बिजनेस

गुजरात में दौड़ेगी ग्रीन एनर्जी! Adani Group और CMA CGM की साझेदारी से सड़कों पर उतरेंगे इलेक्ट्रिक ट्रक्स

गुजरात के वापी में माल ढुलाई के तरीके में बदलाव की शुरुआत हो गई है. अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) की सहयोगी कंपनी अडानी लॉजिस्टिक्स लिमिटेड (ALL) ने दुनिया की प्रमुख शिपिंग और लॉजिस्टिक्स कंपनियों में शामिल CMA CGM के साथ साझेदारी की है. इस साझेदारी के तहत गुजरात के तुम्ब स्थित इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD) से कंटेनरों को ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए इलेक्ट्रिक ट्रकों का इस्तेमाल किया जाएगा.

इस पहल का मकसद सड़क के रास्ते होने वाली माल ढुलाई में इलेक्ट्रिक वाहनों की भागीदारी बढ़ाना है. इससे कंटेनर डिपो से सीधे फैक्ट्रियों और गोदामों तक सामान पहुंचाने की व्यवस्था में इलेक्ट्रिक ट्रकों को शामिल किया जा सकेगा.

आमतौर पर कंटेनरों को बंदरगाहों या इनलैंड कंटेनर डिपो से ग्राहकों की फैक्ट्रियों और गोदामों तक पहुंचाने के लिए ट्रकों की जरूरत होती है. इस पूरी प्रक्रिया को लॉजिस्टिक्स की भाषा में ‘स्टोर-डोर डिलीवरी’ कहा जाता है. इसमें सामान को डिपो से उठाकर सीधे ग्राहक के तय पते तक पहुंचाया जाता है.

अब इसी व्यवस्था में इलेक्ट्रिक ट्रकों को शामिल किया जा रहा है. कंपनी के मुताबिक, यह पहल कंटेनरों की आवाजाही के लिए भारत के सबसे बड़े ट्रक बेड़ों में से एक का हिस्सा है. हालांकि, इलेक्ट्रिक ट्रकों की सटीक संख्या और उनकी परिचालन क्षमता के बारे में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है.

इस बदलाव से माल ढुलाई के पारंपरिक तरीके में नई तकनीक को जगह मिलेगी. साथ ही, इलेक्ट्रिक वाहनों के जरिए नियमित डिलीवरी सेवाएं चलाने की संभावनाओं को भी परखा जा सकेगा.

CMA CGM बनी पहली शिपिंग कंपनी

इस नई व्यवस्था का इस्तेमाल शुरू करने वाली पहली शिपिंग लाइन CMA CGM है. इलेक्ट्रिक ट्रकों की शुरुआत के मौके पर आयोजित फ्लैग-ऑफ समारोह में इसी कंपनी के कंटेनरों की पहली खेप को रवाना किया गया. इसके साथ ही दोनों कंपनियों की साझेदारी के तहत इलेक्ट्रिक ट्रकों से कंटेनर पहुंचाने का काम शुरू हो गया.

इस सहयोग में अडानी लॉजिस्टिक्स का देश के भीतर माल परिवहन का नेटवर्क और CMA CGM का अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कारोबार एक साथ काम करेंगे. इसका उद्देश्य कंटेनर परिवहन की मौजूदा व्यवस्था में इलेक्ट्रिक वाहनों को जोड़ना और ग्राहकों तक सामान पहुंचाने की प्रक्रिया को सुचारु बनाए रखना है.

प्रदूषण कम करने में मिल सकती है मदद

डीजल से चलने वाले ट्रकों के मुकाबले इलेक्ट्रिक ट्रकों का एक बड़ा फायदा यह है कि चलते समय उनसे टेलपाइप के जरिए धुआं नहीं निकलता. इससे उन सड़कों और औद्योगिक इलाकों में स्थानीय वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है, जहां भारी वाहनों की आवाजाही ज्यादा रहती है.

हालांकि, इलेक्ट्रिक ट्रकों को अपनाने से कुल कार्बन उत्सर्जन कितना घटेगा, यह कई बातों पर निर्भर करता है. इनमें सबसे अहम है कि ट्रकों को चार्ज करने के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली किस स्रोत से तैयार की जा रही है. बिजली अगर कोयले जैसे जीवाश्म ईंधन से बड़े पैमाने पर बनती है, तो उत्सर्जन में कमी का कुल फायदा सीमित हो सकता है.

इलेक्ट्रिक माल ढुलाई के सामने क्या हैं चुनौतियां?

इलेक्ट्रिक ट्रकों को रोजमर्रा की माल ढुलाई में शामिल करना केवल वाहन बदलने तक सीमित नहीं है. इसके लिए पर्याप्त चार्जिंग सुविधाएं, बैटरी की क्षमता, तय दूरी तक चलने की योग्यता और डिलीवरी के समय का सही तालमेल जरूरी है. कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ट्रकों को चार्ज करने के कारण सामान पहुंचाने में देरी न हो और ग्राहकों को पहले की तरह भरोसेमंद सेवा मिलती रहे.

तुम्ब के इनलैंड कंटेनर डिपो से शुरू हुई यह पहल गुजरात में कम उत्सर्जन वाली माल ढुलाई की दिशा में एक कदम है. इससे यह भी संकेत मिलता है कि लॉजिस्टिक्स और शिपिंग क्षेत्र की कंपनियां परिवहन को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए नई तकनीकों पर काम कर रही हैं.

यह भी पढ़ें:  दिवाली से पहले किसानों की बल्ले-बल्ले! महाराष्ट्र सरकार खाते में भेजेगी 5,000 रुपये, 305 तहसीलों को बड़ा तोहफा

भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

Recent Posts

मेरठ में STF का एक्शन, कुख्यात गटारू गैंग से जुड़े 4 आरोपी दबोचे गए

UP News: मेरठ के सोतीगंज इलाके में यूपी STF और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई…

9 hours ago

सरदार पटेल की जयंती पर दिल्ली में राष्ट्रीय एकता का महाआयोजन, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिया बड़ा संदेश

दिल्ली के पंजाबी बाग में सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर आयोजित भव्य कार्यक्रम…

9 hours ago