चुनाव

Bihar News: अब न गाने, न नारे…30 सालों में क्यों धीरे-धीरे थम गया लोकतंत्र का जश्न

Bihar News: एक वक्त था जब बिहार में चुनाव सिर्फ वोट डालने का मौका नहीं होता था बल्कि पूरे राज्य के लिए एक उत्सव जैसा माहौल होता था. गांव-गांव में ढोल बजते थे, लोकगीत गूंजते थे और चुनावी प्रचार में होली-दीवाली जैसा रंग होता था. लेकिन अब 2025 के चुनाव में सब कुछ बदल गया है.

1995 के बिहार चुनाव में

1995 में जब लेखक कैलिफोर्निया से बिहार चुनाव का सर्वे करने आया था, तब यहां की फिजा में चुनावी जोश था. रिक्शों पर बंधे लाउडस्पीकर, लोक गायकों की टोलियां, और हर पार्टी के अपने गीत होते थे. गांवों में शाम होते ही चौपाल सजती थी, लोग नारे लगाते थे, गाने गाते थे, और राजनीति में दिल से भाग लेते थे.

विदेशी पत्रकारों की हैरानी

तब चुनाव प्रचार में रतजगी होती थी. खेतों से लौटने के बाद लोग दीया-बाती करके चौक पर जमा होते थे. वहां भोजपुर के ढोल और मिथिला के गीतों के बीच मर्द, औरतें और बच्चे भी झूमते थे. लालू यादव के दौर में तो नारे भी मजेदार होते थे. जैसे “लालू के लालटेन फसल कादो में.” यह नारा कीचड़ भरी सड़कों और विकास की कमी पर कटाक्ष था.

बिहार के चुनावी रंग

विदेशी पत्रकारों को यह सब देखकर हैरानी होती थी. वे कहते थे कि भारत में चुनाव जितना लोकतांत्रिक है उतना ही धार्मिक उत्सव जैसा भी है. और सच में, बिहार में चुनावी माहौल होली और दीवाली से कम नहीं होता था. चाय की दुकानों पर बहसें होती थीं, प्रचार के दौरान गुलाल उड़ता था और लिट्टी-चोखा से लेकर खीर-मिठाई तक की दावतें होती थीं.

बिहार चुनाव प्रचार में बदलाव

लेकिन अब, 2025 में बिहार का चुनाव प्रचार एकदम बदल गया है. न लोकगीत हैं, न लाउडस्पीकर. नारे अब दीवारों पर नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर दिखते हैं. प्रचार reels और इंस्टाग्राम स्टोरीज में सिमट गया है. गांवों की गलियों में अब न धूल उड़ती है और न कोई हुजूम दिखता है. यहां तक कि मैथिली ठाकुर जैसी लोकप्रिय गायिका को टिकट मिलने के बावजूद भी उनके गीतों की गूंज नहीं सुनाई देती.

चुनाव-प्रचार वर्चुअल

अब प्रचार वर्चुअल हो गया है. रिंग लाइट के सामने बैठकर उम्मीदवार लाइव आते हैं, और लाइक्स गिनते हैं. प्रशांत किशोर का जनसुराज अभियान ज़मीन पर जरूर दिखता है, लेकिन बाकी सब डिजिटल हो गया है. न जोश है, न उम्मीदों की गूंज. लोकतंत्र अब स्क्रीन पर स्क्रॉल हो रहा है.

बदलाव की वजह

इस बदलाव की वजहें कई हैं. दिवाली और छठ जैसे त्योहारों की खुमारी, चुनाव आयोग की सख्त समयसीमा और राजनीतिक दलों की आपसी खींचतान ने प्रचार को धीमा कर दिया है. सितंबर-अक्टूबर गठबंधन की जोड़तोड़ में निकल गया और नवंबर में मतदान की तारीखें आ गईं. राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की यात्राओं ने थोड़ी हलचल जरूर की थी लेकिन चुनावी तारीखों के बाद से माहौल फिर से शांत हो गया.

क्या यह खामोशी मतदान पर असर डालेगी?

अब सवाल उठता है कि क्या यह खामोशी मतदान पर असर डालेगी? इतिहास कहता है कि कम प्रचार और कम उत्साह अक्सर सत्ता में बैठे लोगों के पक्ष में जाता है. कम मतदान का मतलब है कम बदलाव. लेकिन शायद मतदाता अब शोर से ऊब चुके हैं. हो सकता है वे शांति से सोचकर वोट देना चाहते हों.

फिर भी, इस शांत माहौल में लोकतंत्र की आत्मा कहीं खोती सी लगती है. वो गाने, वो नारे, वो बहसें जो कभी लोकतंत्र को जीवंत बनाते थे अब गायब हैं. अब चुनाव एक भागीदारी नहीं बल्कि एक दूर से देखने वाली प्रक्रिया बनती जा रही है.

ये भी पढ़ें-Bihar Election 2025: पहले चरण के लिए मैदान में उतरे 1,314 उम्मीदवार, 61 ने वापस लिया नामांकन

बिहार का चुनाव प्रचार अब सिर्फ स्टाइल में नहीं सोच में भी बदल गया है. जब राजनीति सिर्फ दिखावे तक सीमित रह जाए तो लोकतंत्र कमजोर होता है. अब देखना ये है कि 2025 की ये शांत शरद ऋतु बिहार को निपुणता की ओर ले जाती है या उदासी की ओर ले जाती है.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस

Pankaj kumar Pandey

मैं पंकज कुमार पाण्डेय हूं और मूल रूप से बिहार के पश्चिम चंपारण से आता हूं, जो सत्याग्रह की धरती है. मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई चंपारण में ही हुई है. इसके बाद मैंने महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी मोतिहारी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की. अब तक विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा हूं. इस दौरान रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचार प्रस्तुति से जुड़े अहम पहलू सीखने को मिले. वर्तमान में मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं, जहां मेरी विशेष रुचि राजनीति, विदेश और सामाजिक जागरूकता से जुड़ी खबरों में है. क्योंकि मेरा मानना है कि पत्रकारिता महज एक नौकरी नहीं बल्कि देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी है.

Recent Posts

‘डिस्कवर द पावर ऑफ एक्सप्रेशन’ प्रदर्शनी में पहुंचे भारत एक्सप्रेस के CMD उपेंद्र राय, बच्चों की विशेष कलाकृति देख हुए भावुक

दिल्ली के मावलंकर हॉल में आयोजित पेंटिंग प्रदर्शनी 'डिस्कवर द पावर ऑफ एक्सप्रेशन' में भारत…

32 minutes ago

दिल्ली में सजी गोपाल दास ‘नीरज’ के गीतों की महफिल, केंद्रीय मंत्री एस.पी. सिंह बघेल चीफ गेस्ट; CMD उपेन्द्र राय ने महाकवि को यूं किया याद

SP Singh Baghel: भारत एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क, महाकवि गोपाल दास नीरज फाउंडेशन ट्रस्ट और सोनवी…

36 minutes ago

‘नागरिकों को दूसरे दर्जे का बनाने वाली प्रक्रिया मंजूर नहीं’: नालसार में SIR विवाद पर भड़के सुप्रीम कोर्ट के जज उज्ज्वल भुइयां

नालसार यूनिवर्सिटी में बोलते हुए जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा कि चुनाव आयोग की SIR…

46 minutes ago

बाढ़ पीड़ितों के नुकसान की भरपाई, फॉर्मर आईडी…; मंत्री विजय सिन्हा का बड़ा दावा

Vijay Sinha: बिहार सरकार के मंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में…

58 minutes ago

‘खतरे में है आम नागरिक का वोट देने का अधिकार’, पूर्व जज रोहिंटन नरीमन ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए गंभीर सवाल

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस रोहिंटन नरीमन ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और वोटर लिस्ट…

1 hour ago

नक्सलवाद खत्म, अब नशामुक्त भारत का लक्ष्य, गृह मंत्री अमित शाह ने भोपाल में मध्य प्रदेश के लिए रखा बड़ा टारगेट

भोपाल में गृह मंत्री अमित शाह ने देश को 2029 तक नशामुक्त बनाने का लक्ष्य…

1 hour ago