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एक थप्पड़ ने हिला दी देश की हुकूमत: जानिए 1979 का विद्रोह जो बन गई इतिहास की सबसे बड़ी पुलिस बगावत

1979 Police Revolt: फिल्म ‘सतलुज’ ने पंजाब पुलिस चर्चा को चर्चा में ला दिया है. ऐसे में लगभग 47 साल पहले की एक घटना का जिक्र लाजमी हो जाता है. वर्ष 1979 की गर्मियों की बात है. पंजाब में एक अकाली दल के विधायक (MLA) सड़क पर ड्यूटी दे रहे एक पुलिस अधिकारी के पास से गुजर रहे थे. पुलिस अधिकारी ने उन्हें सलामी नहीं दी. इस छोटी सी बात ने विधायक को इतना क्रोधित कर दिया कि उन्होंने सार्वजनिक स्थल पर पुलिस अधिकारी को थप्पड़ मार दिया और शारीरिक रूप से हमला कर दिया.

असंतोष की चिंगारी

यह घटना मात्र एक व्यक्तिगत घटना नहीं थी. यह पंजाब पुलिस में लंबे समय से पनप रहे असंतोष की चिंगारी बन गई. 8 मई 1979 को पंजाब पुलिस के लगभग 200 जवान बैरकों से बाहर निकल आए और सड़कों पर उतर गए. उन्होंने बेहतर कामकाजी परिस्थितियों और सम्मान की मांग की. जल्द ही यह विद्रोह पूरे देश में फैल गया. विभिन्न राज्यों के पुलिस बलों में हड़ताल और बगावत की लहर दौड़ गई.

केंद्र सरकार में गृह मंत्रालय की कमान संभाल रहे चौधरी चरण सिंह हैरान थे. तत्कालीन कारण हर जगह अलग-अलग थे, लेकिन मांगें एक जैसी- सम्मानजनक व्यवहार, बेहतर सुविधाएं और राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्ति.

पंजाब में तो पुलिसकर्मियों ने स्पष्ट रूप से कहा, ‘विधायक को गिरफ्तार किया जाए. हम चुने हुए प्रतिनिधियों से सम्मान चाहते हैं.’

बदलते पुलिसकर्मी

पुराने समय में पुलिस में ज्यादातर गांवों से अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे लोग भर्ती होते थे. लेकिन 1970 के दशक तक स्थिति बदल चुकी थी. अब पुलिस में स्नातक और शिक्षित युवा भर्ती हो रहे थे, जो अपने अधिकारों के प्रति जागरूक थे.

एक कांस्टेबल ने प्रदर्शन के दौरान गुस्से में कहा था, ‘हमारे साथ कुत्तों जैसा व्यवहार किया जाता है. अधिकारी और नेता हमें अशिक्षित मूर्ख समझते हैं. मैं ग्रेजुएट हूं. मैं अब गांव के बेवकूफ की तरह व्यवहार सहन नहीं करूंगा.’

विद्रोह बढ़ता गया. सरकार ने स्थिति संभालने के लिए बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) को बुलाया. पूरे देश में गोलीबारी में लगभग 70 लोग मारे गए.

समझौता

पंजाब में हालांकि स्थिति अलग रही. 13 मई 1979 को प्रकाश सिंह बादल सरकार ने सेना को पुलिस हथियार भंडारों की सुरक्षा के लिए बुलाया. बादल स्वयं असंतुष्ट पुलिस अधिकारियों से मिले, उनकी सारी मांगें मान लीं और 17 मई 1979 को पुलिस सामान्य ड्यूटी पर लौट गई.

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-भारत एक्सप्रेस

विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार

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