Jyotindra Dubey
जिस कारोबारी ने पर्सनल केयर और हेल्थकेयर सेक्टर की एक सुस्त कंपनी ‘क्यूपिड’ (Cupid) का कायापलट कर उसे दलाल स्ट्रीट का सबसे चर्चित मल्टीबैगर स्टॉक बना दिया, उसी दिग्गज निवेशक ने अब अपनी अगली पारी के लिए संकट से उबर रही ज्वैलरी कंपनी पीसी ज्वैलर (PC Jeweller Ltd) को चुना है. क्यूपिड लिमिटेड के प्रमोटर व प्रमुख चेहरे आदित्य कुमार हलवासिया ने एक बड़ी बल्क डील के जरिए पीसी ज्वैलर में 5.10 करोड़ शेयर खरीदे हैं. यह सौदा ₹14.43 प्रति शेयर के भाव पर हुआ है, जिसकी कुल अनुमानित लागत लगभग ₹73.59 करोड़ बैठती है.
बाजार में जोरदार स्वागत: 14% उछलकर 52-वीक हाई पर पहुंचा शेयर
इस सौदे की खबर सामने आते ही शेयर बाजार ने तुरंत सकारात्मक प्रतिक्रिया दी. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर पीसी ज्वैलर का शेयर गुरुवार की सुबह बढ़त के साथ ₹15.06 पर खुला और बाजार खुलने के चंद मिनटों के भीतर ₹15.89 का इंट्रा-डे स्तर छू गया. इसके बाद खरीदारी की रफ्तार तेज हुई और शेयर ₹16.45 के नए 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर (52-week High) तक पहुंच गया, जो करीब 14 प्रतिशत की भारी इंट्रा-डे बढ़त थी. बीते छह महीनों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो यह स्टॉक अब तक करीब 50 प्रतिशत का शानदार रिटर्न दे चुका है.
दिग्गज निवेशक आदित्य कुमार हलवासिया ने 15 अक्टूबर को करीब ₹73.59 करोड़ की बल्क डील के जरिए 5.10 करोड़ शेयर खरीदे हैं, जिससे शेयर बाजार में इस टर्नअराउंड को लेकर नई उम्मीदें जाग गई हैं.
शेयर बाजार में आदित्य हलवासिया की साख मुख्य रूप से क्यूपिड लिमिटेड के असाधारण Turnaround पर टिकी है:
कंट्रोलिंग स्टेक और रणनीतिक बदलाव: साल 2023 के अंत में यूनिवर्सल-हलवासिया ग्रुप ने क्यूपिड में 41.84 प्रतिशत की नियंत्रक हिस्सेदारी (Controlling Stake) हासिल की थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 43.28 प्रतिशत किया गया. इसके बाद कंपनी ने अपने पारंपरिक कारोबार से आगे निकलकर कंज्यूमर हेल्थकेयर और एफएमसीजी (FMCG) उत्पादों में आक्रामक विस्तार किया.
वित्तीय नतीजों में दिखा असर: इस रणनीतिक बदलाव का नतीजा यह रहा कि साल 2025 में क्यूपिड के शेयर ने लगभग 480 प्रतिशत की ऐतिहासिक छलांग लगाई.
हालिया वित्तीय आंकड़े: वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में क्यूपिड का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 194 प्रतिशत बढ़कर ₹44.15 करोड़ पहुंच गया, जबकि कुल आय 142 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹156.98 करोड़ रही. इस दौरान कंपनी का EBITDA मार्जिन 28 प्रतिशत से सुधरकर 39 प्रतिशत हो गया. हलवासिया ने अगस्त और सितंबर 2026 में भी खुले बाजार से लगातार शेयर खरीदकर अपनी व्यक्तिगत हिस्सेदारी को 33.92 प्रतिशत तक पहुंचा दिया था.
पीसी ज्वैलर: संकट के दौर से उबरने और कर्जमुक्ति का सफर
पीसी ज्वैलर का इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है. साल 2018 में कॉर्पोरेट गवर्नेंस और प्रमोटर द्वारा रिश्तेदारों को शेयर ट्रांसफर करने से जुड़े विवादों के चलते कंपनी का मार्केट कैप बुरी तरह ध्वस्त हो गया था. इसके बाद से कंपनी लगातार अपने बहीखाते (Balance Sheet) को दुरुस्त करने की मशक्कत में जुटी रही.
अब कंपनी के बुनियादी ढांचे में सकारात्मक सुधार के संकेत मिल रहे हैं:
कर्जमुक्त स्थिति (Debt-Free): कंपनी ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों का पुराना कर्ज चुकता कर खुद को पूरी तरह ‘कर्जमुक्त’ घोषित कर दिया है, जिससे उसका ब्याज खर्च न्यूनतम हो गया है.
मजबूत वित्तीय प्रदर्शन: वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (Q2 FY27) में कंपनी ने अपने समेकित राजस्व में सालाना आधार पर करीब 28 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि के संकेत दिए हैं. इससे पहले दिसंबर 2025 की तिमाही में भी कंपनी का शुद्ध लाभ 28.48 प्रतिशत बढ़कर ₹190.10 करोड़ रहा था.
फंसी नकदी की वापसी: कंपनी ने विदेशों में अटके करीब ₹142 करोड़ के निर्यात बकाए (Export Receivables) की वसूली की पुष्टि की है, जिससे कंपनी की लिक्विडिटी और कार्यशील पूंजी में बड़ा सुधार आया है.
माइक्रो-एंटरप्रेन्योर मॉडल: राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) के साथ मिलकर कंपनी ने अगले पांच वर्षों में ‘पीसी ज्वैलर’ ब्रांड के तहत 2,00,000 माइक्रो-उद्यमियों को जोड़ने का महत्वाकांक्षी समझौता (MoU) किया है.
यदि क्यूपिड के मॉडल को एक ब्लूप्रिंट माना जाए, तो विश्लेषकों का ध्यान मुख्य रूप से तीन बातों पर रहेगा— परिचालन दक्षता में सुधार, राजस्व के नए स्रोतों का सृजन और कंपनी के प्रबंधन व नीतियों में हलवासिया की संभावित बढ़ती भूमिका.
हालांकि, मौजूदा नियामकीय खुलासों में इस बात की कोई पुष्टि नहीं की गई है कि हलवासिया केवल एक पोर्टफोलियो निवेशक बने रहेंगे या भविष्य में बोर्ड और प्रबंधन में कोई बड़ी सक्रिय भूमिका निभाएंगे. उनके आगामी इरादे अभी स्पष्ट होना बाकी हैं.
बाजार जानकारों का मानना है कि कर्जमुक्ति से कंपनी की वित्तीय लागत तो घटी है, लेकिन लंबी अवधि में कंपनी का मुनाफा इस बात पर निर्भर करेगा कि आगामी तिमाहियों में ज्वैलरी की वास्तविक बिक्री और मार्जिन में कितना सुधार होता है. तात्कालिक तेजी भले ही बल्क डील की चर्चाओं और सेंटिमेंट के बूते आई हो, लेकिन क्यूपिड का अनुभव यह भी सिखाता है कि किसी प्रमोटर का भरोसा शेयर को शुरुआती उड़ान जरूर दे सकता है, लेकिन ऊंचे स्तरों पर स्थिरता तभी बनी रहती है जब कंपनी के नतीजे उस उम्मीद पर खरे उतरें.
आगामी तिमाही नतीजे ही यह तय करेंगे कि क्या ‘टर्नअराउंड किंग’ के रूप में जाने जाने वाले हलवासिया का यह नया दांव भी क्यूपिड की तरह एक नया इतिहास रच पाएगा या नहीं.
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