चुनाव

इस सीट पर कब जलेगी RJD की लालटेन? मुस्लिम आबादी ज्यादा होने के बावजूद MY समीकरण फेल

Bihar Election 2025: विधानसभा चुनाव की हलचल तेज हो चुकी है और सभी दल अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं. लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) इस बार सत्ता में वापसी के लिए पूरी ताकत झोंक रही है. लेकिन अगर उसे किंग बनना है तो उन सीटों पर भी जीत दर्ज करनी होगी जहां अब तक उसका खाता नहीं खुला है. किशनगंज जिले की बहादुरगंज सीट ऐसी ही एक चुनौती है.

बहादुरगंज सीट पर मुस्लिम आबादी

बहादुरगंज एक मुस्लिम बहुल सीट है जहां मुस्लिम आबादी करीब 68 प्रतिशत है. 1951 में विधानसभा सीट बनने के बाद से इस सीट पर अब तक 17 बार चुनाव हो चुके हैं. कांग्रेस ने यहां 10 बार जीत दर्ज की है, जबकि RJD को अब तक सफलता नहीं मिली. AIMIM, जनता दल, बीजेपी और निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी एक-एक बार जीत हासिल की है.

बहादुरगंज में सफल नेता

इस सीट के सबसे सफल नेता नजमुद्दीन और मोहम्मद तौसीफ आलम रहे हैं, जिन्होंने चार-चार बार जीत दर्ज की. तौसीफ आलम ने 2005 में निर्दलीय के रूप में शुरुआत की और बाद में कांग्रेस में शामिल होकर 2015 तक लगातार चुनाव जीते. लेकिन 2020 में वह AIMIM के मोहम्मद अंजार नईमी से हार गए. नईमी ने 45,215 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी. बाद में मार्च 2022 में वह RJD में शामिल हो गए.

महागठबंधन के लिए यह सीट सिरदर्द क्यों?

अब सवाल उठता है कि महागठबंधन के लिए यह सीट सिरदर्द क्यों बन सकती है? मौजूदा विधायक RJD से हैं लेकिन 2020 में इस सीट पर वीआईपी पार्टी दूसरे स्थान पर रही थी. ऐसे में वह भी टिकट की मांग कर सकती है. कांग्रेस भी इस सीट पर दावा ठोक सकती है. अगर टिकट बंटवारे में सहमति नहीं बनी तो बागी उम्मीदवार मैदान में उतर सकते हैं जिससे गठबंधन का गणित बिगड़ सकता है.

नईमी की स्थिति मजबूत नहीं

वहीं विधायक नईमी की स्थिति भी पूरी तरह मजबूत नहीं है. 2010 में उन्हें सिर्फ 4.58 प्रतिशत वोट मिले थे और वे छठे स्थान पर रहे थे. 2024 के लोकसभा चुनाव में बहादुरगंज क्षेत्र में AIMIM ने 6,835 वोटों से बढ़त बनाई थी.

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AIMIM फिर ताल ठोकने की तैयारी में

अब AIMIM फिर से इस सीट पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है. पार्टी खुद को विश्वासघात का शिकार मान रही है और मुस्लिम वोटों को फिर से साधने की कोशिश करेगी. अगर ऐसा होता है तो एनडीए को फायदा मिल सकता है क्योंकि मुस्लिम वोटों का बंटवारा विपक्षी दलों को नुकसान पहुंचा सकता है. याद दिला दें कि 1995 में बीजेपी के अवध बिहारी सिंह ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी. कुल मिलाकर बहादुरगंज सीट पर इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प और उलझा हुआ नजर आ रहा है.

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-भारत एक्सप्रेस

Pankaj kumar Pandey

मैं पंकज कुमार पाण्डेय हूं और मूल रूप से बिहार के पश्चिम चंपारण से आता हूं, जो सत्याग्रह की धरती है. मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई चंपारण में ही हुई है. इसके बाद मैंने महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी मोतिहारी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की. अब तक विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा हूं. इस दौरान रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचार प्रस्तुति से जुड़े अहम पहलू सीखने को मिले. वर्तमान में मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं, जहां मेरी विशेष रुचि राजनीति, विदेश और सामाजिक जागरूकता से जुड़ी खबरों में है. क्योंकि मेरा मानना है कि पत्रकारिता महज एक नौकरी नहीं बल्कि देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी है.

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