्टरों और सेवादारों की आंखें भी पूरी तरह नम हो गईं.
लेकिन सबसे भावुक और ऐतिहासिक पल तब आया जब वर्षों से सफेद साड़ी में विधवा का जीवन जी रही अमरावती देवी ने दोबारा लाल रंग की साड़ी पहनी, अपनी मांग में सिंदूर सजाया और अपने जीवित पति के सामने आईं. अपना घर आश्रम के सचिव नरेंद्र तिवारी ने बताया कि संस्था का एकमात्र उद्देश्य केवल लावारिसों की सेवा करना नहीं, बल्कि बिखरे हुए परिवारों को फिर से जोड़ना है और सुनील कुमार का यह पुनर्मिलन उनकी अब तक की सबसे बड़ी और प्रेरणादायक सफलता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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