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खामेनेई की हत्या के पीछे किसकी बड़ी साजिश? सऊदी कनेक्शन पर वाशिंगटन पोस्ट का सनसनीखेज दावा

वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में दावा है कि सऊदी क्राउन प्रिंस ने डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर हमले के लिए कई बार फोन किया. रिपोर्ट के मुताबिक हमले की टाइमिंग और खामेनेई की हत्या को लेकर साजिश की आशंका जताई गई है…

Khamenei assassination Saudi role report: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या की खबरों के बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. दरअसल वाशिंगटन पोस्ट ने अमेरिकी सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान(Mohammed bin Salman) ने ही अमेरिका को ईरान पर हमले के लिए उकसाया था. रिपोर्ट में दावा है कि क्राउन प्रिंस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कई बार फोन कर कहा कि हमले का यही सबसे मुफीद वक्त है.

सऊदी क्राउन प्रिंस ने ट्रंप को किये कई बार फोन

रिपोर्ट के अनुसार, जब ईरान और अमेरिका के बीच समझौते को लेकर बातचीत चल रही थी, तब सऊदी क्राउन प्रिंस ने ट्रंप को कई बार फोन किया. उन्होंने कहा कि अगर अभी हमला नहीं किया गया तो तेहरान आने वाले वक्त में और ज्यादा मजबूत हो जाएगा. ऐसे में भविष्य में उस पर हमला करना आसान नहीं होगा. सऊदी का कहना था कि अगर अमेरिका हमला नहीं करेगा तो ईरान सऊदी के तेल ठिकानों को निशाना बना सकता है. एक्सियोस ने जनवरी 2026 में एक रिपोर्ट में भी बताया था कि सऊदी के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने व्हाइट हाउस का दौरा किया और ईरान पर हमला करने के लिए कहा.

खामेनेई की हत्या के पीछे बड़ी साजिश?

रिपोर्ट में पहला बड़ा खुलासा खामेनेई(Ayatollah Ali Khamenei) की हत्या की टाइमिंग को लेकर है. बता दें कि अमेरिका ने उन्हें उस वक्त मारा, जब वे अपने 2 वफादार अली शमखानी (सलाहकार) और मोहम्मद पाकपूर (IRGC प्रमुख) से मुलाकात कर रहे थे. वहीं दूसरा खुलासा साजिश को लेकर है कि सऊदी के इशारे पर खामेनेई की हत्या हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसी इस हमले के पक्ष में नहीं थी, लेकिन सऊदी क्राउन प्रिंस ने ट्रंप को मनाया. हालांकि सऊदी ने आधिकारिक तौर पर इसको लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

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सऊदी-ईरान की सालों पुरानी दुश्मनी

दरअसल ईरान में इस्लामिक गणराज्य के आने के बाद से ही सऊदी अरब की तेहरान से ठन गई थी. ईरान जब इराक से लड़ा रहा था, तब सऊदी ने इराक को फंड और हथियार दिए. बताते चलें कि 1988 में हज के दौरान ईरान के नागरिक और सऊदी सुरक्षाबलों में झड़प का भी मामला सामने आया. इस दौरान 400 हजयात्री मारे गए, जिसमें अधिकांश नागरिक ईरान के ही थे. इसके बाद ईरान ने सऊदी से अपनी दोस्ती आधिकारिक रूप से खत्म कर ली थी.

इसके अलावा सऊदी और ईरान के बीच मिडिल ईस्ट में दबदबे को लेकर लड़ाई होती रही है. सऊदी में सुन्नी और वहाबी मुसलमान रहते हैं, जबकि ईरान शिया बहुल देश है. सऊदी से तनातनी में ईरान ने यमन, लेबनान और सीरिया जैसे देशों पर प्रॉक्सी और सत्ता साझेदारों के जरिए कंट्रोल कर लिया, जिसके चलते सऊदी का तेल व्यापार खतरे में पड़ गया. तेल के व्यापार में हुए इस समझौते के कारण सऊदी लंबे वक्त से ईरान शासन को सबक सिखाना चाहता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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