Tamil Nadu Election Result Analysis: लोकतंत्र में अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि मेरे एक वोट से क्या ही बदल जाएगा? अगर आपको भी ऐसा लगता है, तो तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे आपकी सोच को हमेशा के लिए बदल देंगे. इन चुनावों में एक तरफ जहां सुपरस्टार विजय की नवगठित पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है, वहीं तिरुप्पत्तूर विधानसभा सीट के नतीजे ने इतिहास के पन्नों में अपनी खास जगह बना ली है. यहां सिर्फ एक वोट ने एक कद्दावर मंत्री की कुर्सी छीन ली और एक आम कार्यकर्ता को विधायक बना दिया.
तमिलनाडु के सहकारिता मंत्री और DMK के दिग्गज नेता के.आर. पेरियाकरुप्पन को शायद ही अंदाजा रहा होगा कि उनकी किस्मत महज एक वोट के फासले पर आकर अटक जाएगी. जब वोटों की गिनती पूरी हुई, तो टीवीके (TVK) के उम्मीदवार सीनिवास सेतुपति आर ने उन्हें सिर्फ एक वोट के अंतर से हरा दिया. यह बेहद कम अंतर का मुकाबला हाल के चुनावी इतिहास के सबसे करीबी मुकाबलों में से एक बन गया है.
इस रोमांचक जीत का सबसे दिलचस्प पहलू एक अप्रवासी भारतीय वोटर से जुड़ा है. शिवागंगा जिले के तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले मणिकंदन शिवानंतम ने सोशल मीडिया पर खुलासा किया कि उन्होंने अपना वोट डालने के लिए मस्कट से भारत तक का सफर अपनी जेब से खर्च करके तय किया था.
मणिकंदन थलपति विजय के बड़े प्रशंसक हैं और मस्कट से ही लगातार ऑनलाइन कैंपेन चला रहे थे. उन्होंने बताया कि वह 22 अप्रैल की रात मस्कट एयरलाइंस से चेन्नई पहुंचे और 23 अप्रैल की सुबह-सुबह पोलिंग बूथ पर जाकर टीवीके के पक्ष में मतदान किया. चुनाव नतीजे आने के बाद मणिकंदन ने गर्व से पोस्ट किया कि हो सकता है कि मेरा वोट ही वह एक वोट हो, जिसने आखिरकार इस चुनाव का नतीजा तय किया.
तिरुप्पत्तूर की यह एक वोट की जीत उस विशाल लहर का सिर्फ एक हिस्सा है, जो सुपरस्टार विजय की पार्टी ने पूरे तमिलनाडु में पैदा की है. टीवीके ने अपने पहले ही चुनाव में 108 सीटें जीतकर प्रतिद्वंद्वियों को मीलों पीछे छोड़ दिया है. सत्तारूढ़ डीएमके (DMK) महज 59 सीटों पर सिमट गई, जबकि एआईएडीएमके (AIADMK) 47 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर खिसक गई. कांग्रेस को 5 और पीएमके को 4 सीटें मिलीं.
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खुद सुपरस्टार विजय ने पेरम्बूर और ईस्ट त्रिची, दोनों सीटों से शानदार जीत हासिल की है. सबसे बड़ा राजनीतिक भूचाल कोलाथुर सीट पर आया, जहां टीवीके के वी.एस. बाबू (पूर्व DMK नेता) ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को 8,795 वोटों के अंतर से हरा दिया.
डीएमके के लिए यह चुनाव किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा, जहां पेरियाकरुप्पन के साथ-साथ गीता जीवन और एम.ए. सुब्रमण्यम सहित 10 से ज्यादा मंत्रियों को अपनी सीट गंवानी पड़ी है. यह चुनाव न सिर्फ विजय के राजनीतिक उदय के लिए, बल्कि यह याद दिलाने के लिए भी हमेशा जाना जाएगा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उस ‘एक वोट’ में छिपी होती है.
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