भारत में AI की बढ़ती मांग
AI Adoption in India: एक दौर था जब इंसान की बुनियादी जरूरतों की चर्चा रोटी, कपड़ा और मकान से होती थी. फिर इंटरनेट और स्मार्टफोन ने रोजमर्रा की जिंदगी में अपनी जगह बनाई. अब 2026 में एक और बदलाव तेजी से दिखाई दे रहा है. AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस धीरे-धीरे जरूरत से आगे बढ़कर एक जरूरी स्किल बनता जा रहा है.
भारत में AI का इस्तेमाल अब सिर्फ टेक कंपनियों या इंजीनियरों तक सीमित नहीं है. पढ़ाई, नौकरी, कारोबार, कंटेंट, कोडिंग, डिजाइन, रिसर्च और यहां तक कि रोजमर्रा के सवालों के जवाब तलाशने में भी लोग AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं.
AI की पहुंच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने फरवरी 2026 में बताया था कि भारत में ChatGPT के 10 करोड़ साप्ताहिक सक्रिय यूजर्स हैं. इससे भारत दुनिया के सबसे बड़े AI बाजारों में शामिल हो गया है.
यानी AI अब सिर्फ प्रयोग करने वाली तकनीक नहीं रह गया है. करोड़ों लोगों के लिए यह पढ़ाई, काम और जानकारी हासिल करने का रोजाना का डिजिटल टूल बन रहा है.
AI का इस्तेमाल दुनिया भर में भी बेहद तेजी से बढ़ा है. Stanford AI Index 2026 के मुताबिक, जनरेटिव AI ने केवल तीन साल में वैश्विक आबादी के 53 प्रतिशत तक पहुंच बना ली. यह रफ्तार PC और इंटरनेट के शुरुआती प्रसार से भी तेज रही है.
AI की कहानी सिर्फ यूजर्स की संख्या बढ़ने तक सीमित नहीं है. कंपनियां भी इस तकनीक पर भारी निवेश कर रही हैं.
भारत में 2026 के Autodesk AI Pulse Report के मुताबिक, 91 प्रतिशत भारतीय संगठनों ने पिछले एक साल में AI पर अपना निवेश बढ़ाया. 63 प्रतिशत संगठनों में AI असिस्टेंट और चैटबॉट जैसे टूल्स का इस्तेमाल हो रहा है.
दूसरी तरफ, भारतीय कंपनियां AI के लिए बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार कर रही हैं. HCLTech ने ओडिशा में AI डेटा सेंटर के लिए करीब 1.48 अरब डॉलर यानी लगभग 14,000 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है. कंपनी इसके साथ 5,000 सीटों वाला टेक हब भी बनाएगी.
इससे साफ है कि AI पर खर्च केवल सॉफ्टवेयर खरीदने तक सीमित नहीं है. डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग पावर, क्लाउड, चिप्स, मॉडल और AI टैलेंट पूरी अर्थव्यवस्था इसके इर्द-गिर्द विकसित हो रही है.
वैश्विक स्तर पर जनरेटिव AI का बाजार 2025 में करीब 103.6 अरब डॉलर आंका गया था. 2026 में इसके करीब 161 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.
कॉरपोरेट खर्च में भी जबरदस्त उछाल आया है. Menlo Ventures के अनुमान के मुताबिक, कंपनियों ने 2025 में जनरेटिव AI पर करीब 37 अरब डॉलर खर्च किए, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 11.5 अरब डॉलर था. यानी एक साल में खर्च करीब 3.2 गुना बढ़ गया.
भारत में भी कंपनियों के लिए अगला सवाल अब यह नहीं है कि AI अपनाना है या नहीं. सवाल यह है कि AI से वास्तविक कमाई और उत्पादकता कितनी बढ़ाई जा सकती है.
एक हालिया अध्ययन के मुताबिक, भारत की 80 प्रतिशत कंपनियां ग्रोथ के लिए AI और टेक्नोलॉजी में निवेश कर रही हैं, लेकिन केवल 12 प्रतिशत कंपनियां इन निवेशों से मिलने वाले रिटर्न को प्रभावी ढंग से माप पा रही हैं.
भारत में AI का इस्तेमाल बहुत बड़ा है, लेकिन पेड सब्सक्रिप्शन में बदलने की दर अभी उतनी बड़ी नहीं है. यही वजह है कि AI कंपनियां भारतीय बाजार के लिए सस्ते प्लान, फ्री ट्रायल और स्थानीय ऑफर ला रही हैं.
OpenAI ने भारत में ChatGPT Go जैसा कम कीमत वाला सब्सक्रिप्शन प्लान लॉन्च किया, जिसका उद्देश्य ज्यादा लोगों को पेड AI सुविधाओं तक पहुंच देना है.
भारत में ChatGPT, Gemini और Claude जैसे प्लेटफॉर्म के बीच प्रतिस्पर्धा भी तेज हो रही है. हालिया Sensor Tower डेटा के आधार पर रिपोर्टों में ChatGPT को यूजर खर्च में आगे बताया गया है, जबकि Gemini तेजी से अपनी पहुंच बढ़ा रहा है और Claude की ग्रोथ भी तेज है.
यानी AI कंपनियों के लिए भारत सिर्फ यूजर्स की संख्या का बाजार नहीं है. अब अगली लड़ाई यह है कि इन करोड़ों यूजर्स को कितने समय तक जोड़ा रखा जाए और कितने यूजर्स को भुगतान करने वाला ग्राहक बनाया जाए.
AI की पहली लहर में लोग पूछ रहे थे. ChatGPT क्या कर सकता है? हालांकि, अब सवाल बदल रहा है. AI मेरे लिए क्या काम कर सकता है?
कंपनियां AI को ईमेल लिखने या कंटेंट बनाने से आगे ले जाकर कस्टमर सर्विस, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, डेटा एनालिसिस, मार्केटिंग, वित्तीय काम और बिजनेस प्रोसेस में जोड़ रही हैं.
भारत का IT सेक्टर भी इस बदलाव के बीच खड़ा है. Reuters की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, देश का करीब 315 अरब डॉलर का IT सर्विस सेक्टर AI की वजह से अपने पुराने बिजनेस मॉडल में बदलाव कर रहा है. कंपनियों से अब केवल कर्मचारियों के घंटे बेचने के बजाय उत्पादकता और परिणाम देने की उम्मीद बढ़ रही है.
इसका मतलब यह भी है कि आने वाले समय में केवल डिग्री या अनुभव काफी नहीं होगा. यह सवाल ज्यादा महत्वपूर्ण होगा कि कोई व्यक्ति AI को अपने काम में कितनी अच्छी तरह इस्तेमाल कर सकता है.
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जवाब है संभवतः हां. लेकिन AI स्किल का मतलब हर व्यक्ति का प्रोग्रामर बनना नहीं है. एक शिक्षक के लिए AI का मतलब बेहतर स्टडी मटेरियल तैयार करना हो सकता है. पत्रकार के लिए रिसर्च और डेटा विश्लेषण. कारोबारी के लिए मार्केटिंग और ग्राहक समझना. छात्र के लिए सीखने का व्यक्तिगत सहायक. डॉक्टर, वकील, इंजीनियर और डिजाइनर के लिए यह काम की गति बढ़ाने वाला टूल बन सकता है.
यानी भविष्य में प्रतिस्पर्धा शायद AI बनाम इंसान की नहीं होगी, बल्कि AI का इस्तेमाल करने वाले इंसान बनाम AI का इस्तेमाल न करने वाले इंसान की होगी.
भारत के सामने सबसे बड़ा मौका भी यही है. देश के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादियों में से एक, विशाल डिजिटल यूजर बेस और तेजी से बढ़ता टेक सेक्टर है. अगर AI की पहुंच के साथ-साथ AI की समझ और स्किल भी तेजी से बढ़ती है, तो यह केवल एक नई तकनीक नहीं बल्कि भारत की अगली आर्थिक छलांग का आधार बन सकती है. रोटी, कपड़ा और मकान के बाद शायद अगली जरूरी चीज कोई वस्तु नहीं, बल्कि एक क्षमता होगी. AI को समझने और उससे काम कराने की क्षमता.
-भारत एक्सप्रेस
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