क्या आपने कभी ऐसा सपना देखा है कि आपके या आपके परिवार के किसी बड़े बुजुर्ग के नाम पर इलाके में एक बड़ा सरकारा अस्पताल या कॉलेज हो? अगर कहा जाए कि ऐसा सच में हो सकता है, तो क्या आप मानेंगे? साफ शब्दों मं कहा जाए आम इंसान खुद मालिक बनकर सरकार की तरह किसी सरकारी संस्थान तो खड़ो तो नहीं कर सकता, क्योंकि इसका संचालन पूरी तरह से शासन-प्रशासन के हाथ में होता है. हालांकि देश के कई राज्यों में ऐसी नीतियां मौजूद हैं जिनके जरिए आप दान देकर सरकारी संस्थानों पर अपना या परिवार के किसी भी सदस्य का नाम दर्ज करा सकते हैं.
भले ही आप सीधे तौर पर सरकार की तरह किसी कॉलेज या अस्पताल के मालिक नहीं बन सकते हो, लेकिन अपनी दरियादिली से आप अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज जरूर करवा सकते हैं. उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में ऐसी कल्याणकारी योजनाएं और नीतियां हैं. इसके तहत अगर कोई शख्स या परिवार किसी सरकारी अस्पताल या कॉलेज के निर्माण के लिए जमीन देता है या फिर कुल लागत का एक बड़ा हिस्सा सरकार को दान करता है तो सरकार उस संस्थान का नाम दानदाता या उसके पूर्वजों के नाम पर रखने की मंजूरी दे देती है.
इसके लिए आपको राज्य के स्वास्थ्य या उच्च शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारियों को एक औपचारिक आवेदन देना होता है. प्रस्ताव पास होने के बाद सरकार और आपके बीच एक कानूनी समझौता यानी MoU साइन होता है जिसमें नामकरण और पैसों के लेन-देन से जुड़ी सारी शर्तें साफ-साफ लिखी जाती हैं.
जरूरी नहीं है कि आपके पास जमीन का बहुत बड़ा टुकड़ा हो तभी आप ऐसा कर सकें. अगर आपके पास पर्याप्त पूंजी है, तो आप सरकारी चैनलों या मुख्यमंत्री राहत कोष के जरिए बड़ा आर्थिक योगदान दे सकते हैं. अगर आप किसी मौजूदा सरकारी अस्पताल में कोई नई बिल्डिंग, आधुनिक लैब या स्पेशल वार्ड अपनी लागत से बनवाकर सरकार को सौंपते हैं, तो नियमों के तहत उस खास ब्लॉक या विंग का नाम आपके परिवार के नाम पर रखा जा सकता है.
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यदि आप दान देने के बजाय खुद ही अपना अस्पताल या कॉलेज चलाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको एक लीगल प्रोसेस से गुजरना होगा. सबसे पहले आपको एक रजिस्टर्ड संस्था बनानी होगी. इसके लिए आप पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट, कम से कम सात सदस्यों वाली सोसाइटी या फिर नॉन-प्रॉफिट कंपनी रजिस्टर करवा सकते हैं.
संस्था बनने के बाद आपको जमीन खरीदकर भवन तैयार करना होगा. इसके बाद असली चुनौती शुरू होती है यानी तमाम विभागों से लाइसेंस और मंजूरियां लेने की. अस्पताल के लिए क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन, फायर एनओसी, बायोमेडिकल वेस्ट के लिए पॉल्यूशन बोर्ड की अनुमति और फार्मेसी लाइसेंस लेना जरूरी है. वहीं अगर आप कॉलेज खोल रहे हैं तो राज्य के शिक्षा निदेशालय से एनओसी, यूनिवर्सिटी से मान्यता और यूजीसी या एआईसीटीई जैसे राष्ट्रीय बोर्डों से हरी झंडी लेनी होगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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