फिक्की द्वारा आयोजित तीसरे भारत ऊर्जा संक्रमण शिखर सम्मेलन में केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि भारत की प्रमुख सौर पहल पीएम-सूर्य घर (PM Surya Ghar) ने 8.5 लाख रूफटॉप इंस्टॉलेशन को पार कर लिया है, जो 1 करोड़ घरों को सौर ऊर्जा से बिजली देने के लक्ष्य की ओर प्रगति को दर्शाता है. ऊर्जा मंत्री जोशी ने कहा, “सरकार का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता हासिल करना है, जिसका दीर्घकालिक लक्ष्य 2047 तक 1,800 गीगावाट हासिल करना है. यह पहल चल रही नीतिगत सहायता और वित्तीय सहायता के साथ भारत को स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करती है.”
उन्होंने इस बात पर जोर डाला कि भारत की अक्षय ऊर्जा क्षमता 2014 में 75 गीगावाट से बढ़कर 220 गीगावाट से अधिक हो गई है. ऊर्जा सुरक्षा, वित्तपोषण और नीति स्थिरता के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “भारत अक्षय ऊर्जा में वैश्विक नेता बनने की राह पर है, देश के ऊर्जा संक्रमण को तेज करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं.”
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू ने भारत के ऊर्जा परिवर्तन के लिए वित्तीय रणनीति की रूपरेखा प्रस्तुत की. उन्होंने कहा, “भारत के ऊर्जा परिवर्तन के लिए 33 लाख करोड़ रुपये जुटाना एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, वैश्विक वित्तपोषण संस्थानों और निजी पूंजी को शामिल करते हुए बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है. जबकि 10 लाख करोड़ रुपये सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से प्राप्त किए जाएंगे, शेष 23 लाख करोड़ रुपये ग्रीन बॉन्ड और संरचित ऋण समाधानों सहित नवीन वित्तपोषण साधनों के माध्यम से आने चाहिए.”
शिखर सम्मेलन में उद्योग प्रतिनिधियों ने अक्षय ऊर्जा लक्ष्यों के लिए अपना समर्थन दोहराया. फिक्की अक्षय ऊर्जा सीईओ समिति के अध्यक्ष और अयाना पावर के एमडी और सीईओ शिवानंद निंबर्गी ने कहा, “हम 2030 तक 500 गीगावाट के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को देख रहे हैं और नेट जीरो की ओर अपनी यात्रा को तेज करने की दिशा में काम कर रहे हैं. उद्योग के दृष्टिकोण से हम इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में सरकार को अपने पूर्ण समर्थन का आश्वासन देते हैं.”
फिक्की पावर कमेटी के अध्यक्ष और दक्षिण एशिया के चेयरमैन और सेम्बकॉर्प इंडस्ट्रीज के हाइड्रोजन बिजनेस के सीईओ विपुल तुली ने कहा, “भारत की आर्थिक प्रतिस्पर्धा, ऊर्जा सुरक्षा और निवेश के अवसरों के लिए ऊर्जा संक्रमण अब एक मुख्य मुद्दा है. 50 गीगावाट से अधिक मॉड्यूल असेंबली और बैकवर्ड इंटीग्रेशन के साथ, हम आईपीपी से अधिक विनिर्माण और प्रौद्योगिकी नवाचार की उम्मीद करते हैं.”
शिखर सम्मेलन में फिक्की की रिपोर्ट, ‘भारत के ऊर्जा संक्रमण को सशक्त बनाना: नवीकरणीय एकीकरण और डीकार्बोनाइजेशन को गति देने की रणनीतियां’ भी जारी की गई. रिपोर्ट पेश करते हुए, बीसीजी के प्रबंध निदेशक और भागीदार विशाल मेहता ने कहा, “भारत की मांग शाम और रात के समय की ओर बढ़ने के कारण पवन ऊर्जा परियोजनाएं हमारी सबसे महत्वपूर्ण परिसंपत्ति वर्ग बन रही हैं. हमारा विश्लेषण दर्शाता है कि हमारे 50 गीगावाट वार्षिक नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, हमें सालाना लगभग ₹1.5-2 लाख करोड़ ऋण वित्तपोषण और ₹75,000-80,000 करोड़ इक्विटी की आवश्यकता है.”
फिक्की द्वारा आयोजित दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में सरकारी अधिकारी, उद्योग जगत के नेता, वित्तीय संस्थान और प्रौद्योगिकी नवप्रवर्तक अक्षय ऊर्जा विस्तार, ऊर्जा भंडारण, हरित हाइड्रोजन और वित्तपोषण तंत्र पर चर्चा करने के लिए एकत्रित हुए.
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-भारत एक्सप्रेस
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