(PC: IANS)
BRICS Trade: 18वें ब्रिक्स सम्मेलन से ठीक पहले भारतीय अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर एक बेहद उत्साहजनक रिपोर्ट सामने आई है. उद्योग मंडल एसोचैम (ASSOCHAM) के ग्लोबल रिसर्च एंड स्ट्रेटेजी सेंटर की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ भारत का कुल व्यापार पिछले पांच वर्षों में दोगुना से अधिक होकर 417 अरब डॉलर पर पहुंच गया है.
एसोचैम की “द राइज ऑफ ब्रिक्स नेशंस: एन अपॉर्च्युनिटी टू स्केल इंडियन एक्सपोर्ट्स टू 200 बिलियन डॉलर टू ब्रिक्स बाय 2030” शीर्षक वाली रिपोर्ट दर्शाती है कि ब्रिक्स समूह भारत के लिए सबसे अहम आर्थिक और रणनीतिक साझेदार के रूप में उभरा है. वित्त वर्ष 2020-21 में जहां यह व्यापार 203 अरब डॉलर था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह उछलकर 417 अरब डॉलर हो गया.
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में ब्रिक्स सदस्य देशों को भारत का निर्यात 96 अरब डॉलर दर्ज किया गया. एसोचैम का आकलन है कि यदि भारत दक्षिण-दक्षिण सहयोग को और अधिक मजबूती देता है तथा पारंपरिक पश्चिमी बाजारों से आगे बढ़कर नए उभरते क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है, तो वर्ष 2030 तक ब्रिक्स देशों को भारतीय निर्यात 200 अरब डॉलर के ऐतिहासिक आंकड़े को छू सकता है.
ब्रिक्स के हालिया विस्तार (ब्रिक्स प्लस) से भारतीय विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के लिए नए द्वार खुले हैं. रिपोर्ट में इन प्रमुख सेक्टरों में भारी संभावनाओं को रेखांकित किया गया है:
उत्पाद क्षेत्र: इंजीनियरिंग गुड्स, फार्मास्यूटिकल्स (दवा उद्योग), रसायन, वस्त्र एवं परिधान, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रत्न-आभूषण और खनिज व धातु.
भविष्य के क्षेत्र: कृषि एवं समुद्री उत्पाद, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल सेवाएं और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं.
एसोचैम का मानना है कि भारत के लिए अवसर केवल वस्तुओं के निर्यात तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैल्यू एडिशन, वैकल्पिक स्थानीय मुद्रा भुगतान प्रणालियों और मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं (Supply Chains) के निर्माण में भी बड़ी भूमिका है.
रिपोर्ट में इस बात पर विशेष बल दिया गया है कि भारत ने वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान लगातार 7 प्रतिशत से अधिक की औसत आर्थिक वृद्धि दर बनाए रखी है. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की दर से वृद्धि की है, जिससे भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है.
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा:
“ब्रिक्स के भीतर उभरती अर्थव्यवस्थाओं का बढ़ता प्रभुत्व यह साबित करता है कि नवाचार, लचीलापन और सहयोग के बल पर दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि पाई जा सकती है. सीमा-पार निवेश और व्यापार को बढ़ावा देने वाली पहलें उच्च-विकास वाले क्षेत्रों के लिए उत्प्रेरक का काम करेंगी.”
मौजूदा भू-राजनीतिक बदलावों के बीच ब्रिक्स देशों के साथ प्रगाढ़ होते आर्थिक संबंधों से भारत को महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals), ऊर्जा सुरक्षा, आधुनिक तकनीक और वैश्विक पूंजी तक आसान पहुंच मिलेगी.
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