चुनाव

कभी एक विधायक नहीं था, आज दीदी के सामने सबसे बड़ी चुनौती! बंगाल में बीजेपी के उदय की पूरी कहानी, पढ़ें- EXPLAINER

BJP Rise In West Bengal: पश्चिम बंगाल की सियासत एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी है. विधानसभा चुनाव में अब महज एक महीने का समय शेष है. राज्य का राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुंच चुका है. सत्तारूढ़ दल से लेकर विपक्ष तक, सभी पार्टियों ने अपने-अपने समीकरण साधने शुरू कर दिए हैं, कहीं जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधा जा रहा है, तो कहीं विकास और पहचान की राजनीति को धार दी जा रही है. साल 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में इसबार बीजेपी पहले नंबर पर आने की कोशिश कर रही है, लेकिन आपको बता दें कि बीजेपी के लिए पश्चिम बंगाल हमेशा उपजाऊ जमीन नहीं था. एक समय ऐसा भी था जब बीजेपी के पास पश्चिम बंगाल में ना तो सांसद थे और ना ही विधायक, फिर ऐसा क्या हुआ कि बीजेपी अचानक से बंगाल में एकदम फ्रंटफुट पर आ गई?

पश्चिम बंगाल में इस समय ममता बनर्जी (दीदी) की पिछले साल 2011 से लगातार सरकार चला रही हैं. इस विधानसभा चुनाव में TMC की राह में सबसे बड़ा रोड़ा भारतीय जनता पार्टी है. 294 सदस्यीय विधानसभा में आज बीजेपी के पास 64 विधायक हैं.

साल 2011 तक बीजेपी का बंगाल में अस्तित्व नाम मात्र था. साल 2011 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को लगभग 4 प्रतिशत वोट मिले. उस समय भी पश्चिम बंगाल में RSS लगातार अपना काम कर रही थी, लेकिन वो वोट में कभी तब्दील नहीं हो पाई. उस चुनाव में टीएमसी ने लेफ्ट फ्रंट की 34 साल पुरानी सरकार को उखाड़ फेंका था. उन्होंने 184 सीटें जीती थी.

बीजेपी के लिए पश्चिम बंगाल में सबसे बड़ा समय साल 2014 में पीएम मोदी के सत्ता में आने के बाद आया. जहां लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अबतक का अपना सबसे अच्छा प्रदर्शन करते हुए 2 सीटें जीती. इस चुनाव में बीजेपी ने 17 प्रतिशत वोट हासिल किया.

कैलाश विजयवर्गीय ने लाया सबसे बड़ा बदलाव

साल 2015 में मध्य प्रदेश के नेता कैलाश विजयवर्गीय को बीजेपी ने महासचिव बनाकर पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी सौंपी. उस समय पश्चिम बंगाल के विधानमंडल में बीजेपी के एक भी विधायक नहीं थे. कैलाश विजयवर्गीय ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी का कैडर खड़ी करने की कोशिश की. उनके इस काम में पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष ने जबरदस्त योगदान दिया. जिसका फायदा 2016 के विधानसभा चुनाव में दिखाई दिया. बीजेपी ने इस चुनाव में तीन सीटें जीती. उस चुनाव में बीजेपी को 10.16 प्रतिशत वोट मिला. यह पहली बार था जब बीजेपी के विधायक पश्चिम बंगाल के विधानसभा में बैठे.

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अपना अबतक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया. पश्चिम बंगाल की 42 सीटों में से बीजेपी ने इस चुनाव में 18 सीटें जीत ली. इसका सबसे बड़ा कारण लेफ्ट वोट बैंक का बीजेपी की तरफ शिफ्ट होना बताया गया. बीजेपी ने टीएमसी के खिलाफ पोस्ट-पोल वायलेंस, भ्रष्टाचार और सीएए और एनआरसी जैसे मुद्दों को उठाकर वोटों को अपनी तरफ खींचने में कामयाब रही.

सुवेंदु का बीजेपी में आना फायदे का सौदा

ममता बनर्जी के कभी राइट हैंड कहे जाने वाले सुवेंदु अधिकारी ने साल 2020 में पार्टी छोड़ दी और साल 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने बीजेपी ज्वाइन कर ली. इस चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने जबरदस्त परफॉर्म किया और बीजेपी को TMC के एकदम सामने खड़ा कर दिया. इस चुनाव में खुद सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को नंदीग्राम विधानसभा सीट से हरा दिया. इस चुनाव में बीजेपी ने 77 सीटें हासिल की. जो वोट प्रतिशत पहले बीजेपी के पास 10 प्रतिशत से थोड़ा ज्यादा था, वो अब बढ़कर 38 प्रतिशत से ज्यादा हो गया. हालांकि टीएमसी ने 294 सीटों में से 215 सीटें जीतकर सत्ता बना ली, लेकिन बीजेपी आधिकारिक रूप से विपक्ष बन गई. यह पश्चिम बंगाल के इतिहास में सबसे बड़ा उछाल था.

हालांकि ममता बनर्जी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में जबरदस्त वापसी करते हुए 29 सीटें जीत ली. जो बीजेपी पहले 19 सीटें जीती थी, वो अब घटकर 12 सीटों पर रह गई.

बीजेपी के उदय का ये था मेन कारण

साल 2011 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के उदय का सबसे बड़ा कारण लेफ्ट वोटों का उनकी तरफ शिफ्ट होना था. कुछ समय के बाद इन वोटरों का ममता बनर्जी से भी मोह भंग हो गया. उन्हें बीजेपी में उम्मीदें नजर आईं. जिन्हें बीजेपी ने अपने साथ जोड़ लिया. ममता बनर्जी के खिलाफ बीजेपी ने खुद को खड़ा करने के लिए पश्चिम बंगाल में अपने कैडर खड़े करने शुरू कर दिये. जिसमें आरएसएस ने जबरदस्त भूमिका निभाई. ममता बनर्जी के कभी राइट हैंड माने जाने वाले सुवेंदु अधिकारी का बीजेपी में आना एक बड़ा पावर शिफ्ट था.

ये भी पढ़ें- बंगाल में ‘खेला’ शुरू! रातों-रात दीदी के गढ़ में EC की स्ट्राइक, दिल्ली में शिकायत लेकर पहुंची BJP

आज 2026 का विधानसभा चुनाव दो धारी लड़ाई बन गई है. टीएमसी जहां एंटी-इंकंबेंसी से जूझ रही है. वहीं बीजेपी पश्चिम बंगाल में ही बंगाल बचाओ का नारा देकर लोगों को अपने पाले में खड़ा करने की कोशिश कर रही है. शून्य से 77 तक का बीजेपी का यह सफर पश्चिम बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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