Chabahar Port India investment crisis: अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों ने ईरान के साथ-साथ भारत के रणनीतिक(India Iran Relations) ठिकानों को झकझोर कर रख दिया है. दरअसल अमेरिकी-इजरायली ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ में चाबहार बंदरगाह शहर को निशाना बनाया गया है. यह वही स्थान है जहां भारत एक अहम टर्मिनल का ऑपरेट कर रहा है. ईरानी मीडिया मेहर न्यूज के अनुसार, शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल पर भारी क्षति हुई है, जहाज डूबे और इंफ्रास्ट्रक्चर तबाह हो गया है. जिसके चलते भारत के कुल 120 मिलियन डॉलर के इनवेस्टमेंट पर पानी फिर गया है.
बताते चलें कि अमेरिका और भारत के बीच चाबहार पोर्ट को लेकर लंबे समय से तनाव चल रहा है. ईरान में स्थित यह बंदरगाह भारत के लिए पाकिस्तान बायपास रूट और मध्य एशिया तक पहुंच का द्वार है, जिसमें भारत ने 120 मिलियन डॉलर का निकेश किया हुआ है. लेकिन अमेरिका इसे ईरान को मजबूत करने का जरिया मानता है.
भारत ने 2024 में ईरान के साथ 10 साल का लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था, जिसके तहत इंडियन पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) ने शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के विकास-ऑपरेशन के लिए 120 मिलियन डॉलर (लगभग 1000 करोड़ रुपये) का निवेश किया था.
इसके अलावा 250 मिलियन डॉलर का लाइन ऑफ क्रेडिट और क्रेन-उपकरणों पर 500 करोड़ खर्च मिलाकर कुल 370 मिलियन डॉलर से ज्यादा का इनवेस्टमेंट था. बता दें कि यह यह INSTC कॉरिडोर का गेटवे था जिसके जरिए भारत अफगानिस्तान में 2.5 मिलियन टन गेहूं भेज चुका है. लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों (जोकि अप्रैल 2026 तक खत्म होने थे) और अब हमले ने सब बर्बाद कर दिया है.
ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान में छिपा चाबहार बंदरगाह भारत की रणनीतिक आँखों का तारा था. पाकिस्तान के ग्वादर से महज 100 किमी दूर, ये ओमान की खाड़ी में पाक बायपास का मास्टरस्ट्रोक साबित हो रहा था जोकि बिना इस्लामाबाद की काली परछाईं के अफगानिस्तान, उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान तक 7200 किमी छोटा रास्ता बनाता था. यही नहीं चाबहार चीन के CPEC को काउंटर करने का हथियार था.
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भारत के लिए ये जो हालात बन रहे हैं, वो कोई छोटी-मोटी खबर नहीं बल्कि ये तो पूरा रणनीतिक भूकंप है! सिर्फ आर्थिक नुकसान की बात नहीं, बल्कि हमारी पूरी सुरक्षा और भविष्य की राह बंद हो रही है. इस पोर्ट को ज्यादा नुकसान पहुंचा तो अफगानिस्तान में तालिबान से सीधा संपर्क करना पाकिस्तान के बिना अब लगभग नामुमकिन हो जाएगा. मतलब हमारा वो पुराना प्लान, जो पाकिस्तान को बायपास करके अफगानिस्तान तक पहुंचता था, वो अब अटक जाएगा. और सबसे बड़ा खतरा होर्मुज स्ट्रेट से है. ईरान अगर वहाँ कंट्रोल सख्त कर दे, तो तेल का संकट आ सकता है.
बता दें कि भारत तो 85% तेल बाहर से मंगवाता है वैकल्पिक रास्ते जैसे हाइफा पोर्ट भी बहुत महंगे और लंबे हैं, रोज-रोज इस्तेमाल करना अफोर्ड ही नहीं हो पाएगा. इसका नतीजा चीन को खुस करने वाला होगा क्योंकि उसका ग्वादर पोर्ट और मजबूत हो जाएगा, पूरा इलाका उसकी गिरफ्त में आ जाएगा .
सबसे बुरा तो डिप्लोमेसी का ये फंदा है कि भारत अब पूरी तरह फंस गया है. अमेरिका का साथ दो तो ट्रंप टैरिफ थोप देंगे और इकोनॉमी पर भारी बोझ पड़ जाएगा, वहीं ईरान से दूरी बना लो तो क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ जाएगा और पाकिस्तान-चीन की ताकत और बढ़ जाएगी. मतलब हर तरफ से घेराबंदी, न कोई रास्ता आसान बचा है, न कोई फैसला बिना नुकसान के! ये सिर्फ एक देश की समस्या नहीं, हमारी आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा और विकास की राह पर बड़ा ताला है.
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-भारत एक्सप्रेस
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