बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे अब सबके सामने आ चुके हैं. एक बार फिर NDA की सरकार बिहार में वापसी करने जा रही है. लेकिन इस बार NDA गछबंधन को बहुत बड़ा जनादेश हासिल हुआ है. विभाजित बिहार के बाद पहली बार किसी गठबंधन ने 200 का आंकड़ा पार किया है. इसे मोदी मैजिका का नाम दें या फिर नीतीश का कमाल, दोनों अपने मायने में सही फैक्टर साबित हुए हैं.
इस बार बिहार विधानसभा चुनाव की खूब चर्चा हो रही थी, क्योंकि एक बार फिर NDA और नीतीश कुमार की सरकरा पर एंटी इंकम्बेंसी का चोला पहनाकर सवाल पूछा जा रहा था. साथ ही महागठबंधन के वोट चोरी, नीतीश के तबीयत पर मुद्दा काफी अहम माना जा रहा था. पर इस सब के बावजूद NDA ने बिहार में रिकॉर्ड तोड़ सीटें जीतकर फिर से अपना परचम लहरा दिया है.
बिहार राज्य का विभाजन होने के बाद 6 बार बिहार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. 2005 के (फरवरी) चुनाव में स्पष्ट बहुमत न होने के कारण राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया. 2005 के दूसरा विधानसभा चुनाव (अक्टूबर) में जदयू 88 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. जदयू ने 139 सीटों पर चुनाव लड़ा था. भाजपा ने 102 में से 55 सीटें हासिल की थीं. वहीं, राजद ने 175 सीटों पर चुनाव लड़कर 54 सीटें जीतीं, लोजपा को 203 में से 10 सीटें मिलीं और कांग्रेस 51 में से नौ सीटें ही जीत पाई. साल 2000 में ही लोजपा का गठन हुआ था. इन चुनावों में नीतीश कुमार ने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई थी.
इन चुनावों में बिहार की बड़ी पार्टी मानी जाने वाली राजद का प्रदर्शन बहुत खराब रहा था जो फरवरी 2005 के चुनावों की 75 सीटों के मुक़ाबले सिमटकर 22 सीटों पर आ गई थी. 2010 में एनडीए की सरकार बनी और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बनाए गए.
इन चुनाव में महागठबंधन की सरकार बनी और नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया गया. हालांकि, 2017 में जेडीयू महागठबंधन से अलग हो गई और नीतीश कुमार ने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई.
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इस विधानसभा चुनाव में NDA बहुमत का आंकड़ा पार करने में सफल रहा था. जेडीयू को 43, भाजपा को 74, वीआईपी ने4 और हिंदुस्तना अवाम मार्चा ने 4 सीटों पर जीत दर्ज करने में कामयाब रही थी. एक बार फिर NDA की सरकार बनी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सत्ता पर काबिज हुए .
सालों के उतार-चढ़ाव और गठबंधनों के फेरबदल के बाद 2025 का यह जनादेश बिहार की राजनीति में एक नया इतिहास रच गया है. NDA की ‘डबल सेंचुरी’ ने साफ कर दिया है कि राज्य की जनता ने स्थिरता, अनुभव और नेतृत्व पर फिर से मुहर लगा दी है.
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