Bhangar Bomb Case: पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान से महज 72 घंटे पहले दक्षिण 24 परगना का भांगड़ इलाका दहल उठा है. दरअसल एक कथित तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ता रफीकुल इस्लाम के घर से 79 देसी बमों की बरामदगी ने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं. अगर समय रहते खुफिया जानकारी न मिलती, तो 29 अप्रैल को वोटिंग के दिन भांगड़ और आसपास के इलाके खून से लाल हो सकते थे.
वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग ने इसकी जांच सीधे NIA (National Investigation Agency) को सौंप दी है, जो इस बात का संकेत है कि यह केवल स्थानीय हिंसा नहीं, बल्कि एक गहरी साजिश का हिस्सा हो सकता है.
दरअसल भांगड़ में मिले बमों के जखीरे ने लोगों को 2007-08 के उस दौर की याद दिला दी है, जब नंदीग्राम और सिंगूर आंदोलनों के दौरान बंगाल की गलियों में बारूद की गंध आम थी. साल 2007 में तत्कालीन सत्ताधारी दल द्वारा चलाया गया ‘ऑपरेशन सनराइज’ बंगाल के इतिहास का वो काला अध्याय है, जहाँ राजनीतिक वर्चस्व के लिए कच्चे बमों और अवैध हथियारों का खुलेआम इस्तेमाल हुआ था.
तब बुद्धदेव भट्टाचार्य की सरकार के दौरान सशस्त्र कैडरों ने गांवों पर कब्जे के लिए हिंसा का सहारा लिया था, और आज 19 साल बाद भांगड़ में मिली विस्फोटक सामग्री ने उसी डरावने इतिहास के दोहराव की आशंका पैदा कर दी है.
चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, खुफिया जानकारी के आधार पर जब रफीकुल इस्लाम के ठिकाने पर छापेमारी की गई, तो वहां का नजारा देखकर पुलिसकर्मी भी दंग रह गए. इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक का मिलना यह बताता है कि वोटिंग के दिन मतदाताओं को डराने-धमकाने या मतदान केंद्रों पर कब्जा करने की एक सोची-समझी प्लानिंग थी. NIA अब इस बात की जांच कर रही है कि इन बमों को बनाने के लिए कच्चा माल कहाँ से आया और इसका असली मास्टरमाइंड कौन है.
इस घटना के बाद चुनाव आयोग बेहद सख्त मूड में है. कोलकाता के पुलिस आयुक्त से लेकर संबंधित थाना प्रभारियों (IC/OC) को कड़ा संदेश जारी किया गया है. आयोग ने साफ कर दिया है कि यदि किसी भी अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में इस तरह के विस्फोटक पाए जाते हैं या हिंसा होती है, तो संबंधित अधिकारी को सीधे तौर पर जिम्मेदार मानकर कार्रवाई की जाएगी. संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है और केंद्रीय बलों (Central Forces) को चप्पे-चप्पे पर तैनात रहने का निर्देश दिया गया है.
सियासी गलियारों में चर्चा है कि अगर ये 79 बम पुलिस के हाथ न लगते, तो मतदान के दिन किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता था. 2008 के पंचायत चुनावों में भी बमबारी की वजह से लोकतंत्र लहूलुहान हुआ था. भांगड़ हमेशा से राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील रहा है, और यहाँ बमों का मिलना विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का बड़ा मौका दे गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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