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Budget 2023: ममता ने बजट को बताया अवसरवादी और जन विरोधी, जानिए विपक्षी दलों ने क्या कहा

Budget 2023:वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का अंतिम संपूर्ण बजट पेश किया. इस दौरान बजट में उन्होंने अलग-अलग सेक्टरों के लिए कई घोषाणाएं कीं. पीएम मोदी ने इस बजट की तारिप करते हुए कहा कि अमृत काल का पहला बजट विकसित भारत के विराट संकल्प को पूरा करने के लिए एक मजबूत नींव का निर्माण करेगा. ये बजट वंचितों को वरीयता देता है। ये बजट आज की आकांक्षी समाज, गांव, गरीब, किसान, मध्यम वर्ग सभी के सपनों को पूरा करेगा. वहीं विपक्ष के नेताओं ने इस बजट को लेकर निशाना साधा है.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्रीय बजट “पूर्णत: अवसरवादी” और “जन विरोधी” है. उन्होंने कहा कि गरीब वंचित रह जाएंगे और सिर्फ एक वर्ग के लोगों को इस बजट से फायदा होगा.

सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा कि ये चुनावी बजट है, किसानों के लिए कुछ नहीं है. किसानों की एमएसपी की बात नहीं की है. रेलवे को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है. आधी से ज्यादा आबादी गांव में बसती है लेकिन उनके लिए कुछ नहीं किया है. ये बहुत ही निराशाजनक बजट है.

RJD सांसद मनोज झा ने कहा कि मैंने वित्त मंत्री को कई बार कहा है कि जब भी बजट बनाए तो अनुच्छेद 39 को देख लें. संविधान से आंखें मूंद कर स्तुति गान वाला बजट बनाते हैं तो कुछ हासिल नहीं होगा. रोजगार के लिए आपने गोल-गोल बातें की. ये बजट खास लोगों का खास लोगों द्वारा खास तरह से बनाया बजट है.

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि बजट में कुछ चीजें अच्छी थी मैं इसे पूरी तरह नकारात्मक नहीं कहूंगा, लेकिन अभी भी कई सवाल उठते हैं. बजट में मनरेगा का कोई जिक्र नहीं था. सरकार मजदूरों के लिए क्या करने जा रही है? बेरोजगारी, महंगाई की बात भी नहीं की गई.

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि बजट में मध्यम वर्ग को मदद दी गई है, सबको कुछ न कुछ दिया गया है. डेढ़ घंटे तक हमने बजट सुना अब हम इसपर बात करेंगे जब मौका आएगा.

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बसपा प्रमुख मायावती ने केंद्रीय बजट पर अपनी प्रतिक्रिया में बुधवार को कहा कि लोग उम्मीदों के सहारे जीते हैं, लेकिन झूठी उम्मीदें क्यों? उन्होंने कहा कि बजट पार्टी से ज्यादा देश के लिए हो तो बेहतर होता है क्योंकि देश के 130 करोड़ गरीब, मजदूर, वंचित और किसान अपने अमृतकाल को तरस रहे हैं. उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षो में भी केन्द्र सरकार के बजट आते-जाते रहे जिसमें घोषणाओं, वादों, दावों व उम्मीदों की बरसात की जाती रही लेकिन मध्यम वर्ग महंगाई व बेरोजगारी के कारण निम्न मध्यम वर्ग बन गया हैं.

-भारत एक्सप्रेस

Bharat Express Desk

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