Jio IPO: रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड अपना आईपीओ (IPO) लेकर आ रही है. कंपनी का यह इश्यू 21 अक्टूबर 2026 से निवेशकों के लिए खुलेगा और 23 अक्टूबर तक इसमें पैसा लगाने का मौका मिलेगा. माना जा रहा है कि जियो का यह आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ साबित हो सकता है. ऐसे में शेयर बाजार में दिलचस्पी रखने वाले निवेशकों की नजरें इस पर टिकी हुई हैं.
कंपनी ने 15 अक्टूबर को आईपीओ से जुड़ा रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल किया है. इसमें इश्यू की तारीखों से लेकर शेयरों की कीमत और निवेश की न्यूनतम रकम तक की जानकारी दी गई है.
जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने आईपीओ के लिए प्रति इक्विटी शेयर ₹1,065 से ₹1,119 का प्राइस बैंड तय किया है. यानी निवेशकों को इसी दायरे में शेयरों के लिए बोली लगानी होगी. कंपनी के प्रत्येक शेयर की फेस वैल्यू ₹10 रखी गई है.
अगर कोई निवेशक ऊपरी प्राइस बैंड यानी ₹1,119 प्रति शेयर के हिसाब से बोली लगाता है, तो उसे निवेश के लिए उसी कीमत को आधार बनाना होगा. हालांकि, आईपीओ में आवेदन करने से शेयरों का आवंटन सुनिश्चित नहीं होता. शेयर मिलने का फैसला आवेदन और आवंटन प्रक्रिया के नियमों के अनुसार होगा.
रिटेल निवेशकों के लिए जियो आईपीओ में आवेदन करना है, तो न्यूनतम बोली 12 शेयरों की रखी गई है. इसका मतलब है कि एक लॉट में 12 शेयर होंगे और निवेशक कम से कम एक लॉट के लिए आवेदन कर सकेंगे. इसके बाद 12 शेयरों के गुणक में बोली लगाई जा सकती है.
ऊपरी प्राइस बैंड ₹1,119 के हिसाब से देखें, तो 12 शेयर खरीदने के लिए कुल ₹13,428 की जरूरत होगी. यह न्यूनतम आवेदन राशि है, जबकि अधिक शेयरों के लिए आवेदन करने पर निवेश की रकम भी बढ़ जाएगी.
इसलिए निवेश करने से पहले अपनी आर्थिक स्थिति और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है.
कंपनी ने अपने पात्र कर्मचारियों के लिए भी खास सुविधा रखी है. कर्मचारी आरक्षण कोटे के तहत आवेदन करने वाले योग्य कर्मचारियों को प्रति शेयर ₹54 की छूट मिलेगी. इससे उन्हें निर्धारित प्राइस बैंड के मुकाबले कम कीमत पर शेयरों के लिए आवेदन करने का मौका मिलेगा.
हालांकि, इस छूट का लाभ उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जो कंपनी की तय पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं और कर्मचारी आरक्षण कोटे के तहत आवेदन करते हैं.
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ से जुड़ी अहम तारीखें इस प्रकार हैं:
एंकर निवेशक बड़े संस्थागत निवेशक होते हैं, जिन्हें आम निवेशकों के लिए इश्यू खुलने से पहले बोली लगाने का मौका दिया जाता है.
जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस इंडस्ट्रीज के डिजिटल और टेलीकॉम कारोबार से जुड़ी कंपनी है. इसके आईपीओ का आकार और बाजार में संभावित असर इसे निवेशकों के लिए एक अहम इश्यू बनाते हैं. हालांकि, सिर्फ बड़े आईपीओ होने के आधार पर निवेश का फैसला करना सही नहीं होगा.
निवेशकों को आवेदन करने से पहले कंपनी के प्रॉस्पेक्टस में दी गई वित्तीय जानकारी, जोखिम से जुड़ी शर्तों और आईपीओ की दूसरी जरूरी बातों को ध्यान से पढ़ना चाहिए. शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है, इसलिए किसी भी फैसले से पहले पूरी जानकारी हासिल करना जरूरी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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