भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में कुछ तारीखें ऐसी होती हैं, जो सिर्फ कैलेंडर का पन्ना नहीं बदलतीं, बल्कि पूरे देश की तकदीर और राजनीति की दिशा बदल देती हैं. 26 मई 2014 एक ऐसी ही ऐतिहासिक तारीख है. आज ही के दिन, यानी ठीक 12 साल पहले, नरेंद्र मोदी ने देश के 15वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेकर भारतीय राजनीति में एक ऐसा नया अध्याय शुरू किया था, जिसकी गूंज आज 2026 में भी उतनी ही मजबूत है.
राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आयोजित उस भव्य समारोह ने न केवल सत्ता का हस्तांतरण किया, बल्कि दशकों से चली आ रही गठबंधन राजनीति के दौर को खत्म कर ‘पूर्ण बहुमत और मजबूत कूटनीति’ के एक नए युग का शंखनाद किया था. आइए रीवाइंड करते हैं इतिहास के उस पन्ने को और जानते हैं कि उस दिन के बाद से भारत में क्या-क्या बदल गया.
2014 का वह शपथ ग्रहण समारोह सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक कौतूहल का विषय था. पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने अपने शपथ ग्रहण में ‘सार्क’ (SAARC) देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया था. पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से लेकर श्रीलंका के महिंदा राजपक्षे तक, दिल्ली के ऐतिहासिक दरबार में मौजूद थे. यह संदेश साफ था—भारत अब वैश्विक मंच पर फ्रंट फुट पर खेलने को तैयार है.
न केवल कूटनीति, बल्कि पिछले एक दशक से ज्यादा के समय में घरेलू मोर्चे पर भी ऐसे कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए, जिन्होंने आम आदमी की जिंदगी और देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह री-शेप कर दिया.
पीएम मोदी की यह राजनीतिक यात्रा देश के करोड़ों आम नागरिकों के लिए एक जीवंत प्रेरणा है. एक बेहद साधारण पृष्ठभूमि और रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले परिवार से निकलकर देश के सर्वोच्च लोकतांत्रिक पद तक पहुंचना, भारतीय लोकतंत्र की असली खूबसूरती और ताकत को दर्शाता है. गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में ‘विकास मॉडल’ स्थापित करने के बाद, जब उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति का रुख किया, तो देश की जनता ने उनके ‘सुशासन और कड़े नेतृत्व’ के वादे पर आंख मूंदकर भरोसा जताया.
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26 मई 2014 को जो सफर शुरू हुआ था, उसने भारतीय राजनीति के पारंपरिक ढर्रे को हमेशा के लिए बदल दिया. आज जब हम 2026 में खड़े होकर पीछे मुड़कर देखते हैं, तो पाते हैं कि नीतियां बनाने से लेकर उन्हें जमीन पर लागू करने की रफ्तार (Speed and Scale) में जो बदलाव आया है, वह इसी ‘मोदी युग’ की देन है. इस दौर ने देश के युवाओं को यह विश्वास दिलाया है कि कठिन परिश्रम, दृढ़ संकल्प और एक स्पष्ट विजन के बल पर भारत को ‘विश्वगुरु’ और एक विकसित राष्ट्र बनाने का सपना सच किया जा सकता है.
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