प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसानों पर विशेष ध्यान देने और उनकी स्थिति सुधारने के प्रयासों से कृषि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव आया है. किसान अब नई तकनीकों का उपयोग कर जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं और उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार कर रहे हैं. इसका प्रभाव न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी देखा जा रहा है. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत के कृषि निर्यात में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है और कई उत्पाद पहली बार अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहुंचे हैं.
यह ऐतिहासिक विस्तार केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, यह किसानों को सशक्त बनाने, ग्रामीण आय बढ़ाने और भारत की समृद्ध कृषि विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का भी माध्यम है. पारंपरिक अनाज से लेकर दुर्लभ फलों तक, ये ऐतिहासिक निर्यात प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार कर रहे हैं और भारतीय किसानों के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं. मोदी सरकार के कार्यकाल में हुए कुछ महत्वपूर्ण कृषि निर्यात इस प्रकार हैं:
भारत ने पहली बार समुद्री मार्ग से प्रीमियम ‘सांगोला’ और ‘भगवा’ अनार की खेप ऑस्ट्रेलिया भेजकर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की. इस सफलता से ऑस्ट्रेलियाई बाजार में भारतीय ताजे फलों की पहुंच आसान हुई है और अन्य भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है.
2024 में, मोदी सरकार ने भारत के पहले तैयार-से-पीने वाले अंजीर जूस का पोलैंड को निर्यात सुगम किया, जो कि महाराष्ट्र के GI-टैग प्राप्त पुरंदर अंजीर से बना था. इससे पहले 2022 में इस जूस का निर्यात जर्मनी को भी किया गया था. पुरंदर अंजीर अपनी विशेष स्वाद और बनावट के लिए प्रसिद्ध हैं और यह उपलब्धि भारत के अनूठे कृषि उत्पादों को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने में एक महत्वपूर्ण कदम है.
भारत ने अपने फलों के निर्यात को विविधता देने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए 2021 में लंदन और बहरीन को ड्रैगन फ्रूट (जिसे स्थानीय रूप से ‘कमलम’ कहा जाता है) का निर्यात किया. लंदन भेजी गई खेप गुजरात के कच्छ क्षेत्र के किसानों से ली गई थी, जबकि बहरीन भेजे गए ड्रैगन फ्रूट पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के किसानों से प्राप्त हुए थे.
2023 में भारत ने पहली बार अमेरिका को ताजे अनार की एक परीक्षण खेप हवाई मार्ग से निर्यात की. महाराष्ट्र का ‘भगवा’ अनार अत्यधिक निर्यात क्षमता रखता है और देश से होने वाले कुल अनार निर्यात का लगभग 50% महाराष्ट्र के सोलापुर जिले से होता है.
पूर्वोत्तर भारत को वैश्विक कृषि व्यापार मानचित्र पर लाने की दिशा में 2021 में असम के ‘लेटेकु’ (बर्मी अंगूर) फल की पहली खेप गुवाहाटी से दुबई भेजी गई. यह निर्यात असम के दुर्लभ कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने में एक महत्वपूर्ण कदम था.
2021 में पहली बार त्रिपुरा से जर्मनी को ताजे कटहल की खेप हवाई मार्ग से भेजी गई. यह निर्यात मोदी सरकार की उन निरंतर प्रयासों को दर्शाता है, जो पूर्वोत्तर राज्यों को कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के वैश्विक निर्यात में शामिल करने के लिए किए जा रहे हैं.
2021 में पहली बार नागालैंड की GI-टैग प्राप्त ‘राजा मिर्च’ (किंग चिली) को हवाई मार्ग से गुवाहाटी होते हुए लंदन भेजा गया. अत्यधिक नाजुक और खराब होने की प्रवृत्ति रखने वाले इस उत्पाद का निर्यात एक बड़ी उपलब्धि थी, जिससे भारत की विशेष कृषि निर्यात क्षमता उजागर हुई.
2021 में, भारत ने पहली बार असम के ब्रह्मपुत्र घाटी में उगाए जाने वाले लोहे से भरपूर ‘लाल चावल’ (बाओ-धान) की खेप अमेरिका भेजी. इस चावल की खेती बिना किसी रासायनिक उर्वरक के की जाती है और यह असम के पारंपरिक भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
2022 में भारत ने पहली बार GI टैग प्राप्त ‘वझक्कुलम अनानास’ की खेप केरल के वझक्कुलम, एर्नाकुलम से दुबई और शारजाह, UAE को भेजी. इस निर्यात से अनानास किसानों को बेहतर आय प्राप्त होगी और उनके उत्पाद को वैश्विक बाजार में बढ़ावा मिलेगा.
मोदी सरकार के नेतृत्व में भारत की कृषि निर्यात क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. ये उपलब्धियां न केवल भारतीय किसानों को वैश्विक बाजारों से जोड़ रही हैं बल्कि भारत के कृषि उत्पादों की गुणवत्ता और विविधता को भी विश्व स्तर पर स्थापित कर रही हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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