West Bengal Election News: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए निर्वाचन आयोग (Election Commission) ने कमर कस ली है. राज्य में चुनावी हिंसा की आशंकाओं और राजनीतिक दलों के बीच चल रहे भारी तनाव के बीच, निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है. वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर चुनाव को प्रभावित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं.
रातों-रात EC का बड़ा एक्शन (West Bengal Election 2026)
चुनाव आयोग ने राज्य की कानून-व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने के लिए एक ही झटके में 173 थानों के प्रभारियों (OC) और प्रभारी निरीक्षकों (IC) का तबादला कर दिया है. इस फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा कोलकाता की हाई-प्रोफाइल ‘भवानीपुर’ सीट और पूर्व मेदिनीपुर जिले के संवेदनशील ‘नंदीग्राम’ क्षेत्र की हो रही है. अकेले कोलकाता पुलिस के अंतर्गत आने वाले 31 थानों के प्रभारी बदले गए हैं.
इसके अलावा कूचबिहार, मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, पश्चिम मेदिनीपुर, हावड़ा और उत्तर व दक्षिण 24 परगना जैसे चुनावी लिहाज से अति-संवेदनशील जिलों में भी व्यापक पैमाने पर निरीक्षकों और उप-निरीक्षकों को नई जगहों पर भेजा गया है.
BJP का चुनाव आयोग से रुख (West Bengal Election Update)
आयोग की इस सख्ती के बीच, सोमवार को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, सुकांत मजूमदार और पीयूष गोयल के नेतृत्व में BJP के एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की. किरेन रिजिजू ने मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री खुद घर-घर जाकर मतदाताओं को धमका रही हैं. उन्होंने दावा किया कि TMC ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस मशीनरी पर कब्जा कर पूरे चुनाव को ‘हाईजैक’ कर लिया है.
BJP ने चुनाव आयोग से मांग की है कि वह बंगाल के पुलिस और प्रशासन तंत्र को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में ले. BJP नेताओं का दावा है कि राज्य की जनता TMC के खिलाफ है, जिससे बौखलाकर सत्तारूढ़ दल मतदाताओं को डराने-धमकाने का काम कर रहा है.
अशांति और हिंसा रोकने के निर्देश
हाल ही में बंगाल के कई हिस्सों में हुई छिटपुट हिंसा की घटनाओं को देखते हुए चुनाव आयोग ने पुलिस प्रशासन पर निगरानी और कड़ी कर दी है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने सभी स्तरों के अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं. सभी गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंटों पर तुरंत तामील करने और भगोड़े अपराधियों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है.
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संभावित उपद्रवियों और चुनावी हिंसा के इतिहास वाले पेशेवर अपराधियों की पहचान कर उन पर निवारक कार्रवाई करने को कहा गया है. आयोग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि चुनाव ड्यूटी में लगे सभी अधिकारी सीधे तौर पर EC के प्रति जवाबदेह हैं. किसी भी अधिकारी की लापरवाही या पक्षपातपूर्ण रवैये पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
बंगाल में नहीं चलेगी चुनाव ढिलाई (West Bengal Election Breaking)
चुनाव आयोग के इस सख्त रुख से यह साफ हो गया है कि बंगाल में किसी भी तरह की चुनावी ढिलाई और हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अब देखना यह है कि इन प्रशासनिक बदलावों और सियासी दावों-आरोपों के बीच बंगाल का यह चुनावी ऊंट किस करवट बैठता है.
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