ब्लॉग

दुनिया का पहला ATM: 1969 का वो कमाल जिसने 24 घंटे कैश देने की शुरुआत की

World’s first ATM: 2 सितंबर 1969 को न्यूयॉर्क की सड़कों पर एक विज्ञापन ने लोगों को हैरान कर दिया था. विज्ञापन पर लिखा था- “2 सितंबर को हमारा बैंक सुबह 9 बजे खुलेगा और कभी बंद नहीं होगा.” लोग सोचने लगे कि क्या केमिकल बैंक सच में 24 घंटे खुला रहेगा? लेकिन बात कुछ और थी. केमिकल बैंक ने दुनिया के पहले आधुनिक ATM (Automated Teller Machine) की शुरुआत की थी. यह मशीन न्यूयॉर्क के रॉकविल सेंटर (Rockville Centre) शाखा में लगाई गई थी.

डोन वेत्जेल और डॉक्यूटेल का योगदान

इस ATM को डोन वेत्जेल (Don Wetzel) ने विकसित किया था. वेत्जेल डॉक्यूटेल कंपनी के साथ काम कर रहे थे. उन्होंने बैंक की लंबी कतार में खड़े होकर सोचा था कि क्यों न मशीन से ही पैसे निकाले जा सकें.

यह मशीन चुंबकीय पट्टी वाले प्लास्टिक कार्ड का इस्तेमाल करती थी. जो आज के ATM कार्ड का आधार बना. शुरुआत में यह केवल नकद निकालने का काम करती थी. कंपनी इतनी सफल रही कि अगले कुछ वर्षों में उसने अमेरिकी ATM बाजार का बड़ा हिस्सा हासिल कर लिया. 1973 में वेत्जेल को ATM से संबंधित पेटेंट भी मिला.

विवाद: असल में पहला ATM किसने बनाया?

ATM के आविष्कार पर विवाद हमेशा से रहा है क्योंकि 1960 के दशक में कई देशों में समानांतर रूप से काम चल रहा था.

जॉन शेफर्ड-बैरन (John Shepherd-Barron)

27 जून 1967 को लंदन के एनफील्ड में बार्कलेज बैंक की शाखा में उनकी मशीन शुरू हुई. यह दुनिया की पहली व्यावसायिक कैश डिस्पेंसर मशीन मानी जाती है. इसमें कार्ड की जगह रेडियोएक्टिव पदार्थ (कार्बन-14) लगे विशेष चेक का इस्तेमाल होता था. मशीन स्कैनर से चेक को पढ़ती थी और साथ में पिन डालना पड़ता था.

शुरुआत में शेफर्ड-बैरन ने 6 अंकों का पिन सोचा था, लेकिन उनकी पत्नी को इतने अंक याद रखने में दिक्कत हुई. इसलिए पिन को 4 अंकों का कर दिया गया. जो आज दुनिया भर में मानक बन गया. सुरक्षा की चिंता के कारण उन्होंने अपनी तकनीक का पेटेंट नहीं करवाया.

जेम्स गुडफैलो (James Goodfellow)

1966 में उन्होंने प्लास्टिक कार्ड और पिन वाले सिस्टम का पेटेंट करवाया था. यही सिस्टम आज के ATM का मूल आधार है. उनके पेटेंट में कार्ड डालकर पिन एंटर करने की आधुनिक प्रक्रिया शामिल थी.

ATM ने कैसे बदल दी दुनिया

1969 के बाद ATM तेजी से फैले. पहले केवल नकद निकालने वाली मशीनें थीं, फिर बैलेंस चेक, जमा और ट्रांसफर जैसी सुविधाएं जुड़ गईं. आज दुनिया भर में करोड़ों ATM हैं जो 24 घंटे सेवा देते हैं. रॉकविल सेंटर का वह छोटा-सा विज्ञापन सिर्फ एक बैंक का प्रचार नहीं था. वह बैंकिंग क्रांति की शुरुआत थी. “बैंक कभी बंद नहीं होगा” वाला वादा आज सच हो चुका है.

-भारत एक्सप्रेस

विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार

Recent Posts

Railway Alert: दिल्ली से घर जा रहे हैं? 14 नवंबर तक 6 बड़े स्टेशनों पर नहीं मिलेंगे प्लेटफॉर्म टिकट, जानें किसे मिलेगी छूट

Railway Alert: दीवाली और छठ को लेकर दिल्ली के 6 प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म…

10 minutes ago

Scotch Rate Cut: व्हिस्की के शौकीनों की बल्ले-बल्ले! दिल्ली में इतने रुपये तक सस्ती हो सकती है स्कॉच

Scotch Rate: भारत-यूके ट्रेड डील के बाद दिल्ली में स्कॉच व्हिस्की करीब 7% सस्ती हो…

28 minutes ago

पीएम मोदी के मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार ने अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान को दिया नया गौरव- सीएम योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के…

44 minutes ago

राजनाथ सिंह का दौरा रद्द, भोपाल में जेपी नड्डा दिखाएंगे दम; 50 हजार लोगों के जुटने का अनुमान

Madhya Pradesh Politics: भोपाल में आज होने वाली बीजेपी की पदयात्रा में राजनाथ सिंह की…

1 hour ago

सेर्वोटेक रिन्यूएबल का भौकाल.. ! मुनाफे में 2366% की  छलांग, EV और सोलर सेक्टर में मचाया तहलका

सेर्वोटेक रिन्यूएबल पावर सिस्टम लिमिटेड ने Q2 FY27 में शानदार वित्तीय प्रदर्शन करते हुए कंसोलिडेटेड…

1 hour ago