विश्लेषण

एक पहुंचा मालाबार, दूसरा रह गया बीच मझधार: 20 मई और दो नाविकों की वो दास्तां जिसने बदल दी दुनिया

Discovery of India: यह कहानी 20 मई की ऐतिहासिक तारीख से जुड़े दो महान नाविकों ‘वास्को डी गामा’ (Vasco da Gama) और ‘क्रिस्टोफर कोलंबस'(Christopher Columbus)  के साहस की है. जहां एक ने समुद्री लहरों को चीरते हुए भारत का सीधा मार्ग खोज निकाला, वहीं दूसरे ने भारत की चाह में अनजाने में एक नई दुनिया (America) की खोज कर दी. यह लेख उनके अटूट संकल्प और वैश्विक बदलाव की दास्तां बयां करता है.

वास्को डी गामा और कोलंबस दोनों का लक्ष्य भारत की समृद्धि तक पहुंचना था. गामा अपनी यात्रा में सफल रहे और भारत के साथ व्यापार के नए द्वार खोले, जबकि कोलंबस भारत समझकर अमेरिका जा पहुंचे. इन दोनों की यात्राओं ने न केवल विश्व का मानचित्र बदला, बल्कि आधुनिक वैश्वीकरण और व्यापारिक युग की शुरुआत भी की.

सपनों की धरती पर सफल कदम

20 मई 1498 को पुर्तगाली नाविक वास्को डी गामा ने इतिहास रच दिया जब उनके तीन जहाज भारत के मालाबार तट पर स्थित कालीकट (Kozhikode,Kerala) पहुंचे. उस दौर में यूरोप में भारतीय मसालों, रेशम और कीमती पत्थरों की भारी मांग थी, लेकिन व्यापारिक मार्ग अरब व्यापारियों के नियंत्रण में थे. पुर्तगाल के राजा मैनुअल प्रथम के आदेश पर, गामा ने अफ्रीका के दक्षिणी छोर ‘केप ऑफ गुड होप’ को पार करते हुए एक नए समुद्री मार्ग की खोज की.

कालीकट पहुंचने पर उनकी मुलाकात स्थानीय राजा जामोरिन से हुई. हालांकि व्यापारिक तालमेल बिठाने में शुरुआती चुनौतियां आईं, लेकिन इस खोज ने यूरोप और भारत के बीच व्यापार का सीधा रास्ता खोल दिया. इसने न केवल वैश्विक व्यापार के समीकरण बदले, बल्कि भविष्य में भारत में यूरोपीय उपनिवेशवाद (Colonialism) का बीज भी बो दिया.

भारत की चाह में ‘नया संसार’

विडंबना यह है कि 20 मई 1506 को ही इतालवी नाविक क्रिस्टोफर कोलंबस का निधन हुआ था. कोलंबस का पूरा जीवन भारत पहुंचने की जिद और जुनून में बीता. उनका मानना था कि पृथ्वी गोल है, इसलिए यदि वह पश्चिम की ओर से यात्रा करेंगे, तो वे भारत पहुंच जाएंगे. 1492 में स्पेन के राजा-रानी की मदद से वह अपनी यात्रा पर निकले, लेकिन उनके और भारत के बीच में एक अज्ञात महाद्वीप खड़ा था, जिसे आज हम अमेरिका के नाम से जानते हैं.

अपनी चार समुद्री यात्राओं के दौरान कोलंबस कैरिबियन और मध्य अमेरिका के हिस्सों में पहुंचे, लेकिन वे अंत तक यही मानते रहे कि वे भारत या पूर्वी एशिया के किसी हिस्से में हैं. इसी भ्रम के कारण उन्होंने वहां के मूल निवासियों को ‘इंडियंस’ कहा, जो आज भी ‘अमेरिकन इंडियंस’ (American Indians) के रूप में पहचाने जाते हैं. कोलंबस कभी भारत नहीं पहुंच पाए, लेकिन उनकी इस ‘गलती’ ने इतिहास को एक नया महाद्वीप दे दिया.

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-भारत एक्सप्रेस

विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार

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