Aao School Chalen Abhiyan Delhi School Admission- ai generated
Aao School Chalen Abhiyan: राजधानी दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले से शिक्षा और सामाजिक बदलाव की एक बेहद भावुक व सराहनीय तस्वीर सामने आई है. ‘आओ स्कूल चलें’ अभियान के तहत उन बच्चों की तकदीर बदल गई है, जो सालों से जन्म प्रमाण पत्र और जरूरी दस्तावेजों के अभाव में स्कूल की चौखट तक नहीं पहुंच पाए थे. शिक्षा से वंचित इन मासूमों का जब ढोल-नगाड़ों, फूलों की माला और माथे पर रोली-अक्षत का तिलक लगाकर स्कूल में स्वागत हुआ, तो उनके परिजनों की आंखें खुशी से नम हो गईं.
बच्चों के स्कूल आगमन का यह पल किसी बड़े त्यौहार या उत्सव से कम नहीं था. बस्ती की तंग गलियों से निकलते ही ढोल-नगाड़ों की थाप पर मासूमों को माला पहनाकर सम्मानित किया गया और पूरे मान-सम्मान के साथ स्कूल के मुख्य द्वार तक पहुंचाया गया. स्कूल के द्वार पर शिक्षकों ने खुद खड़े होकर पारंपरिक रूप से बच्चों का तिलक लगाकर अभिनंदन किया. पहली बार मिला यह अपनापन और सम्मान देखकर मासूमों के चेहरों पर गर्व और असीम उत्साह की चमक साफ झलक रही थी.
उत्तर-पूर्वी जिले में शिक्षा की अलख जगाने और हर बच्चे को उसका मौलिक अधिकार दिलाने के लिए यह विशेष पहल की गई है. उत्तर-पूर्वी जिला विकास समिति और स्थानीय एनजीओ के संयुक्त प्रयास से सेवा बस्तियों में रहने वाले उन बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है, जो अब तक पहचान पत्र या आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई से महरूम थे. इसी कड़ी में रोहतास नगर विधानसभा क्षेत्र के लोनी रोड स्थित आईलेजी फ्लैट्स की ‘मूर्तिकार बस्ती’ के 6 से 9 साल की उम्र के 25 बच्चों का दाखिला कराया गया. यह बच्चे कागजात न होने से स्कूल नहीं जा पा रहे थे. समिति ने पहले इनके जरूरी दस्तावेज बनवाए और फिर अभिभावकों को प्रेरित कर बच्चों का एडमिशन सुनिश्चित किया.
यह भी पढ़ें: सऊदी में मक्का पर हमले की साजिश? इतिहास में पहली बार थर्राया मुस्लिमों का पवित्र शहर, हूतियों ने बताया झूठ
आज 25 नए बच्चों के प्रवेश के साथ ही इस अभियान के तीसरे चरण में लाभान्वित बच्चों की कुल संख्या 80 हो गई है. दाखिला मिलते ही मूर्तिकार बस्ती का माहौल उम्मीदों से भर उठा. जिन माता-पिता के पास कागजात न होने के कारण सिर्फ निराशा थी, आज उनकी आंखें खुशी से छलक पड़ीं. कार्यक्रम के दौरान उत्तर-पूर्वी जिला विकास समिति के अध्यक्ष जितेंद्र महाजन ने कहा: “सेवा बस्तियों के ऐसे बच्चे जो दस्तावेजों या आर्थिक तंगी के कारण स्कूल नहीं जा पाते, उन्हें चिन्हित कर स्कूल भेजा जा रहा है. रोहतास नगर में यह तीसरा कार्यक्रम है और अब तक 80 बच्चों का दाखिला हो चुका है. हमारा प्रयास है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और समाज की मुख्यधारा से जुड़े.”
विकास समिति और एनजीओ का अंतिम लक्ष्य जिले की हर झुग्गी और सेवा बस्ती के बच्चे के हाथों में किताबें और कलम थमाना है. इस पहल ने साबित कर दिया है कि अगर इच्छाशक्ति हो, तो कागजी अड़चनें कभी किसी मासूम के उज्ज्वल भविष्य की राह में रोड़ा नहीं बन सकतीं.
भारत एक्सप्रेस
वाराणसी के छोटी शीतला घाट स्थित शिव मंदिर का नाम 'पाकिस्तानेश्वर' से बदलकर 'सिंधु गंगेश्वर…
DRDO ने 21 किमी की ऊंचाई पर 'हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम' (HAPS) का सफल परीक्षण…
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व पीएम केविन रुड ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के मन में पीएम…
उत्तर प्रदेश में 'प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना' से 2,942 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप सोलर लग…
चुनाव आयोग के काम करने के तरीके और वोटर लिस्ट के स्पेशल गहन रिवीजन यानी…
गृह मंत्री अमित शाह की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत जम्मू-कश्मीर से 150 अवैध बांग्लादेशी…