Assam Election Result Live: असम विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की सियासत में एक नया अध्याय लिख दिया है. एग्जिट पोल्स में जिस ‘भगवा लहर’ और हिमंत बिस्वा सरमा की बंपर वापसी की भविष्यवाणी की गई थी, वह अब हकीकत में तब्दील हो गई है. असम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) गठबंधन 97 सीटों के साथ लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रहा है. लेकिन, इस चुनाव की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर असम की सांस्कृतिक राजधानी जोरहाट से आई है.
असम में कांग्रेस का चेहरा, प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे सांसद गौरव गोगोई अपना चुनाव हार गए हैं. उन्हें 23 हजार से अधिक वोटों के भारी अंतर से करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है.
असम में पिछले 10 साल से काबिज बीजेपी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए कांग्रेस ने इस बार अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. पार्टी ने बदरुद्दीन अजमल की AIUDF से गठबंधन भी नहीं किया और गौरव गोगोई को मुख्यमंत्री चेहरे के तौर पर आगे किया था. लेकिन नतीजे कांग्रेस के लिए 2021 से भी ज्यादा निराशाजनक रहे.
जोरहाट विधानसभा सीट पर बीजेपी के हितेंद्र नाथ गोस्वामी को कुल 69,439 वोट मिले, जबकि गौरव गोगोई 46,257 मतों पर ही सिमट गए. हार का अंतर 23,182 वोटों का रहा. कांग्रेस जो पिछली बार 29 सीटें जीती थी, वह इस बार महज 24 सीटों पर सिमटती दिख रही है. इनमें से भी 19 सीटों पर जीतने वाले प्रत्याशी मुस्लिम समुदाय से हैं.
2024 के लोकसभा चुनाव में गौरव गोगोई ने जोरहाट लोकसभा सीट से ही शानदार जीत दर्ज की थी. लेकिन अब विधानसभा चुनाव में इस लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली 10 में से 9 सीटों पर बीजेपी गठबंधन ने कब्जा जमा लिया है. सिर्फ सिबसागर सीट से अखिल गोगोई आगे चल रहे हैं.
पिता की विरासत और मुख्यमंत्री की कुर्सी का सपना संजोए गौरव गोगोई को जिस नेता ने पटखनी दी है, वे असम की राजनीति के कद्दावर चेहरों में गिने जाते हैं. इस बंपर जीत के साथ ही हितेंद्र नाथ गोस्वामी जोरहाट से छठी बार विधायक चुने गए हैं. वे असम गण परिषद (AGP) के संस्थापक चेहरों में से एक रहे हैं. 1991, 1996 और 2001 में वे AGP के टिकट पर जोरहाट से जीते थे.
2014 में बीजेपी का दामन थामने के बाद उनका राजनीतिक कद और बढ़ा. 2016 और 2021 में उन्होंने इस सीट से जीत दर्ज की और 2017 से 2021 तक असम विधानसभा के स्पीकर की जिम्मेदारी भी संभाली. इससे पहले उनका मुख्य मुकाबला कांग्रेस के राणा गोस्वामी से होता था. राणा गोस्वामी को उन्होंने 2016 में 13,638 और 2021 में 6,488 वोटों से हराया था. इस बार कांग्रेस ने चेहरा बदला, लेकिन हितेंद्र गोस्वामी का वर्चस्व कायम रहा.
असम की सांस्कृतिक राजधानी कहा जाने वाला जोरहाट साहित्य, संगीत और चाय उद्योग का बड़ा केंद्र है. राजनीतिक रूप से यह सीट बेहद प्रभावशाली है, जिसका गठन 1951 में हुआ था. 10 फरवरी 2026 की मतदाता सूची के अनुसार, यहां कुल 1,48,280 वोटर हैं. इनमें शहरी मतदाताओं की संख्या 64.87 प्रतिशत है, जबकि ग्रामीण वोटर 35.13 प्रतिशत हैं.
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यहां अनुसूचित जाति (8.04%), अनुसूचित जनजाति (1.95%) और मुस्लिम मतदाता (7% से कम) हैं. शहरी बहुल होने के कारण जोरहाट में विकास, सड़क, व्यापार, रोजगार और नागरिक सुविधाएं हमेशा से बड़े चुनावी मुद्दे रहते हैं. हितेंद्र नाथ गोस्वामी की लगातार जीत यह साबित करती है कि उन्होंने इन शहरी मतदाताओं की नब्ज को मजबूती से पकड़ रखा है.
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