एजुकेशन

TNAU की बड़ी कामयाबी: ईको-फ्रेंडली ‘जिंक उर्वरक’ को मिला सरकारी पेटेंट

तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (TNAU) से भारतीय किसानों के लिए एक ऐसी खबर आई है, जो खेती-किसानी के भविष्य को पूरी तरह बदल सकती है. दरअसल, विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक नया और ईको-फ्रेंडली जिंक फर्टिलाइजर (Zinc Fertilizer) तैयार किया है, जिसे भारत सरकार की ओर से पेटेंट (नंबर 574341) भी मिल गया है.

कैसे तैयार हुआ ये उर्वरक?

अक्सर किसान अपनी फसलों में जिंक की कमी को दूर करने के लिए जिंक सल्फेट का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसके साथ समस्या यह है कि पौधे इसे पूरी तरह सोख नहीं पाते. TNAU की इस नई खोज ने इस समस्या का जड़ से समाधान निकाल लिया है. वैज्ञानिकों ने बैसिलस पैरालिचेनिफोर्मिस नाम के एक खास बैक्टीरिया का इस्तेमाल किया है, जो धान के खेतों की मिट्टी में पाया जाता है.

इस बैक्टीरिया से निकलने वाले एक प्राकृतिक पदार्थ (EPS) की मदद से यह नया उर्वरक तैयार किया गया है. यह पूरी तरह से बायोडिग्रेडेबल है, यानी मिट्टी या पर्यावरण को इससे कोई नुकसान नहीं पहुंचता. इसमें करीब 16.8 प्रतिशत जिंक है, जो पौधों के लिए किसी सुपरफूड से कम नहीं है.

किसानों को सीधे क्या लाभ होगा?

वैज्ञानिकों ने जब इसका खेतों में ट्रायल किया, तो परिणाम हैरान करने वाले थे. पारंपरिक खाद के मुकाबले इस नए फर्टिलाइजर से पौधों की ग्रोथ काफी तेज देखी गई. इसके कुछ प्रमुख फायदे इस प्रकार हैं:

  • तेजी से असर: आमतौर पर जब पौधों में जिंक की कमी होती है, तो किसान स्प्रे का इस्तेमाल करते हैं. यह नया खाद पौधों द्वारा बहुत तेजी से सोखा जाता है, जिससे फसल का पीलापन या कमजोरी तुरंत दूर होती है.
  • बेहतर पैदावार: ट्रायल में देखा गया कि जिन खेतों में इसका इस्तेमाल हुआ, वहां अनाज की क्वालिटी और मात्रा दोनों में सुधार आया.
  • मिट्टी की सेहत: यह पूरी तरह प्राकृतिक है, इसलिए मिट्टी की उर्वरक शक्ति लंबे समय तक बनी रहती है.

इन दिग्गजों ने किया कमाल

इस बड़ी कामयाबी के पीछे वैज्ञानिकों की एक पूरी टीम की कड़ी मेहनत है. जी. याजिनी के नेतृत्व में इस प्रोजेक्ट पर एस. थियागेश्वरी, आर. आनंदम, डी. सेल्वी, एस. मारीमुथु, ए. मणिकंदन और एल. चित्रा जैसे विशेषज्ञों ने दिन-रात काम किया है. इस पूरी पेटेंट प्रक्रिया को टीएनएयू के पेटेंट सेल के हेड डी. सुरेश कुमार और सलाहकार एन. नटराजन ने बखूबी संभाला.

क्यों जरूरी है यह बदलाव?

आजकल दुनिया भर में ‘सस्टेनेबल खेती’ यानी टिकाऊ कृषि की बात हो रही है. भारत जैसे देश में जहां मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी बढ़ती जा रही है, वहां इस तरह के स्वदेशी और प्राकृतिक आविष्कार गेम-चेंजर साबित होते हैं. यह न केवल खेती की लागत कम करेगा, बल्कि हमारी थाली तक पहुंचने वाले अनाज को भी अधिक पोषक बनाएगा.

ये भी पढ़ें: बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी का शानदार मौका; 400 पदों पर निकली भर्ती, ग्रेजुएट युवाओं के लिए सुनहरा अवसर!

-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

Recent Posts

पेपर लीक और नकल पर नकेल! मध्य प्रदेश बना देश का पहला राज्य, चार महानगरों में गठित हुए फास्ट-ट्रैक कोर्ट

पेपर लीक और नकल जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने…

34 minutes ago

बुक रिव्यू: AI के दौर में मानवीय चेतना और संवेदनशीलता की पैरवी करती विनीत नायर की पुस्तक ‘इंसान पहले, मशीन बाद में’

मैं प्रसिद्ध लेखक विनीत नायर की पुस्तक 'इंसान पहले, मशीन बाद में' की समीक्षा कर…

1 hour ago

‘भारत अगले 20-25 वर्षों तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था रहेगा’: पीयूष गोयल का बड़ा बयान

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत अगले दो दशकों से अधिक समय…

1 hour ago

खेलो इंडिया और खेल महासंघों को मजबूत करने के लिए 36,000 करोड़ रुपए से अधिक आवंटित- प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में 'एशियन गेम्स 2026' के भारतीय…

2 hours ago

क्या गृह सचिव ने मांगी बिना शर्त माफी? जानिए क्या है सुप्रीम कोर्ट का कानूनी नियम

गृह सचिव द्वारा सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगने की मीडिया खबरों पर स्पष्टीकरण…

2 hours ago

बुक रिव्यू: सुर्खियों और भ्रांतियों से परे सनातन धर्म का प्रमाणिक परिचय देती ‘Hinduism Beyond Headlines’

प्रो. हिमांशु राय और सुब्बू चिदंबरन की पुस्तक 'हिंदुइज्म बियॉन्ड हेडलाइन्स' का रिव्यू. वेदों, कर्म…

3 hours ago