India Diesel-ATF Export
India Diesel-ATF Export: मंगलावार (16 जून) को सरकार ने नवीनतम समीक्षा में डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) में वृद्धि की है. यानी डीजल पर निर्यात शुल्क 13 रुपये पांच पैसे प्रति लीटर से बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. वहीं विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) निर्यात पर शुल्क 9 रुपये पांच पैसे प्रति लीटर से बढ़ाकर 12 रुपये पांच पैसे प्रति लीटर कर दिया गया है. जिसके बाद से यह चर्चा तेज हो गई है कि इस बढ़ाए गए शुल्क से सरकार के राजस्व में काफी बढ़ोतरी हो सकती है.
भारत डीजल का एक बड़ा निर्यातक देश है. वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 3.9 से 4 करोड़ टन डीजल का निर्यात किया, जिसका प्रमुख हिस्सा एशियाई और अफ्रीकी देशों को भेजा गया. भारत में स्थित बड़ी रिफाइनरियां, जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी, कच्चे तेल को रिफाइन कर डीजल तैयार करती हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचती हैं.
वहीं विमानन टरबाइन ईंधन (ATF) का निर्यात डीजल की तुलना में काफी कम होता है, लेकिन इसकी मात्रा भी हर साल लाखों टन में रहती है. एटीएफ मुख्य रूप से उन देशों को निर्यात किया जाता है जहां विमानन ईंधन की मांग अधिक है या स्थानीय उत्पादन पर्याप्त नहीं है.
भारत को डीजल और एटीएफ के निर्यात से हर साल अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है. केवल डीजल निर्यात से ही देश को लगभग 25-35 अरब डॉलर (करीब 2 से 3 लाख करोड़ रुपये) तक की आय हो सकती है, जबकि एटीएफ निर्यात से भी हजारों करोड़ रुपये की कमाई होती है. सरकार निर्यात पर लगाए गए विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) के जरिए भी राजस्व जुटाती है. जब वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतें बढ़ती हैं और रिफाइनिंग कंपनियों को अधिक मुनाफा होता है, तब सरकार इस अतिरिक्त लाभ का एक हिस्सा कर के रूप में वसूलती है. इससे सरकारी खजाने में आय बढ़ती है और घरेलू बाजार में ईंधन आपूर्ति तथा कीमतों को संतुलित रखने में भी मदद मिलती है.
ये भी पढ़ें: एक्सपोर्ट ड्यूटी में इजाफा: डीजल और हवाई ईंधन के निर्यात पर लगा भारी टैक्स, आम जनता पर क्या होगा असर?
डीजल और एटीएफ के निर्यात से भारत को बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा (डॉलर) प्राप्त होती है, जिसका सीधा फायदा देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को मिलता है. जब भारतीय रिफाइनरियां विदेशों में ईंधन बेचती हैं तो भुगतान आमतौर पर डॉलर में होता है. इससे देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ता है और भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में मदद मिलती है. मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार रुपये की स्थिरता बनाए रखने, आयात बिल चुकाने और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने में अहम भूमिका निभाता है.
-भारत एक्सप्रेस
दिल्ली के श्रीराम सेंटर में ‘अमर बलिदान’ नाटक का मंचन हुआ. गुरु तेग बहादुर जी…
Gyanesh Kumar removal impeachment: CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए INDIA ब्लॉक फिर नया…
S Jaishankar UN Speech: संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूएन…
पीएम मोदी ने वाराणसी से वडनगर जा रही सेवा यात्रा के युवाओं से बातचीत की.…
रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के लिए 160 SAT-SAAW ग्लाइड बम खरीदने के लिए ₹811…
Cheapest Petrol In World: दुनिया में पेट्रोल की कीमतें अलग-अलग हैं. वेनेजुएला और ईरान जैसे…