विश्लेषण

पश्चिम को छोड़कर आगे बढ़ें: BRICS Network University भारतीय छात्रों के लिए रिसर्च के नए रास्ते कैसे बना रहा है

BRICS Network University विश्वविद्यालयों के बीच आदान-प्रदान और सीमा पार सहयोग के जरिए भारतीय छात्रों के लिए रिसर्च और पढ़ाई से जुड़े नए अवसर बढ़ा रहा है.

विदेश में रिसर्च करने की सोच रहे भारतीय छात्रों के पास अब अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया से आगे देखने की एक नई वजह है. भारत की 2026 की BRICS अध्यक्षता के कारण BRICS Network University एक बार फिर चर्चा में आया है. जुलाई में इसकी गवर्निंग बोर्ड की बैठक हुई और सदस्य देशों के बीच शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने के लिए नए प्रयास शुरू किए गए.

इसका मतलब यह नहीं है कि यह अंतरराष्ट्रीय छात्रों के वीजा का पूरी तरह विकल्प बन जाएगा. हालांकि, विश्वविद्यालयों के एक्सचेंज प्रोग्राम और BRICS से जुड़े सहयोग के जरिए कम समय के लिए रिसर्च करने के कुछ ऐसे रास्ते खुल सकते हैं, जिनमें प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान हो.

भारतीय छात्रों के लिए क्या बदला?

फिलहाल हुआ बदलाव किसी नए वीजा नियम से ज्यादा संस्थागत स्तर पर हुआ है. 20 जुलाई 2026 को भारत के शिक्षा मंत्रालय ने पारंपरिक और स्थानीय ज्ञान प्रणालियों पर BRICS Network University की एक कॉन्फ्रेंस आयोजित की. 21 जुलाई को इंटरनेशनल गवर्निंग बोर्ड ने 178 भाग लेने वाले विश्वविद्यालयों और 11 विषयगत समूहों की गतिविधियों की समीक्षा की.

भारत ने पारंपरिक और स्थानीय ज्ञान प्रणालियों को 12वें विषयगत समूह के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव भी दिया. बाद में 7 अगस्त 2026 को हुई 13वीं BRICS शिक्षा मंत्रियों की बैठक की घोषणा में इस प्रस्ताव का उल्लेख किया गया.

भारतीय छात्रों के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि BRICS Network University से जुड़े वीजा-मुक्त विकल्पों को दो अलग-अलग स्तरों पर समझना होगा- पहला, विश्वविद्यालय की भागीदारी और दूसरा, जिस देश में जाना है वहां के प्रवेश और वीजा नियम.

BRICS-NU खुद को शैक्षणिक, वैज्ञानिक और रिसर्च सहयोग के लिए एक नेटवर्क के रूप में पेश करता है. इसके विषयगत समूह संयुक्त कोर्स, रिसर्च प्रोजेक्ट और छात्रों के आदान-प्रदान जैसे कार्यक्रमों में मदद करते हैं.

नेटवर्क मूल BRICS देशों से आगे बढ़ रहा है

भारत के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, BRICS समूह में अब 11 देश शामिल हैं- ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE).

इस बढ़ते दायरे के कारण भारतीय रिसर्च छात्रों के लिए ग्लोबल साउथ में और ज्यादा विश्वविद्यालयों, प्रयोगशालाओं और फील्डवर्क की जगहों के साथ जुड़ने के अवसर बन सकते हैं.

BRICS-NU के सार्वजनिक पोर्टल पर कंप्यूटर साइंस और सूचना सुरक्षा, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन, अर्थशास्त्र, ऊर्जा, स्वास्थ्य विज्ञान, प्राकृतिक विज्ञान, टिकाऊ कृषि और जल संसाधन जैसे विषयों की सूची दी गई है.

इन क्षेत्रों में कम समय के लिए यात्रा, संयुक्त निगरानी में रिसर्च, वर्कशॉप या एक सेमेस्टर के लिए छात्र एक्सचेंज जैसे अवसर पूरे डिग्री के लिए विदेश जाने की तुलना में आसानी से मिल सकते हैं. खासकर तब, जब मेजबान विश्वविद्यालय पहले से ही इस नेटवर्क का हिस्सा हो.

वीजा-मुक्त का मतलब हमेशा पढ़ाई के लिए वीजा-मुक्त नहीं होता

छात्रों को ‘वीजा-मुक्त यात्रा’ जैसे शब्दों को सावधानी से समझना चाहिए. कुछ BRICS देश भारतीय पासपोर्ट धारकों को ई-वीजा, पहुंचने पर वीजा या कुछ सीमित मामलों में वीजा से छूट देते हैं. लेकिन ये सुविधाएं पर्यटन, कारोबारी बैठकों या छोटे कार्यक्रमों के लिए हो सकती हैं, जरूरी नहीं कि औपचारिक पढ़ाई के लिए भी लागू हों.

उदाहरण के लिए, रूस का यूनिफाइड ई-वीजा भारतीय नागरिकों के लिए उपलब्ध है और इसके जरिए 30 दिनों तक रहने की अनुमति मिलती है. इसमें वैज्ञानिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेना भी शामिल है. दूसरे उद्देश्यों के लिए नियमित वीजा की जरूरत होती है.

विदेश मंत्रालय भी भारतीय नागरिकों को सलाह देता है कि यात्रा से पहले संबंधित विदेशी दूतावास या वाणिज्य दूतावास से वीजा सुविधा की जानकारी जरूर लें. 2026 की वीजा सुविधा से जुड़ी जानकारी में पात्र भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए UAE में कुछ शर्तों के साथ वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा का उल्लेख है. संसद में दिए गए एक जवाब के मुताबिक, ईरान ने 19 नवंबर 2025 से भारतीय सामान्य पासपोर्ट धारकों के लिए एकतरफा टूरिस्ट वीजा सुविधा को निलंबित कर दिया था.

आवेदन करने से पहले छात्रों को ये जांच जरूर करनी चाहिए:

यह पता करें कि अवसर किसी वर्कशॉप, प्रयोगशाला की यात्रा, एक सेमेस्टर के एक्सचेंज, इंटर्नशिप या डिग्री प्रोग्राम से जुड़ा है. मेजबान विश्वविद्यालय से पूछें कि प्रस्तावित रिसर्च गतिविधि के लिए कौन-सी वीजा श्रेणी लागू होगी.

यह जांचें कि मिलने वाली आर्थिक मदद में हवाई यात्रा, बीमा, रहने की व्यवस्था और स्थानीय रजिस्ट्रेशन का खर्च शामिल है या नहीं. एडमिशन, निमंत्रण पत्र, सुपरवाइजर की मंजूरी और यात्रा के उद्देश्य से जुड़े लिखित दस्तावेज अपने पास रखें.

अगर मेजबान संस्थान इसकी अनुमति की पुष्टि नहीं करता है, तो काम, पैसे लेकर रिसर्च करने या ऐसी पढ़ाई जिसके लिए क्रेडिट मिलता हो, उसके लिए टूरिस्ट वीजा का इस्तेमाल न करें.

आगे क्या होगा?

अब अगली चुनौती यह होगी कि भारतीय विश्वविद्यालय BRICS स्तर पर किए गए ऐलानों को छात्रों के लिए वास्तविक आवेदन के अवसरों में बदलते हैं या नहीं. छात्रों को अपने संस्थान के इंटरनेशनल ऑफिस, BRICS-NU की घोषणाओं और संबंधित विश्वविद्यालयों की वेबसाइटों पर नजर रखनी चाहिए. यहां उन्हें एक्सचेंज प्रोग्राम, सुपरवाइजर के साथ किए जाने वाले रिसर्च प्रोजेक्ट और विषयगत वर्कशॉप से जुड़ी जानकारी मिल सकती है.

ये भी पढ़ें- IMF का विकल्प या वैश्विक उथल-पुथल: नया BRICS अंतर-बैंक भुगतान तंत्र कैसे SWIFT के वर्चस्व को चुनौती दे रहा है?

फिलहाल सबसे अहम बात साफ है: BRICS अंतरराष्ट्रीय छात्रों के वीजा को खत्म नहीं कर रहा है. इसके बजाय, यह रिसर्च के लिए एक समानांतर रास्ता तैयार कर रहा है. इस रास्ते के जरिए भारतीय छात्रों को क्षेत्रीय स्तर पर ज्यादा विश्वविद्यालयों और रिसर्च पार्टनर्स के साथ जुड़ने, कम समय के लिए विदेश जाने और कुछ मामलों में पारंपरिक पश्चिमी देशों में पढ़ाई के मुकाबले आसान प्रवेश विकल्प मिलने की संभावना हो सकती है.

-भारत एक्सप्रेस

Prashant Kumar

CEO – Bharat Express Digital Chief Advisor to the Chairman & Managing Director and Editor-in-Chief Mr. Prashant Kumar is a digital, media and growth transformation leader with 18+ years of experience across strategy, technology, AI, marketing and business transformation, having worked with leading organisations including Amazon, IBM, Adidas and Tata Consumer Products. At Bharat Express, he leads digital transformation, audience growth, technology, partnerships, monetisation and new business initiatives to build a scalable, future-ready media ecosystem.

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