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वित्त वर्ष 2024 में शहरी-ग्रामीण खर्च का अंतर कम हुआ: सर्वे

यह सर्वेक्षण सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा अगस्त 2023 और जुलाई 2024 के बीच किया गया था. हालांकि 2023-24 में गैर-खाद्य वस्तुओं की हिस्सेदारी पिछले वर्ष की तुलना में मामूली रूप से कम हुई है, लेकिन मासिक खर्चों में इसका हिस्सा सबसे ज़्यादा है.

गुरुवार (30 जनवरी) को जारी घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण के अनुसार, 2023-24 में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ सामाजिक श्रेणियों के बीच खर्च असमानता में कमी आई है. गैर-खाद्य वस्तुएं औसत मासिक खर्च का प्राथमिक चालक बनी रहीं. ग्रामीण-शहरी व्यय अंतर 2022-23 में 71.2% से घटकर 2023-24 में 69.7% हो गया. 2011-12 में व्यय अंतर 83.9% था.

ग्रामीण क्षेत्रों में औसत मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय (MPCE) 2023-24 में 9.2% बढ़कर 4,122 रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष 3,773 रुपये था. शहरी क्षेत्रों में यह वृद्धि 8.3% बढ़कर 6,996 रुपये हो गई.

2023-24 में गैर-खाद्य वस्तुओं की हिस्सेदारी कम हुई

यह सर्वेक्षण सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा अगस्त 2023 और जुलाई 2024 के बीच किया गया था. हालांकि 2023-24 में गैर-खाद्य वस्तुओं की हिस्सेदारी पिछले वर्ष की तुलना में मामूली रूप से कम हुई है, लेकिन मासिक खर्चों में इसका हिस्सा सबसे ज़्यादा है. ग्रामीण क्षेत्रों में MPCE में खाद्य वस्तुओं की हिस्सेदारी 2022-23 में 46.4% से थोड़ी बढ़कर 2023-24 में 47% हो गई. 2011-12 में यह 52.9% थी. शहरी क्षेत्रों में, यह हिस्सेदारी 2022-23 में 39.2% से बढ़कर 39.7% हो गई. 2011-12 में यह हिस्सेदारी 42.6% थी.

इसके विपरीत ग्रामीण क्षेत्रों में औसत MPCE में गैर-खाद्य वस्तुओं की हिस्सेदारी पिछले वर्ष के 53.6% से मामूली रूप से घटकर 2023-24 में 53% हो गई. 2011-12 में यह 47.1% था. शहरी क्षेत्रों में, यह 2022-23 में 60.8% से मामूली रूप से गिरकर 60.3% हो गया. 2011-12 में यह हिस्सा 57.4% था.

विश्लेषण से पता चला है कि 2022-23 और 2023-24 के बीच शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के बीच खर्च में वृद्धि अन्य की तुलना में अधिक थी. इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों में आकस्मिक श्रम और स्वरोजगार द्वारा खर्च में वृद्धि 2022-23 और 2023-24 के बीच नियमित वेतन श्रमिकों की तुलना में अधिक थी.

ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि में आकस्मिक श्रम ने गैर-कृषि में आकस्मिक श्रम की तुलना में खर्च में अधिक वृद्धि दर्ज की. इसी तरह, कृषि में स्वरोजगार करने वाले लोगों ने गैर-कृषि में उन लोगों की तुलना में अधिक वृद्धि का अनुभव किया.


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-भारत एक्सप्रेस



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