दिल्ली के कपड़ा कारोबारी ने 50 लाख का कर्जा चुकाने के लिए ऐसी खौफनाक साजिश रची जिससे हर कोई हैरान हो गया है. कारोबारी ने पहले अपने नौकर का पचास लाख का इंश्योरेंस कराया और अब गंगा किनारे उसका बृजघाट मुक्ति धाम में अंतिम संस्कार करने आ पहुंचे.
लेकिन अंतिम संस्कार करा रहे पंडित ने पिंड रखवाने के लिए जैसे ही शव के ऊपर रखे कपड़े हटाए तो चिता पर रखा हुआ शव पुतला निकला जिसको देखकर वहां भीड़ इकट्ठा हो गई, तभी किसी ने पुलिस को सूचना दे दी जिसके बाद पुलिस ने अंतिम संस्कार कराने आए दो युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो कारोबारी की साजिश का खुलासा हुआ.
दरअसल, दिल्ली निवासी कमल सोमानी और आशीष खुराना अपने नौकर अंशुल कुमार पुत्र धर्मराज निवासी करोल बाग दिल्ली की डेड बॉडी लेकर अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट i20 कार (HR26DN6168) से हापुड़ के बृजघाट लेकर आए थे. जब अंतिम संस्कार के लिए बॉडी को गाड़ी से बाहर निकाला तो देखा कि बॉडी की जगह पुतला था, इन दोनों युवकों ने लकड़ी बेचने वाले युवक को भी सही जबाव नहीं दिया और लकड़ी लेकर आगे बढ़ गए थे.
स्थानीय लोगों के पूछने ने बताया कि ये बॉडी अंसारी हॉस्पिटल पालम दिल्ली के स्टाफ द्वारा सील करके दी थी, पर यहां देखा तो बॉडी की जगह पुतला था वह खुद भी हैरान होने का नाटक करने लगे लेकिन तभी मौके पर पुलिस आ गई तभी मामला खुलने लगा.
पुलिस ने दोनों लोगों से कड़ाई से पूछताछ की तो कमल सोमानी ने बताया कि उसके ऊपर 50 लाख का कर्जा है, जिसको लेकर वह काफी दिनों से डिप्रेशन में है. कर्ज चुकाने के लिये उसने एक योजना बनाई थी. इस योजना के तहत उसने अपने दोस्त अंशुल के भाई नीरज को कुछ समय के लिए उसने कपड़ों की दुकान पर काम पर रखा था तभी किसी बहाने से उसके आधारकार्ड व पैनकार्ड ले लिया था. आधार और पैनकार्ड का उपयोग करके उसने अंशुल के नाम से करीब एक वर्ष पूर्व निजी कंपनी का इंशयोरेंस करवाया था, जिसकी किस्त भी नियमित तौर पर भर रहा था.
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बीते 27 नवंबर को वो अंशुल का पुतला लेकर ब्रजघाट अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे थे. आरोपी ने बताया कि वो अंशुल के पुतले का अंतिम संस्कार करके मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर इंशयोरेंस का लाभ लेना चाहता था. इसके बाद पुलिसवालों ने अंशुल को कमल सोमानी के मोबाइल से वीडियो काल करवाकर बातचीत की गई तो अंशुल ने बताया कि वह कुछ दिनों से अपने स्थायी निवास प्रयागराज आया हुआ है. फिलहाल इस मामले में पुलिस पूछताछ कर रही है.
घटना के बाद हापुड़ के गढ़ सर्किल की सीओ स्तुति सिंह का कहना है कि शक के आधार पर दोनों लोगों को थाने लाकर पूछताछ की गई तो उन्होंने बीमा की राशि को वसूलने के लिए इस फर्जी कहानी को रचा लेकिन पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर उनकी साजिश नाकाम कर दी है.
-भारत एक्सप्रेस
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