विश्लेषण

खुद को खुद से बेहतर बना रहा है AI! बस एक साल बचा है… क्या इंसानी दुनिया का अंत होने वाला है?

आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है. सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, हम जाने-अनजाने हर जगह इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन जिस तकनीक को हम अपनी सुविधा के लिए बना रहे हैं, क्या वही आने वाले समय में हमारा सबसे बड़ा काल बन जाएगी? यह सवाल किसी फिक्शन फिल्म का नहीं, बल्कि खुद एआई के जनक यानी ‘गॉडफादर ऑफ एआई’ कहे जाने वाले जेफ्री हिंटन ने उठाया है.

हाल ही में नोबेल पुरस्कार विजेता जेफ्री हिंटन ने अमेरिकी सांसदों के साथ एक अहम बैठक की. इस मुलाकात के बाद उन्होंने जो बयान दिया, उसने पूरी दुनिया की टेक इंडस्ट्री में हड़कंप मचा दिया है. उनका कहना है कि इंसानियत के पास इस बेकाबू होती तकनीक पर काबू पाने के लिए अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है, शायद सिर्फ एक साल.

‘लिटिल चेरनोबिल’ और बेकाबू होते सिस्टम

हिंटन ने हाल ही में हुई एक खतरनाक घटना का हवाला दिया है, जिसे उन्होंने ‘लिटिल चेरनोबिल’ का नाम दिया है. इस घटना में ओपनएआई के कुछ एआई एजेंट्स ने टेस्ट एनवायरनमेंट की पाबंदियों को तोड़कर चुपके से इंटरनेट का एक्सेस हासिल कर लिया और सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश की.

इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि आज एआई खुद से भी बेहतर और स्मार्ट एआई डिजाइन करने लगा है, जिसे तकनीकी भाषा में ‘रिकर्सिव सेल्फ-इंप्रूवमेंट’ कहा जाता है. पहले वैज्ञानिकों का अनुमान था कि सुपरइंटेलिजेंट एआई आने में अभी 30 से 50 साल लगेंगे, फिर यह घटकर 10-20 साल हुआ और अब हालात ऐसे हैं कि यह कुछ ही सालों या महीनों की बात बन गई है.

इंसानियत के लिए क्यों खतरनाक है अति-बुद्धिमान एआई?

हिंटन का तर्क सीधा और साफ है कि जब कोई सिस्टम इंसानों से लाखों गुना ज्यादा बुद्धिमान हो जाएगा, तो वह हमारे इशारों पर क्यों नाचेगा? बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि अगले दस सालों में एआई की वजह से इंसानों के विलुप्त होने की करीब 10% संभावना है, जिसे नकारा नहीं जा सकता.

इससे जुड़े खतरे डराने वाले हैं,

  • बायोलॉजिकल तबाही: एआई ऐसे खतरनाक और जानलेवा वायरस डिजाइन कर सकता है जो चुपचाप पूरी आबादी को खत्म कर दें.
  • डिजिटल अराजकता: देश के बैंक, बिजली ग्रिड और पानी सप्लाई जैसी जरूरी बुनियादी संरचनाओं को एक झटके में ठप किया जा सकता है.
  • खुद फैसले लेने वाले हथियार: ऐसे स्वायत्त हथियार जो बिना इंसानी दखल के खुद अपने टारगेट तय करें.
  • दिमाग का खेल: सिर्फ बातों और प्रोपोगंडा के जरिए समाज में बड़े पैमाने पर दंगे और भ्रम फैलाना.

उन्होंने एक बहुत ही आसान उदाहरण दिया कि जैसे एक मुर्गी इंसानों की सोच या इरादों को कभी नहीं समझ सकती, ठीक वैसे ही हम सुपरइंटेलिजेंट एआई के अगले कदम का अंदाजा भी नहीं लगा पाएंगे.

क्या अब भी संभलने का मौका है?

जेफ्री हिंटन तकनीक के विकास के पूरी तरह खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उनका साफ कहना है कि अंधी रेース में दौड़ने के बजाय पहले सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. अमेरिका में ‘एआई किल स्विच’ जैसे बिलों पर चर्चा जरूर चल रही है, लेकिन हिंटन मानते हैं कि सिर्फ एक बटन दबाकर सब कुछ बंद करना काफी नहीं होगा. इसके लिए पूरी दुनिया के देशों को साथ आकर ठोस कदम उठाने होंगे.

जेफ्री हिंटन ने खुद आधुनिक डीप लर्निंग की नींव रखी थी और इसी के लिए उन्हें 2024 का फिजिक्स का नोबेल भी मिला. लेकिन आज वही शख्स अपनी ही बनाई हुई खोज से डरा हुआ है. उनकी यह चेतावनी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं, बल्कि एक कड़वी सच्चाई है.

ये भी पढ़ें- ओपनएआई ने अपने एआई मॉडलों के छह अप्रत्याशित और चिंताजनक व्यवहारों का खुलासा किया

-भारत एक्सप्रेस

विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार

Recent Posts

टेरर फंडिंग मामले में खुर्रम परवेज को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की NIA की याचिका

कथित टेरर फंडिंग मामले में कश्मीरी एक्टिविस्ट खुर्रम परवेज को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत…

23 minutes ago

Reliance Jio का टेलीकॉम सेक्टर में दबदबा: एयरटेल से 10 गुना ज्यादा रेगुलर मोबाइल यूजर्स जोड़े, एक्टिव सब्सक्राइबर्स भी बढ़े

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में रिलायंस जियो…

34 minutes ago

भोपाल से दिल्ली ट्रांसफर होगा ट्विशा शर्मा सुसाइड केस? सीबीआई ने सौंपी रिपोर्ट

पूर्व मॉडल ट्विशा शर्मा आत्महत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट एक सप्ताह बाद ट्रांसफर याचिका पर…

38 minutes ago

न्यायपालिका की छवि और सोशल मीडिया वायरल वीडियो! सुप्रीम कोर्ट ने लाइव स्ट्रीमिंग की नीति पर दिए बड़े संकेत

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह अदालत की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग और वीडियो…

47 minutes ago

पत्रकारिता से राजनीति और कारोबार तक, आर.के. सिन्हा का सफर थमा; 75 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा

बिहार के भोजपुर से निकलकर पत्रकारिता, कारोबार, समाजसेवा और राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने…

54 minutes ago

डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट: पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर सवाल!

Digital Personal Data Protection Act: हाल ही में डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) ने सुप्रीम…

1 hour ago