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लाशों पर बनी यूनिवर्सिटी कैसे बनी नोबेल प्राइज विजेताओं की खान?

University Of California History: अमेरिका में एक ऐसी यूनिवर्सिटी है जो नोबेल प्राइज विजेताओं की खान से कम नहीं है. दरअसल, बर्कले में स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया (UC) ने इतिहास रचते हुए इस साल 5 नोबेल प्राइज जीते हैं. कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय ने ये पुरस्कार मेडिसिन, फिजिक्स और कैमिस्ट्री में जीते हैं. यह किसी भी संस्थान के द्वारा एक साल में जीते गए सबसे ज्यादा नोबेल पुरस्कार है. जिसके बाद इंटरनेट पर कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय और उसके इतिहास के बारे में लोग सर्च कर रहे हैं. अगर आप भी यहीं खोज रहे हैं तो आइये हम बताते हैं कि कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय कैसे बना और इसका इतिहास क्या है?

कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय (University of California) आज दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक है, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि इसकी शुरुआत जमीन के एक अनुदान, एक क्रांतिकारी कानून और कुछ दूरदर्शी लोगों के सपने से हुई थी. कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय अबतक 75 नोबेल पुरस्कार जीत चुका है.

निजी कॉलेज से यूनिवर्सिटी बनने का सफर

पूंजीवाद का मक्का कहे जाने वाले अमेरिका में 1700 के दशकों में ही निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना हो चुकी थी, लेकिन 1800 के शुरुआती दौर में सार्वजनिक विश्वविद्यालयों का विचार आकार लेने लगा था. जब 1850 में कैलिफ़ोर्निया एक राज्य बना. तो वहां बसने के लिए पहुंचे कुछ लोगों ने सोचा कि क्यों ना यहां एक ऐसा संस्थान बनाया जाए जो सबके लिए हो ना कि सिर्फ अमीरों के लिए. उनकी इसी सोच ने बाद में जाकर ‘कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय’ की नींव रखी.

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय का सपना देखने वालों में रेव. सैमुअल एच. विली, रेव. हेनरी ड्यूरेंट और डेविड कोइट गिलमैन प्रमुख थे. रेव. सैमुअल एच. विली ने 1867 में पहला ‘ऑर्गेनिक एक्ट’ का मसौदा तैयार किया था. रेव. हेनरी ड्यूरेंट येल यूनिवर्सिटी से यहां आए थे और बाद में वो कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के पहले अध्यक्ष बने. वहीं डेविड कोइट गिलमैन ने विश्वविद्यालय की प्रशासनिक संरचना को मजबूती दी. इन लोगों ने ना सिर्फ कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय की नींव रखी बल्कि अमेरिका में एक शिक्षा आंदोलन का अलख जगाने का प्रयास किया.

मूल अमेरिकी जनजातियों से छीनी गई ज़मीन, शिक्षा को सबके लिए सुलभ बनाने का सपना और एक ऐसा संविधान जिसने इसे राजनीतिक दबावों से मुक्त रखा. यही है कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय की असली कहानी.

मॉरिल एक्ट ने आम लोगों तक पहुंचाई शिक्षा

1862 में जब अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने मॉरिल अधिनियम (Morrill Act) पर हस्ताक्षर किये, तब इसके तहत अमेरिकी सरकार ने हर राज्य को संघीय जमीन दी. जिसे बेचकर सार्वजनिक विश्वविद्यालय बनाये जा सकते थे. उनका मानना था कि इससे अमेरिका में कृषि, इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा. जिससे देश में औद्योगिक क्रांति और कृषि शक्ति बढ़ेगी.

कैलिफोर्निया को इस अधिनियम के तहत 1.5 लाख एकड़ भूमि मिली. इसी जमीन को बेचकर ओकलैंड के पास वह इलाका खरीदा गया जो आगे चलकर ‘यूसी बर्कले’ (UC Berkeley) बना.

अमेरिका के मूल जनजातियों का किया गया दमन

अमेरिकी सरकार ने इस अधिनियम के तहत सार्वजनिक विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए भले ही जमीन दी, लेकिन वो जमीन मूल अमेरिकी जनजातियों से छीनी गई थी. कई जगहों पर तो जनजातियों के साथ की गई संधियों को तोड़ दिया गया. यानी इस आधुनिक शिक्षा प्रणाली की बुनियाद कहीं न कहीं औपनिवेशिक कब्जे पर टिकी थी. जिसको लेकर आज भी अमेरिका के जनजातियों के द्वारा समय-समय पर विरोध जताया जाता है.

मूल अमेरिकी जनजातियों से छीनी गई जमीन पर बनी कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी. तस्वीर – एआई जेनरेटेड

1868 के ऑर्गेनिक एक्ट से CU Berkeley का हुआ जन्म

साल 1868 में कैलिफोर्निया विधानसभा ने एक ऑर्गेनिक एक्ट पास किया. जिससे आधिकारिक तौर पर कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय का जन्म हुआ. इस कानून ने बोर्ड ऑफ रीजेंट्स और अकादमिक सीनेट की स्थापना की. जो आज भी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय को संचालित करते हैं. इस अधिनियम की खास बात ये थी कि यह शिक्षा सभी कैलिफोर्नियाई नागरिकों के लिए मुफ्त थी. हालांकि बाद में पंजीकरण और अन्य चीजों के लिए नाम मात्र फीस ली जाने लगी, लेकिन मुफ्त पढ़ाई के लिए बनी ‘नो ट्यूशन पॉलिसी’ बरकरार रही. जो 1970 तक बनी रही.

आज का कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, तस्वीर- edsource

CU Berkeley को दी गई संवैधानिक स्वायत्तता

1879 में कैलिफ़ोर्निया के संविधान में संशोधन कर विश्वविद्यालय को एक ‘सार्वजनिक ट्रस्ट’ (Public Trust) बना दिया गया. इसका मतलब था कि विश्वविद्यालय अब किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक हस्तक्षेप से काफी हद तक मुक्त रहेगा.

बोर्ड ऑफ रीजेंट्स को यह अधिकार मिला कि वह अपना खुद बजट तय कर सकते थे. नए परिसर खोल सकते थे. अपने कोर्स और विषय निर्धारित कर सकते थे और ट्यूशन फीस खुद तय कर सकते थे.

राज्य सरकारों को सिर्फ ये अधिकार दिया गया कि वो विश्वविद्यालय के फंड पर नजर रख सकते हैं. जिससे ये सुनिश्चित हो सके कि फंड का सही से इस्तेमाल हो रहा है या नहीं. इस तरह से कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय राजनीतिक या प्रशासनिक हस्तक्षेप से काफी हद तक मुक्त हो गया.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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