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ग्रामीण उपभोग में सुधार से छोटे शहरों में डिजिटल डिमांड बढ़ी, त्योहारी सीजन के दौरान शहरी इलाकों से ज्यादा खरीदारी

Digital Demand In India: भारत में कस्‍बों-छोटे शहरों में रहने वाले लोग शहरी लोगों की तुलना में ऑनलाइन अधिक खर्च कर रहे हैं, साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों की मांग में भी बहुप्रतीक्षित सुधार देखने को मिल रहा है.

त्योहारी सीजन में खर्च के पैटर्न से पता चलता है कि अर्ध-शहरी और ग्रामीण उपभोग की मांग में सुधार हो रहा है, जबकि छोटे शहरों में खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है.

त्योहारी सीजन के दौरान ज्‍यादा खरीदारी

अमेजन इंडियाकी दिवाली इनसाइट रिपोर्ट में कहा गया है कि त्योहारी सीजन के दौरान खरीदारी करने वाले प्लेटफॉर्म के 70% प्राइम सदस्य टियर II और III शहरों से थे, जबकि एक साल पहले यह संख्या 60% थी.

छोटे प्लेटफॉर्म पर भी इसी तरह के रुझान देखने को मिले. ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मीशो, जिसके लगभग 80% उपयोगकर्ता टियर II शहरों और उससे आगे के शहरों से आते हैं, के लिए हाल ही में हुई त्योहारी सेल में ई-कॉमर्स में नए उपयोगकर्ताओं की संख्या में 45% की वृद्धि हुई.

सेल से ग्राहकों की संख्‍या में इजाफा

Meesho के जनरल मैनेजर Milan Partani ने 7 अक्टूबर को दिए गए बयान में कहा कि सेल के दौरान कंपनी ने ऑर्डर में 40% से अधिक की वृद्धि देखी. इसमें 1.45 बिलियन कस्‍टमर आए, जिनमें से करीब आधे खरीदार टियर 4 शहरों से थे.

रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स के एसोसिएट पार्टनर कुशाल भटनागर के अनुसार, त्यौहारी सीजन के दौरान सकल माल मूल्य में वृद्धि के मामले में टियर II और उससे आगे के शहर सबसे आगे रहे, जिसमें स्थिर खर्च पैटर्न और ऑनलाइन उपलब्ध विकल्पों में मजबूत रुचि दिखाई गई.

ई-कॉमर्स को अपना रहे छोटे शहर

कुशाल भटनागर ने 14 नवंबर को कहा, “टियर II+ शहरों में खर्च में 13% की वृद्धि देखी गई, जो महानगरों और टियर I शहरों से आगे निकल गई. छोटे शहरों ने ई-कॉमर्स को अपनाया, जो ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के साथ बढ़ती सहजता को दर्शाता है. इन क्षेत्रों के उपभोक्ता प्रतिस्पर्धी मूल्य बिंदुओं पर पेश किए जाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स और उपकरणों जैसी उच्च-एएसपी श्रेणियों पर भी खर्च करने को तैयार हैं,”

एक क्रेडिट-ऑन-यूपीआई प्लेटफ़ॉर्म Kiwi की एक रिपोर्ट के अनुसार, टियर II और उससे आगे के शहरों में, आवश्यक वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक्स और सामान्य दुकानों पर खर्च सबसे आगे रहा.

शहरी क्षेत्रों में मांग में कमी देखी गई

इस बीच, शहरी क्षेत्रों में वृद्धि मुख्य रूप से भोजन, यात्रा और आभूषण जैसे लक्जरी क्षेत्रों द्वारा संचालित थी, भले ही शहरी मध्यम वर्ग ने इस बार कम खर्च किया हो.

अर्ध-शहरी और ग्रामीण खपत में यह सुधार ऐसे समय में आया है जब शहरी मांग में मंदी के शुरुआती संकेत मिल रहे हैं. निश्चित रूप से, वित्त मंत्रालय की सितंबर की मासिक आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, शहरी खर्च में साल-दर-साल वृद्धि हुई है. हालांकि, पिछले दो वर्षों की तुलना में वृद्धि की गति धीमी रही, जिसमें शहरी खपत में कोरोना-काल के बाद उछाल देखा गया था. दूसरी ओर, अर्ध-शहरी और ग्रामीण मांग की वृद्धि दर, जो महामारी के बाद से सुस्त थी, में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है.

सितंबर तिमाही में शहरी खपत गिरी

मासिक आर्थिक रिपोर्ट में कहा गया है कि सितंबर तिमाही में शहरी खपत वृद्धि मार्च तिमाही के 10.1% से गिरकर 2.8% हो गई, जबकि ग्रामीण विकास पिछली तिमाही के 5.2% से बढ़कर 6% हो गया.

Citi Research की 3 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, उनके एक्टिवटी ट्रैकर ने पाया कि ग्रामीण खपत की गति ने 2020-21 के लॉकडाउन के बाद पहली बार शहरी खपत को पीछे छोड़ दिया. रिपोर्ट में कहा गया है, “ग्रामीण मांग में शुरुआती उछाल कृषि गतिविधि के कारण हुआ, जिसे वित्त वर्ष 2025 की दूसरी छमाही में गैर-कृषि गतिविधि से और समर्थन मिल सकता है,”.

दूसरी ओर मजदूरी, अतिरिक्त बचत और लीवरेज्ड खपत जैसे प्रमुख कारकों से समर्थन की कमी और पिछले साल के उच्च आधार के कारण शहरी खपत की गति अभी धीमी रहने की संभावना है.

इकोनॉमिक एक्टिवटी इंडेक्‍स का डेटा

Citi के अनुसार, उनके इकोनॉमिक एक्टिवटी इंडेक्‍स, ‘GATI’ ने दिखाया कि शहरी खपत 2022 की शुरुआत से पिछले छह महीनों में निगेटिव टेरिटरी (प्री-कोविड मोमेंटम से नीचे) में तेज गिरावट के साथ अपने सबसे निचले स्तर पर है. Citi Research ने कहा, “शहरी वेतन वृद्धि के लिए हमारा प्रॉक्सी धीमी गति का संकेत देना जारी रखता है. प्रारंभिक डेटा से संकेत मिलता है कि सूचीबद्ध कंपनियों की वेतन लागत वृद्धि सितंबर 2024 में 6% सालाना तक गिर गई, जबकि जून 2024 में यह 6.4% और 10 साल के औसत के लिए 9.5% थी,”.

ऑटो, FMCG पर असर

लेंडर्स, FMCG और ऑटोमोबाइल कंपनियों ने भी ग्रामीण विकास में सुधार और शहरी विकास में मंदी का असर महसूस करना शुरू कर दिया है, कई कंपनियों ने चालू तिमाही में धीमी वृद्धि की भविष्यवाणी की है.

SBI Research के अनुसार, शहरी मांग का संकेतक घरेलू यात्री वाहन बिक्री के साथ-साथ डीजल की खपत, बिजली की मांग और बिटुमेन की खपत जैसे खपत और मांग के अन्य संकेतकों में कमी आई है. दूसरी ओर, ग्रामीण खपत और मांग में उछाल के साथ, घरेलू ट्रैक्टर की बिक्री में अक्टूबर 2024 में वृद्धि देखी गई, और अगस्त 2024 में ग्रामीण वेतन वृद्धि में तेजी के कारण दोपहिया और तिपहिया वाहनों के सेगमेंट में लगातार वृद्धि देखी गई.

ग्रामीण और अर्ध-शहरी-केंद्रित गैर-बैंक फाइनेंसर महिंद्रा फाइनेंस के प्रबंध निदेशक और चीफ एग्‍जीक्‍यूटिव Raul Rebello ने हाल ही में कहा कि अच्छे मानसून के कारण, अक्टूबर की शुरुआत से ट्रैक्टर की मांग मजबूत रही है. उन्‍होंने सितंबर तिमाही की अर्निंग कॉल में कहा, “वर्षा अच्छी रही है, और हमें उम्मीद है कि एमएसपी पॉजिटिव होने और कुल पैदावार भी सकारात्मक होने से वर्ष की अगली छमाही के लिए ग्रामीण और कृषि परिणाम अच्छे होंगे, हम ट्रैक्टर की अच्छी बिक्री देखेंगे, और हमें इसका लाभ उठाने में सक्षम होना चाहिए.”

ग्रामीण इलाकों में मौजूदगी वाली अन्य वित्तीय सेवा कंपनियों ने भी मांग परिदृश्य देखा. श्रीराम फाइनेंस के प्रबंध निदेशक और चीफ एग्‍जीक्‍यूटिव ऑफिसर वाई.एस. चक्रवर्ती ने कहा, “शहरी मांग निश्चित रूप से धीमी हो गई है, लेकिन ग्रामीण मांग बढ़ रही है, जो हमारे लिए एक अच्छा संकेत है.”

– भारत एक्‍सप्रेस

Bharat Express Desk

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