ब्लॉग

G.O.A.T. किताब में सामने आई गोपाल ‘पाठा’ की कहानी, जिन्हें कहा जाता है कोलकाता का रक्षक?

GOAT Book Review: अगर भारत के विभाजन के इतिहास से एक अध्याय गायब कर दिया जाए, तो वह अध्याय गोपालचंद्र मुखर्जी का होगा — वह व्यक्ति जिसे लोग ‘गोपाल पाठा’ के नाम से जानते थे. अभिजित मजूमदार और देबदत्त भट्टाचार्य की किताब G.O.A.T.: Gopal ‘Patha’ Mukherjee, the Meat-Shop Owner Who Saved Kolkata ठीक इसी भूले-बिसरे अध्याय को फिर से सामने लाती है.

1946 में मुस्लिम लीग के ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ की घोषणा के बाद कोलकाता में जो हिंसा भड़की, उसे ‘ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स’ कहा जाता है. हजारों लोग मारे गए, हजारों घायल हुए. हिंदू बस्तियों पर हमले हुए, महिलाएं असुरक्षित हो गईं. उस समय जब मुख्यधारा के नेता चुप्पी साधे बैठे थे, तब एक मांस-दुकान का मालिक आगे आया.

गोपाल पाठा का जन्म 1913 में हुआ था. परिवार कॉलेज स्ट्रीट पर मटन की दुकान चलाता था. इसी वजह से उन्हें ‘पाठा’ (बकरी) कहा जाता था. वे पहलवान थे, इलाके में सम्मान रखते थे और व्यापार के सिलसिले में मुस्लिम व्यापारियों से भी नियमित संपर्क रखते थे. लेकिन 16 अगस्त 1946 को जब हिंसा शुरू हुई, तो उन्होंने अपने ‘लड़कों’ को इकट्ठा किया और भारत जातीय बाहिनी का गठन किया. उनके शब्दों में: “अगर एक हत्या हुई है, तो दस हत्याएँ करो.” यह आदेश उन्होंने अपने लोगों को दिया था.

वे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बचे हथियार, ग्रेनेड और गोला-बारूद जुटाते थे. मरावाड़ी व्यापारियों का सहयोग भी मिला. 18 अगस्त से हिंदू प्रतिरोध तेज हुआ. परिवार के अनुसार, उन्होंने निर्दोष मुस्लिमों, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को न छूने का स्पष्ट आदेश दिया था. कई खातों में यह भी कहा गया है कि उन्होंने कुछ मुस्लिम परिवारों को भी आश्रय दिया.

बाद में जब महात्मा गांधी हथियार समर्पण की अपील करने आए, तो गोपाल पाठा ने साफ कहा: “इन हथियारों से मैंने अपने इलाके की महिलाओं और लोगों को बचाया. गांधीजी उस समय कहां थे जब नरसंहार हो रहा था? मैं एक भी कील नहीं सौंपूंगा.”

यह किताब इन्हीं घटनाओं को विस्तार से सामने लाती है. यह न सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी है, बल्कि उस समय की राजनीतिक चुप्पी, सशस्त्र प्रतिरोध की आवश्यकता और इतिहास से जानबूझकर भुला दिए गए नायक की कहानी है. गोपाल पाठा की विरासत लंबे समय तक मुख्यधारा के इतिहास में लगभग गायब रही. हाल के वर्षों में ही उनकी मूर्ति का अनावरण हुआ और कोलकाता में एक सड़क का नाम उनके नाम पर रखा गया.

लेखकगण इस किताब के माध्यम से यह सवाल उठाते हैं कि क्या साधारण दिखने वाला व्यक्ति भी असाधारण क्षणों में इतिहास का रुख बदल सकता है. गोपाल पाठा न तो किसी बड़े राजनीतिक दल के नेता थे, न किसी पारंपरिक क्रांतिकारी संगठन के प्रमुख. वे एक मांस-दुकान के मालिक थे, जिन्होंने संकट के समय संगठित प्रतिरोध खड़ा किया.

विभाजन की त्रासदी सिर्फ नेताओं और बड़े आंकड़ों की कहानी नहीं है. उसमें उन लोगों की भी भूमिका है, जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर अपने पड़ोस की रक्षा की. गोपाल पाठा की कहानी साहस, बलिदान और नेतृत्व की है — लेकिन यह कहानी विवादों से भी भरी है. कुछ उन्हें रक्षक मानते हैं, कुछ प्रतिशोध की हिंसा का प्रतीक. किताब इन दोनों पक्षों को नजरअंदाज किए बिना, तथ्यों और गवाहियों के आधार पर एक संतुलित चित्र प्रस्तुत करने का प्रयास करती है.

आज जब विभाजन की स्मृतियों को फिर से खोला जा रहा है, तब G.O.A.T. जैसी किताबें जरूरी हो जाती हैं. वे हमें याद दिलाती हैं कि इतिहास सिर्फ विजेताओं या चुने हुए नायकों का नहीं होता. कभी-कभी एक मांस-दुकान का मालिक भी शहर का रक्षक बन सकता है. और अगर इतिहास उसे भूल जाए, तो किताबें उसे वापस ला सकती हैं.

यह किताब उन पाठकों के लिए है जो विभाजन के अंधेरे अध्यायों को समझने के इच्छुक हैं — बिना किसी आसान नायक-खलनायक की कहानी के. गोपाल पाठा की कहानी हमें बताती है कि संकट के समय साहस कितना जरूरी होता है, और याद रखना कितना.

-भारत एक्सप्रेस 

विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार

Recent Posts

SONIPAT : 6 महीने के बच्चे को गोद से छीनकर नोंचता रहा पिटबुल कुत्‍ता, बचाने आई बुआ को भी कर डाला लहूलुहान

SONIPAT PITBULL ATTACK: हरियाणा के सोनीपत की सिक्का कॉलोनी में पिटबुल के हमले का रोंगटे…

19 minutes ago

पाइप उठाते ही कैसे दौड़ गया करंट? मथूरा में करंट लगने से 3 मजदूरों की दर्दनाक मौत

मथुरा के शेरगढ़ में बोरिंग के दौरान लोहे का पाइप 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन…

24 minutes ago

अभिषेक शर्मा का तांडव! 30 गेंदों में ठोका सबसे तेज शतक, तीसरे T20 में भारत ने बनाए 221 रन

Abhishek Sharma: भारत और अफगानिस्तान के बीच तीसरा टी20 इंटरनेशनल मुकाबला अरुण जेटली क्रिकेट स्टेडियम…

35 minutes ago

कातिलों को बचा रहे सपा विधायक…, जौनपुर में विशाल यादव हत्या मामले में परिजनों का गंभीर आरोप, 2 आरोपी गिरफ्तार

Jaunpur Vishal Yadav Murder: उत्तर प्रदेश के जौनपुर में विशाल यादव की दिनदहाड़े पीट-पीटकर हत्या…

46 minutes ago

BIMSTEC Conference Goa: पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा के लिए एकजुट हुए सातों सदस्य देश, ‘गोवा कन्क्लूजन’ ने तय की भावी दिशा

BIMSTEC TRADITIONAL MEDICINE SUMMIT: गोवा में पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान, आनुवंशिक संसाधनों और बौद्धिक संपदा अधिकारों…

1 hour ago