प्रतीकात्मक फोटो.
संसद का मानसून सत्र जल्द ही शुरू होने जा रहा है. 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चलने वाले इस सत्र में राजनीतिक तपिश पहले से ही महसूस की जा रही है. खासतौर पर कांग्रेस पार्टी ने इस सत्र में सरकार को घेरने के लिए संगठित और आक्रामक रणनीति बना रही है इसी को लेकर आज कांग्रेस सीपीपी अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में कांग्रेस की पार्लियामेंट्री स्ट्रेटजी कमेटी की अहम बैठक की गई है
इस महत्वपूर्ण बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, और वरिष्ठ रणनीतिकार जैसे के सी वेनुगोपाल, पी चिदंबरम,प्रमोद तिवारी, मनीष तिवारी, तारिक अनवर, कुमारी शैलजा, नसीर हुसैन और जयराम रमेश ने भाग लिया. बैठक का मुख्य उद्देश्य मानसून सत्र में कांग्रेस की भूमिका और विरोध की दिशा को स्पष्ट करना था.
कांग्रेस ने तय किया है कि वह इस सत्र में जनहित से जुड़े कई अहम मुद्दों को ज़ोर-शोर से उठाएगी, जिनमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह के विषय शामिल हैं.
कांग्रेस ने बिहार में चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही ‘विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR)’ प्रक्रिया पर आपत्ति जता रही है. पार्टी का मानना है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूचियों में छेड़छाड़ और वोट देने के अधिकार को छीनने के लिए की जा रही है . संसद में इस विषय पर बहस की मांग की जाएगी.
हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले और उसके जवाब में केंद्र सरकार द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर कांग्रेस सरकार से राष्ट्रीय सुरक्षा पर जवाबदेही की मांग करेगी. साथ ही कूटनीतिक स्तर पर उठाए गए कदमों की भी समीक्षा चाहेगी.
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर भी सवाल उठेगा जिसमें उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम में मध्यस्थता का दावा किया था. इसके साथ ही, अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए व्यापारिक टैरिफ भी कांग्रेस के निशाने पर रहेंगे.
कांग्रेस का कहना है कि देश की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है. बढ़ती महंगाई, रोज़गार संकट, और मंदी जैसे हालात पर सरकार को सदन में जवाब देना होगा. पार्टी
कांग्रेस इस सत्र में लोकसभा के उपसभापति पद के लिए भी तैयार है. पार्टी की ओर से केरल से आठ बार के सांसद कोडिकुन्निल सुरेश को उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना है.
कांग्रेस की रणनीति से यह साफ है कि पार्टी संसद में एकजुट, संगठित और आक्रामक विपक्ष की भूमिका में रहेगी . सवाल यह भी होगा कि क्या बाकी विपक्षी दल—जैसे टीएमसी, सपा, डीएमके, वामपंथी दल—कांग्रेस के साथ कदम से कदम मिलाकर चलेंगे?
यदि ऐसा होता है, तो यह मानसून सत्र केंद्र सरकार के लिए कई मोर्चों पर चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
कांग्रेस इस मानसून सत्र को सरकार की जवाबदेही तय करने का मंच बनाएगी. चाहे वह बिहार की राजनीति हो, कश्मीर की सुरक्षा, या फिर देश की अर्थव्यवस्था और विदेश नीति, हर मोर्चे पर पार्टी ने मुद्दों को बारीकी से सदन के सामने रखने की कोशिश करेगी
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस इन मुद्दों को संसद में प्रभावी ढंग से उठा पाने में सफल होती है, और क्या सरकार इन सवालों के ठोस और संतोषजनक उत्तर देगी या नहीं.
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-भारत एक्सप्रेस
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