E20 Petrol: देश में एथेनॉल-मिश्रित E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच एक नया विवाद सामने आया है. केंद्र सरकार ने संसद में स्वीकार किया है कि फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) ने एथेनॉल बनाने वाली प्राइवेट कंपनियों को भारी घाटे पर चावल बेचा है. सरकार की औसत खरीद लागत की तुलना में कंपनियों को लगभग 40 फीसदी कम कीमत पर लाखों टन चावल उपलब्ध कराया गया है.
केंद्र सरकार ने संसद में माना है कि FCI ने पिछले एक साल में एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों को ₹14,596 करोड़ का 6.35 मिलियन टन चावल 40% घाटे पर बेचा है. खरीद लागत ₹3,720–3,889 प्रति क्विंटल होने के बावजूद कंपनियों को यह ₹2,250- 2,320 में दिया गया, जिसका सबसे ज्यादा फायदा हरियाणा और यूपी की डिस्टीलरीज को मिला. सरकार इसे ओपन मार्केट सेल बता रही है, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार यह एथेनॉल कंपनियों को दी जा रही अप्रत्यक्ष सब्सिडी है.
राज्यसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमूबेन जयंतीभाई बांभनिया ने बताया कि FCI ने जून 2025 से जून 2026 के बीच एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों को 2,250 से 2,320 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर चावल बेचा. जबकि इस दौरान कॉर्पोरेशन की औसत खरीद लागत ही 3,720 से 3,889 रुपये प्रति क्विंटल थी. इस तरह एथेनॉल डिस्टीलरीज को लगभग 40% की भारी छूट पर चावल मुहैया कराया गया.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 12 महीनों में FCI के गोदामों से एथेनॉल प्लांट्स को कुल 6.35 मिलियन टन चावल भेजा गया, जिसकी कुल वैल्यू 14,596.78 करोड़ रुपये थी. इस योजना में सबसे ज्यादा फायदा हरियाणा की एथेनॉल डिस्टीलरीज ने उठाया, जिन्हें 844,141 टन चावल मिला. इसके बाद उत्तर प्रदेश (838,645 टन), पंजाब-हिमाचल प्रदेश (658,952 टन), पश्चिम बंगाल (584,672 टन) और मध्य प्रदेश (432,485 टन) का नंबर रहा.
हालांकि सरकार का कहना है कि एथेनॉल प्रोड्यूसर्स को कोई प्रत्यक्ष सब्सिडी नहीं दी जा रही है और उन्हें ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत तय दरों पर चावल बेचा गया है. लेकिन कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खरीद और इकोनॉमिक कॉस्ट से बेहद कम दाम पर चावल बेचना एक तरह की अप्रत्यक्ष सब्सिडी ही है. अगर इसे बजट में अलग से नहीं दिखाया जाता, तो इसका पूरा बोझ देश के फूड सब्सिडी बिल पर ही पड़ेगा.
सरकार ने आगे के लिए भी कीमतें तय कर दी हैं. नवंबर 2025 से अक्टूबर 2026 तक चावल की कीमत 2,320 रुपये और उसके बाद जून 2027 तक 2,390 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है. सरकार की योजना 2026-27 एथेनॉल सप्लाई ईयर में एफसीआई के स्टॉक से लगभग 7.2 मिलियन टन चावल बेचने की है, जिसकी बाजार वैल्यू करीब 23,900 रुपये प्रति टन होगी, जबकि इसकी वास्तविक इकोनॉमिक कॉस्ट लगभग 43,100 रुपये प्रति टन बैठती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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