चुनाव

अल्पसंख्यक समुदाय के विरुद्ध टिप्पणी करने पर पहले किया निलंबित, हफ्तेभर बाद ही कांग्रेस ने अभिलाष साहू को बना दिया प्रदेश उपाध्यक्ष

रांची (18 सितंबर 2026): झारखंड कांग्रेस के भीतर अनुशासन और विवादित बयानों को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान में एक नया और बड़ा मोड़ सामने आ गया है. अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ विवादित टिप्पणी करने के मामले में पार्टी से निलंबित किए गए अभिलाष साहू की प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर बहाली के फैसले पर ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के झारखंड प्रभारी के. राजू ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. उन्होंने अनुशासन समिति की अंतिम जांच रिपोर्ट आने तक साहू के सभी संगठनात्मक दायित्वों को स्थगित रखने का सख्त निर्देश दिया है.

क्या था पूरा मामला और क्यों हुई थी कार्रवाई?

यह पूरा विवाद रांची के ओरमांझी इलाके में सड़क जाम के दौरान सामने आया था. प्रदर्शन के दौरान अभिलाष साहू और पार्टी के एक अन्य नेता अमरेंद्र कुमार सिंह ने एक वीडियो बनाकर अल्पसंख्यक समुदाय के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं. सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद पार्टी की धर्मनिरपेक्ष छवि पर सवाल उठने लगे. मामले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने त्वरित संज्ञान लेते हुए दोनों नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था.

हफ्ते भर में निलंबन वापसी और कुर्सी मिलने से भड़का असंतोष

विवाद उस समय गहरा गया जब लगभग एक सप्ताह पूर्व (14 सितंबर 2026 को) झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के निर्देश पर एक अधिसूचना (पत्र संख्या 431/09/2026) जारी की गई. इस आदेश के तहत अभिलाष साहू की प्राथमिक सदस्यता बहाल करते हुए उन्हें सीधे झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष पद पर पुनर्नियुक्त कर दिया गया. वहीं, इसी मामले में आरोपी दूसरे नेता अमरेंद्र कुमार सिंह का निलंबन बरकरार रखा गया. इस दोहरे मापदंड और इतनी जल्दी हुई बहाली को लेकर पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी और विरोध के स्वर उठने लगे. पार्टी के अंदरूनी असंतोष को देखते हुए एआईसीसी के स्थायी आमंत्रित सदस्य एवं झारखंड प्रभारी के. राजू ने प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश को 17 सितंबर को कड़ा पत्र लिखा. उन्होंने स्पष्ट किया कि अभिलाष साहू के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई से संबंधित जांच रिपोर्ट का परीक्षण अभी लंबित है. ऐसे में बिना जांच पूरी हुए उन्हें पद देना न्यायसंगत नहीं है.

Bharat Express Desk

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