नितिशा बंसल / West Bengal Exit Poll Analysis: बंगाल में वोटिंग खत्म हो चुकी है और अब सबकी नजर 4 मई के नतीजों पर है. लेकिन उससे पहले तमाम बड़े एग्जिट पोल्स में बीजेपी को बहुमत मिलता दिख रहा है. 34 साल के लेफ्ट राज को खत्म करने वाली ममता बनर्जी की TMC क्या अब सत्ता से बाहर हो जाएगी? आइये एग्जिट पोल के आधार पर समझेंगे – TMC के पिछड़ने के वो 5 बड़े कारण, और BJP ने वो कौन सी 5 स्ट्रेटजी अपनाई जिससे उसकी जीत की राह बनती दिख रही है.
ज्यादातर एग्जिट पोल्स बीजेपी को 148 से 165 सीटों का अनुमान दे रहे हैं. बहुमत का आंकड़ा 147 है. वहीं TMC 110-125 सीटों पर सिमटती दिख रही है. 2021 में TMC के पास 215 सीटें थीं. यानी एग्जिट पोल सही हुए तो TMC को 90-100 सीटों का नुकसान हो सकता है. तो ये बदलाव क्यों दिख रहा है?
2011 से TMC सत्ता में है. 15 साल बाद नेचुरल एंटी-इनकंबेंसी का फैक्टर ग्राउंड पर दिखा. खासकर शहरी युवाओं में ‘डबल इंजन सरकार’ का नैरेटिव इस चुनाव में हावी रहा.
SSC शिक्षक भर्ती घोटाला और राशन वितरण घोटाले इस चुनाव में बड़ा मुद्दा बने. TMC के कई नेताओं पर कार्रवाई हुई. ‘कट मनी कल्चर’ और ‘भाई-भतीजावाद’ का आरोप BJP ने हर रैली में उठाया.
संदेशखाली की घटनाओं ने महिला सुरक्षा पर सवाल खड़े किए. इस नैरेटिव को और मजबूत किया कोलकाता के RG Kar मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुई घटना ने. ये मामला ‘सिस्टम फेलियर’ का सिंबल बना. शहरी मिडिल क्लास, खासकर महिलाएं और पढ़ा-लिखा वर्ग जो पहले TMC का सॉफ्ट वोटर था, वह भी सुरक्षा को लेकर TMC से नाराज दिखा BJP ने इसे ‘बेटियों की सुरक्षा में TMC फेल’ के तौर पर प्रोजेक्ट किया. पंचायत चुनाव हिंसा + संदेशखाली + RG Kar – इन तीनों ने कानून-व्यवस्था को बड़ा मुद्दा बना दिया.
बंगाल में 27% मुस्लिम वोटर हैं. 2021 में एकमुश्त TMC को गए थे. इस बार के एग्जिट पोल दिखाते हैं कि कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन और ISF ने इसमें सेंध लगाई है. मुस्लिम वोट बंटने से TMC का कोर वोट बैंक कमजोर पड़ता दिख रहा है.
2021 में ममता ने BJP को ‘बाहरी पार्टी’ बताया था. इस बार BJP ने ‘जय श्री राम’ को बंगाली कल्चर से जोड़ने की कोशिश की और ‘जय मां काली’ का नर मजबूती से जोड़ा… दुर्गा पूजा से जुड़े विवादों को BJP ने अपने पक्ष में भुनाया.
BJP ने इस बार बूथ मैनेजमेंट पर सबसे ज्यादा फोकस किया. 2021 की कमी से सीखकर पन्ना प्रमुख मॉडल को बंगाल में मजबूती से लागू किया गया. जहां एक कार्यकर्ता की जिम्मेदारी 30-60 वोटर की थी. इनका काम सिर्फ प्रचार नहीं बल्कि वोटर को पोलिंग बूथ तक लेकर आना था जिसे भाजपा ने नाम दिया Man to Man मार्किंग
CAA लागू करने का नोटिफिकेशन चुनाव से ठीक पहले आया. इससे 70 लाख मतुआ वोटर्स को साधने की कोशिश दिखी. राजबंशी और आदिवासी इलाकों में भी BJP का फोकस रहा.
PM मोदी ने इस बार बंगाल में 25 से ज्यादा रैलियां कीं. साथ ही सुवेंदु अधिकारी, दिलीप घोष जैसे स्थानीय चेहरों को आगे रखा गया, जिससे ‘बाहरी बनाम बंगाली’ का नैरेटिव कमजोर पड़ा.
TMC की ‘लक्ष्मी भंडार’ स्कीम के जवाब में BJP ‘मोदी गारंटी’ लेकर आई – हर महिला को ₹3000, ₹10 में भरपेट भोजन जैसे वादे. केंद्र की स्कीम्स रोकने का आरोप भी TMC पर उल्टा पड़ा.
2021 में BJP को करीब 50% हिंदू वोट मिले थे. इस बार एग्जिट पोल 58-60% हिंदू वोट BJP के साथ दिखा रहे हैं. महिला ‘साइलेंट वोटर’ का भी रुझान BJP की तरफ दिखा है.
ममता बनर्जी ने बीजेपी को शाकाहारी संस्कृति वाली पार्टी बताया था और इस काउंटर करने के लिए भाजपा के कई नेता बंगाल में माछ-भात यानी की मछली और चावल खाते दिखे जो बंगाल की पहचान है. 15 दिनों तक बंगाल में रहकर गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव प्रचार किया सुबह के 3:00 तक बैठकें की. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ताबड़तोड़ रैलियां की.
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इसी बीच टीएमसी सांसद सयानी घोष के ‘मेरे दिल में है काबा मेरे आखों में मदीना’ गीत वाले वायरल वीडियो को ‘काबा बनाम मां काली’ का रूप दिया. जो TMC को बट्टा लगा सकता है. केंद्र द्वारा महिला आरक्षण जल्दी लागू करने के लिए तीन विधेयक लाए गए. चुनाव से ठीक पहले SIR हुआ जिसमें 91 लाख वोटर के नाम हटाए गए. रोजगार, इंडस्ट्रियलीसैशन, डबल इंजन सरकार और सोनार बांग्ला की बात की गई. बीजेपी ने ममता बनर्जी पर व्यक्तिगत हमले लगभग बंद कर दिए जिससे पिछली बार ममता बनर्जी को सहानुभूति हासिल हुई थी.
अब 4 मई का इंतजार है..ये तमाम विश्लेषण एग्जिट पोल्स पर आधारित हैं. असली तस्वीर 4 मई 2026 को काउंटिंग के बाद साफ होगी. अगर एग्जिट पोल नतीजों में बदले, तो 2029 लोकसभा के लिए ये बड़ा संकेत होगा. लेकिन याद रखिए – 2021 में कई एग्जिट पोल के अनुमान गलत साबित हुए थे. इसलिए फाइनल नतीजों का इंतजार करना ही बेहतर है.
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