11वें व्हाइटस्वान रिस्पॉन्सिबल आर्ट फेस्टिवल
11th WhiteSwan Responsible Art Festival: 11वां व्हाइटस्वान रिस्पॉन्सिबल आर्ट फेस्टिवल के प्रथम दिन शास्त्रीय नृत्य के क्षेत्र में नई दिल्ली की प्रतिष्ठित कथक नृत्यांगना एवं पुष्कला संगीत केंद्र की संस्थापिका एवं निदेशक सुश्री स्नेहा मुखर्जी ने अपनी प्रभावशाली कथक नृत्य की प्रस्तुति दी.
सुश्री स्नेहा मुखर्जी कथक के कालका-बिंदादिन लखनऊ घराने से संबद्ध हैं तथा उन्होंने गुरु पं. राम बाबू भट्ट के मार्गदर्शन में कथक की शिक्षा प्राप्त की है. वे एक प्रशिक्षित कथक नृत्यांगना एवं गायिका होने के साथ-साथ कला-शिक्षिका, कोरियोग्राफर और संगीत साधिका के रूप में भी सक्रिय हैं. उन्होंने पुष्कला संगीत केंद्र के माध्यम से पिछले एक दशक से अधिक समय से कला एवं संस्कृति की शिक्षा और प्रतिभाओं के विकास में योगदान दिया है. उन्हें प्रयाग संगीत समिति की वरिष्ठ परीक्षक तथा संगीत नाटक अकादमी के पैनल ऑफ जजमेंट की सदस्य के रूप में भी कला क्षेत्र में जिम्मेदारियां प्राप्त हैं.
सुश्री स्नेहा मुखर्जी ने अपनी प्रस्तुति का शुभारंभ कल्याण ठाट में राम स्तुति से किया. इसके पश्चात उन्होंने शुद्ध कथक की प्रस्तुति में पं. बिरजू महाराज द्वारा राग कलावती में रचित तराना प्रस्तुत किया. उनकी प्रस्तुति में कथक की पारंपरिक लयकारी, सूक्ष्म भाव-अभिव्यक्ति, नृत्य-सौंदर्य और शास्त्रीय परंपरा का प्रभावी समन्वय देखने को मिला.
राम स्तुति के आध्यात्मिक भाव से आरंभ हुई प्रस्तुति से लेकर तराने की जटिल लयकारी तक, सुश्री मुखर्जी ने कथक की पारंपरिक सौंदर्य-परंपरा को मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया. प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा और उसकी आध्यात्मिक भावभूमि को अभिव्यक्त करते हुए युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया.
प्रस्तुति के उपरांत विद्यार्थियों एवं युवा दर्शकों को संबोधित करते हुए सुश्री स्नेहा मुखर्जी ने कहा कि संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि मन और आत्मा से जुड़ने तथा भावनाओं को अभिव्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम है. उन्होंने युवाओं से भारतीय संगीत एवं कला की समृद्ध परंपरा को समझने, अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने तथा इस विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का आह्वान किया.
उन्होंने कहा कि संगीत की अभिव्यक्ति चाहे आधुनिक संगीत, हिप-हॉप अथवा किसी अन्य शैली में हो, उसके मूल में सात स्वर ही आधारभूत भूमिका निभाते हैं. इसलिए आधुनिकता को अपनाते हुए भी अपनी संस्कृति, संगीत परंपरा और कलात्मक विरासत को समझना तथा उसका संरक्षण करना आवश्यक है.
कार्यक्रम के दौरान सुश्री स्नेहा मुखर्जी ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं भी प्रेषित कीं. अपने संबोधन में उन्होंने रामराज्य की अवधारणा को एक आदर्श, शांतिपूर्ण और जिम्मेदार समाज के निर्माण से जोड़ते हुए कहा कि ऐसे समाज के निर्माण में प्रत्येक नागरिक की अपनी भूमिका और जिम्मेदारी होती है.
उन्होंने प्रधानमंत्री के दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन की कामना करते हुए देशहित में निरंतर कार्य करने की शुभकामनाएं दीं तथा कला एवं संस्कृति को समाज में सकारात्मक मूल्यों, संवेदनशीलता और सद्भाव के प्रसार का महत्वपूर्ण माध्यम बताया.
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