सोशल मीडिया पर खुद को फैक्टचेकर बताने वाले और एक खास एजेंडे के तहत चुनिंदा मुद्दों को हवा देने वाले मोहम्मद ज़ुबैर का एक नया प्रोपेगैंडा बुरी तरह बेनकाब हो गया है. इस बार ज़ुबैर ने ट्रेन के भीतर चल रहे एक हिंदू पूजा-पाठ और अभिषेक का वीडियो शेयर करके भारतीय रेलवे और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी.
ज़ुबैर ने बकायदा सवालिया निशान लगाते हुए ट्वीट किया कि क्या रेल मंत्रालय ने इसकी अनुमति दी है और अगर हां, तो इसकी प्रक्रिया क्या है? ज़ुबैर का मकसद इस वीडियो के जरिए यह दिखाना था कि नियमों को ताक पर रखकर ट्रेन के भीतर धार्मिक गतिविधियां चलाई जा रही हैं. लेकिन नॉर्दर्न रेलवे ने महज कुछ ही घंटों के भीतर तथ्यों की ऐसी रसीद दिखाई कि ज़ुबैर का पूरा फेक नैरेटिव हवा में उड़ गया.
मोहम्मद ज़ुबैर जिस वीडियो को लेकर आम यात्रियों की सुविधा और रेलवे के नियमों की दुहाई दे रहा था, उसकी सच्चाई पूरी तरह कमर्शियल और लीगल निकली. नॉर्दर्न रेलवे ने आधिकारिक बयान जारी कर ज़ुबैर के झूठ का गुब्बारा फोड़ दिया. रेलवे ने साफ किया कि यह कोई आम जनरल या स्लीपर कोच नहीं था बल्कि यह रेलवे की एक प्राइवेट सैलून कार थी, जिसे बाकायदा आईआरसीटीसी के जरिए 8 जुलाई 2026 को बुक किया गया था.
इस कमर्शियल बुकिंग के लिए बुकिंग करने वाली पार्टी ने रेलवे को पूरे 3 लाख 8 हजार 580 रुपये का एडवांस भुगतान किया था. यानी नियमों के तहत मोटी रकम चुकाकर इस पूरे कोच को प्राइवेट तौर पर रिजर्व किया गया था.
रेलवे द्वारा जारी किए गए इनपुट्स के अनुसार, इस प्राइवेट सैलून कार को 10 जुलाई 2026 को ट्रेन संख्या 12926 पश्चिम एक्सप्रेस में जोड़ा गया था. यह सैलून कार नई दिल्ली से मुंबई सेंट्रल तक की एकतरफा यात्रा के लिए पूरी तरह से बुक थी. नॉर्दर्न रेलवे ने परिचालन व्यवहार्यता को देखते हुए इस सैलून के कमर्शियल रन का नोटिफिकेशन बाकायदा 10 जुलाई को ही जारी कर दिया था.
रेलवे के नियमों के मुताबिक, जब कोई पार्टी लाखों रुपये देकर पूरा सैलून कोच बुक करती है, तो वह उसके भीतर अपनी निजी और पारिवारिक गतिविधियों के लिए स्वतंत्र होती है, जब तक कि उससे सुरक्षा नियमों का उल्लंघन न हो.
ज़ुबैर ने अपने ट्वीट से यह नैरेटिव सेट करने की कोशिश की थी कि इस पूजा-पाठ से ट्रेन की सुरक्षा या यात्रियों को खतरा हो सकता था. इस पर भी रेलवे ने करारा जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि यात्रियों की सुरक्षा, समयबद्धता और सुविधा सुनिश्चित करना रेलवे की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इससे कोई समझौता नहीं किया गया है.
इस पूरी घटना में न तो कोई घायल हुआ और न ही किसी नियम का उल्लंघन हुआ. वीडियो में जो पुजारी मंत्रोच्चार और अभिषेक करते हुए दिखाई दे रहे हैं, वे उसी सैलून कार के भीतर पूजा कर रहे थे जिसे पार्टी ने मोटी रकम देकर बुक किया था, जिससे आम यात्रियों का कोई लेना-देना नहीं था.
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इस पूरे मामले (Indian Railway Private Saloon Coach) के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर मोहम्मद ज़ुबैर की जमकर धज्जियां उड़ रही हैं. यूज़र्स का कहना है कि बिना किसी रिसर्च और बुनियादी जानकारी के सिर्फ एक खास समुदाय की धार्मिक गतिविधि को निशाना बनाने के चक्कर में ज़ुबैर ने एक बार फिर खुद को ट्रोल करवा लिया है. रेलवे का यह आधिकारिक जवाब उन सभी लोगों के मुंह पर करारा तमाचा है जो हर वैध चीज को भी विवाद का रूप देने की कोशिश करते हैं.
इस फैक्टचेक ने पूरी तरह साबित कर दिया है कि जिसे ज़ुबैर रेलवे की लापरवाही बता रहा था, वह दरअसल भारतीय रेलवे का एक वैध कमर्शियल रेवेन्यू मॉडल था, जिसके तहत हर नागरिक को नियमपूर्वक भुगतान करके सैलून कार बुक करने का अधिकार है.
-भारत एक्सप्रेस
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